ग्रेवल सड़क और पुलिया निर्माण में अनियमिताएं
- शासकीय राशि का बंदरबांट
- नारायणगंज सिंगोधा में गुणवत्ताहीन कार्य
- ग्रामीण ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. जनपद नारायणगंज में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। शासकीय राशि का बंदरबांट करते हुए जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। एक ऐसे ही भ्रष्टाचार का खुलासा नारायणगंज के ग्राम सिंगोधा में बन रहे ग्रवेल मार्ग का हुआ है। बताया गया कि सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए स्वीकृत की जा रही योजनाओं को भ्रष्ट ठेकेदारों और शासकीय कर्मचारियों की मिलीभगत से पलीता लगाया जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण ग्राम पंचायत सिंगोधा के पोषक ग्राम मोहगांव में बन रही ग्रेवल सड़क है, जहाँ 28 लाख रुपये की लागत से बन रही सड़क में गुणवत्ताहीन सामग्री का प्रयोग कर सरकारी पैसे की जमकर होली खेली जा रही है।
जानकारी अनुसार आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में रहने वाले भोले-भाले किसानों और ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पंचायती राज के तहत विभिन्न योजनाओं का जमीनी स्तर पर मान शून्य प्रतीत होता है। निर्माण कार्यों में ठेकेदार और शासकीय कर्मचारी मिलकर गुणवत्ता से समझौता करते हुए सरकारी खजाने को चूना लगा रहे हैं, जिससे कुछ समय बाद ही योजना का नामोनिशान मिट जाता है।

ग्रामीणों ने बताया कि मनरेगा के तहत सिंगोधा से मोहगांव तक लगभग 2 किलोमीटर लंबी ग्रेवल सड़क का निर्माण कार्य जारी है। इस कार्य के लिए लगभग 28 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं, लेकिन ठेकेदार द्वारा सड़क निर्माण में गुणवत्ता के किसी भी पैमाने का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। बताया गया कि निर्माण में इस्तेमाल की जा रही गिट्टी मिक्स मसाला, मुर्रम, सीमेंट, रेत और तराई में भी भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है। इतना ही नहीं सड़क में स्वीकृत दो नई पुलियाओं के निर्माण में भी बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई है। पुलिया पूरी तरह से टूटी हुई हैं और उनकी ऊपर की दीवारें भी क्षतिग्रस्त हैं, जिससे उनकी उपयोगिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
पुरानी पुलियाओं की मरम्मत में भी धांधली
बताया गया कि ठेकेदार द्वारा पूर्व में क्षतिग्रस्त पुलिओं की मरम्मत का कार्य भी नहीं किया गया है। इन पुरानी पुलियाओं को बिना किसी मरम्मत के सीधे मुर्रम डालकर ढक दिया गया है, जिससे ग्रामीण मरम्मत कार्य के लिए आवाज न उठा सकें। इस प्रकार ठेकेदार द्वारा पूरी तरह से गुणवत्ताहीन कार्य को अंजाम दिया जा रहा है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है और ग्रामीणों को लंबे समय तक इसका लाभ नहीं मिल पाएगा। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।












