उपेक्षा का शिकार जिले के नर्मदा घाट

उपेक्षा का शिकार जिले के नर्मदा घाट

  • नर्मदा घाटों की जर्जर स्थिति चिंताजनक, प्रशासन की अनदेखी भारी
  • माहिष्मती घाट की तर्ज पर हो अन्य घाटों का भी जीर्णोद्धार, नागरिकों की मांग

मंडला महावीर न्यूज 29. धार्मिक आस्था और पर्यटन के केंद्र मंडला जिला मुख्यालय पर स्थित नर्मदा नदी के घाटों की स्थिति अब दो फाड़ में नजर आ रही है। जहां एक ओर माहिष्मती घाट का जीर्णोद्धार और कायाकल्प किया जा रहा है, उसे एक नया और आकर्षक स्वरूप दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय के अन्य प्रमुख नर्मदा घाटों की जर्जर और बदहाल स्थिति स्थानीय प्रशासन की घोर अनदेखी को उजागर कर रही है। इन घाटों पर रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु और आम नागरिक स्नान करने के लिए आते हैं, लेकिन इनकी खस्ता हालत उन्हें भारी परेशानी में डाल रही है।

जानकारी अनुसार नर्मदा नदी को मोक्षदायिनी और जीवनदायिनी माना जाता है। इसके तट पर स्थित मंडला जिला मुख्यालय के विभिन्न घाटों का महत्व न केवल धार्मिक है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी ये महत्वपूर्ण केंद्र हैं। सूर्योदय के साथ ही इन घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो जाता है। लोग आस्था की डुबकी लगाने, धार्मिक अनुष्ठान करने और सुबह की सैर का आनंद लेने के लिए यहां पहुंचते हैं। हालांकि माहिष्मती घाट के अलावा अन्य घाटों पर सुविधाओं का घोर अभाव है और उनकी संरचनाएं जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं।

जर्जर घाटों से हो रही परेशानी 

बताया गया कि कई घाटों की सीढिय़ां टूट चुकी हैं, कहीं रेलिंग गायब है तो कहीं पर पत्थरों के जोड़ उखड़ गए हैं। इससे न केवल बुजुर्गों और बच्चों को बल्कि महिलाओं को भी भारी परेशानी होती है, इसके साथ ही फिसलकर गिरने का भी खतरा बना रहता है। बारिश के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, जब घाटों पर फिसलन बढ़ जाती है और उनमें गंदगी भी जमा हो जाती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन का ध्यान केवल माहिष्मती घाट पर केंद्रित है, जबकि अन्य घाटों की सुध लेना आवश्यक है।

माहिष्मती घाट की तर्ज पर हो अन्य घाटों का जीर्णोद्धार

माहिष्मती घाट के कायाकल्प ने एक मिसाल कायम की है कि कैसे एक घाट को आधुनिक सुविधाओं से युक्त कर एक नया स्वरूप दिया जा सकता है। अब समय आ गया है कि स्थानीय प्रशासन इसी प्रेरणा को लेते हुए जिला मुख्यालय के अन्य नर्मदा घाटों की तरफ भी अपना ध्यान केंद्रित करे। इन घाटों का जीर्णोद्धार न केवल स्थानीय नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि मंडला की धार्मिक और पर्यटन संबंधी पहचान को भी मजबूत करेगा। यह देखना होगा कि स्थानीय प्रशासन कब इन उपेक्षित घाटों की सुध लेता है और उन्हें भी माहिष्मती घाट जैसी रौनक प्रदान करता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं की राय

यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पवित्र नर्मदा के घाटों की ऐसी उपेक्षा की जा रही है। माहिष्मती घाट का जीर्णोद्धार सराहनीय है, लेकिन हमें समग्रता से सोचना होगा। यदि हम नर्मदा घाटों को सुरक्षित और स्वच्छ नहीं रख पाएंगे, तो यह हमारी सांस्कृतिक विरासत के साथ खिलवाड़ होगा। प्रशासन को चाहिए कि वह सभी घाटों के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना बनाए और चरणबद्ध तरीके से उनका जीर्णोद्धार करे।


श्रीकांत कछवाहा, सामाजिक कार्यकर्ता

घाटों की जर्जर स्थिति से महिलाओं और बच्चों को खास तौर पर दिक्कत होती है। टूटी सीढिय़ों और गंदगी के कारण उन्हें स्नान करने में हिचक होती है। साफ-सफाई और सुरक्षा हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। जिस तरह माहिष्मती घाट को सुंदर बनाया जा रहा है, उसी तर्ज पर अन्य घाटों पर भी महिलाओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।


रीता विनोद चौधरी, सामाजिक कार्यकर्ता

मंडला को पर्यटन के नक्शे पर लाने के लिए नर्मदा घाटों का महत्व निर्विवाद है। लेकिन अगर घाटों की स्थिति ऐसी ही रहेगी, तो पर्यटक क्यों आएंगे? यह सिर्फ धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा है। प्रशासन को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और स्थानीय युवाओं को भी घाटों के रखरखाव में शामिल करना चाहिए।


राजेश मिश्रा, सामाजिक कार्यकर्ता

नर्मदा हमारे जिले की जीवन रेखा है। इन घाटों का जीर्णोद्धार केवल सौंदर्यकरण का विषय नहीं, बल्कि जन स्वास्थ्य और सुरक्षा का भी है। प्रशासन को सभी घाटों का सर्वे कर उनकी मरम्मत और रखरखाव का कार्य प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए। यह स्थानीय नागरिकों की बुनियादी आवश्यकता है, जिसे पूरा करना प्रशासन का दायित्व है।


पूजा तिवारी, सामाजिक कार्यकर्ता



 

Leave a Comment