पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीण, टैंकरों और जुगाड़ के कुओं का सहारा
- आदिवासी बहुल क्षेत्रों में गहराया जल संकट, नल-जल योजनाएँ अधर में
मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले के नारायणगंज जनपद में भीषण जल संकट गहरा गया है, जहाँ ग्रामीण पीने के पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर हैं और श्रमदान से जुगाड़ के कुएं खोदने को मजबूर हैं। खासकर ग्राम पंचायत घोटखेड़ा के चाटी और समनापुर गाँव इस समस्या से बुरी तरह प्रभावित हैं। जहाँ एक ओर सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजनाएँ कछुआ चाल चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण दूषित पानी पीने को विवश हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
नारायणगंज जनपद की ग्राम पंचायत घोटखेड़ा के ग्राम समनापुर जल संकट से जूझ रहा है। जिसकी आबादी करीब 1200 की है और सात हैंडपंप होने के बावजूद उनमें से केवल एक ही चालू है। यह अकेला हैंडपंप इतनी बड़ी आबादी की प्यास बुझाने में असमर्थ है। हालात ऐसे हैं कि सुबह से ही महिलाएं और बच्चे पानी लेने के लिए लंबी कतारों में लग जाते हैं, जिससे उनके दैनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन उनमें पानी अभी तक नहीं पहुँचा है।
समनापुर के भागीरथी सोयम ने बताया कि ग्राम चाटी में भी पानी का जल स्तर इतना काम हो गया है कि गांव में लगे सात हैडपंप में से सिर्फ एक हैंडपंप चालू है। ग्रामीणों को पेयजल के लिए बड़ी दिक्कत हो रही है। गांव में जल समस्या ठंड के सीजन में विकराल रूप ले रही है। नदी, नालों में युवाओं द्वारा श्रमदान से खोदे गए जुगाड़ के कुओं से ग्रामीण प्रदूषित पानी का उपयोग करने को मजबूर हैं, जो ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गई है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
टैंकरों पर निर्भर चाटी गाँव
ग्राम चाटी की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। ग्राम चाटी के कृपाल सिंग सैयाम ने बताया कि पंचायत द्वारा एक टैंकर लगाया गया है, जो पेयजल उपलब्ध कराता है। लेकिन यह टैंकर भी दो दिन में केवल एक बार आता है, जिससे पीने के पानी की समस्या कुछ हद तक हल होती है, लेकिन नहाने-धोने और पशुओं को पानी पिलाने के लिए ग्रामीणों को 2 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
प्रशासन की अनदेखी और दूषित पानी का उपयोग
ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिवर्ष गर्मी के सीजन में जल स्तर में भारी गिरावट यहां आ जाती है। इस गर्मी में भी नदी, तालाब और स्टॉप डैम का पानी समेत अन्य जल स्रोत भी सूख गए है। महादेव मार्को ने बताया कि गांव में एक ही हैंडपंप के भरोसे ग्रामीण है। गर्मी में सभी जल स्त्रोतों का जल स्तर नीचे चले जाता है। ग्रामीणों वर्षो से इस समस्या से जूझ रहे है।
समस्या निराकरण के लिए बैठक
जल संकट और नेटवर्क की समस्या के निराकरण के लिए ग्राम समनापुर के बुजुर्गों, मुखिया, पंच, मुकदमों और क्षेत्रीय समाजसेवकों ने एक बैठक आयोजित की। इस बैठक में पेयजल और नेटवर्क की समस्याओं से शासन-प्रशासन को अवगत कराने पर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि प्रशासन को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए और गाँव-गाँव पेयजल पहुँचाने की योजनाओं के कार्य में तेजी लानी चाहिए।
इनका कहना है
गांव में एक ही हैंडपंप के भरोसे ग्रामीण हैं। बरसात के दिनों में भले ही नदी, तालाब और स्टॉप डेम में पानी रहता है, लेकिन गर्मी आते ही ये सभी स्रोत सूख चुके हैं। हमें पेयजल की समस्या के चलते इसी में एकत्र गंदा पानी उपयोग करना पड़ रहा है। गांव के युवाओं को श्रमदान कर जुगाड़ का कुआं बनाना पड़ा है।
समनापुर गांव के युवा संगठन ने पानी की किल्लत दूर करने के लिए सराहनीय पहल की है। सभी ने मिलकर एक कुएं को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए श्रमदान कर उसकी सफाई की और सभी ने मिलकर कुएं की खुदाई में भी सहयोग किया है। इसके साथ ही चाटी गांव में भी पेयजल की समस्या है।
चाटी गांव में भी पेयजल का संकट है। चाटी में पेयजल की समस्या है। शासन प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेकर इसका निराकरण करे। गांव-गांव पेयजल पहुंचाने की योजना के कार्य में तेजी से कार्य किया जाना आवश्यक है, खासकर चाटी और समनापुर में पानी की समस्या विकराल रूप ले चुकी है।
ग्राम चाटी में पानी का जल स्तर इतना काम हो गया है कि गांव में लगे सारे हैंडपंप में से एक भी हैंडपंप से पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों को पेयजल की बड़ी दिक्कत हो रही है। गांव में जल समस्या गर्मी के सीजन में विकराल रूप ले लेती है। स्थानीय प्रशासन इस समस्या की तरफ देते हुए इसका निदान करें।
















