स्वस्थ यकृत मिशन का आगाज, फैटी लीवर की पहचान और उपचार पर जोर
- आज से 12 दिवसीय स्वस्थ यकृत मिशन होगा शुरू
- सामुदायिक स्तर पर होगी जांच और उपचार
- यकृत रोगों की रोकथाम और प्रबंधन पर विशेष जोर
मंडला महावीर न्यूज 29. स्वस्थ यकृत मिशन के तहत मंडला जिले के स्वास्थ्य कर्मचारियों को यकृत रोगों की रोकथाम, पहचान और प्रबंधन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस पहल का उद्देश्य यकृत संबंधी बीमारियों के बढ़ते बोझ को कम करना और सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है। बताया गया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नारायणगंज में सीबीएमओ डा. अमृत लाल कोल के मार्गदर्शन में एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में चिकित्सक, एएनएम, सीएचओ, सुपरवाईजर, पैरामेडिकल स्टाफ समेत स्वास्थ्य केन्द्र के अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। प्रशिक्षण में बताया गया कि जिले में गैर अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल के तत्वावधान में स्वस्थ यकृत मिशन अभियान आज 1 जून से 12 जून तक चलाया जाएगा। इस 12 दिवसीय मिशन का मुख्य उद्देश्य समुदाय में फैटी लीवर के रोगियों की पहचान करना और उन्हें समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराना है।
जानकारी अनुसार अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में मेडिकल ऑफिसर, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, एएनएम, सुपरवाइजर, आशा कार्यकर्ता सहित सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मिशन के उद्देश्यों और स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण सत्र में उपस्थित चिकित्सकों ने यकृत रोगों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी, जिनमें फैटी लीवर, हेपेटाइटिस ए, बी, सी, सिरोसिस और लीवर कैंसर शामिल हैं। प्रतिभागियों को इन बीमारियों के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने, निदान के लिए आवश्यक परीक्षणों और प्रभावी उपचार रणनीतियों के बारे में बताया गया। प्रशिक्षण में स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, टीकाकरण और स्वस्थ जीवन शैली के महत्व पर भी जोर दिया गया, जो यकृत रोगों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्वास्थ्य कर्मचारियों को बताया गया कि वे समुदाय में जागरूकता कैसे बढ़ाएं और लोगों को यकृत स्वास्थ्य के प्रति सचेत करें।
क्या है स्वस्थ यकृत मिशन
इस मिशन के अंतर्गत सभी नागरिकों की स्क्रीनिंग की जाएगी, जिसमें उनके शुगर स्तर, वजन, कमर की नाप और लंबाई की जांच शामिल है। इन मापदंडों के आधार पर फैटी लीवर के संभावित रोगियों की पहचान की जाएगी। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि समय पर पहचान और हस्तक्षेप से फैटी लीवर से संबंधित जटिलताओं को रोका जा सकता है।
सामुदायिक स्तर पर चलेगा अभियान
स्वस्थ यकृत मिशन को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए एक चरणबद्ध योजना बनाकर कार्य किया जाएगा। सबसे पहले आशा कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में संदिग्ध मरीजों की पहचान करेंगी और उन्हें नजदीकी उप-स्वास्थ्य केंद्र भेजेंगी। उप-स्वास्थ्य केंद्र में सीएचओ द्वारा प्रारंभिक जांच और परीक्षण किए जाएंगे। यदि आवश्यक हो तो मरीज को प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर के पास भेजा जाएगा। यहां भी विस्तृत जांच के बाद यदि उच्च स्तरीय उपचार की आवश्यकता होगी तो मरीज को जिला चिकित्सालय रेफर किया जाएगा, जहां उन्हें बेहतर और विशेषज्ञ द्वारा उपचार मिल सकेगा।













