विश्व मधुमक्खी दिवस
- मंड़ला के शहद ने राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान
- देश भर में लोगों की सेहत बना रहा मंडला का प्राकृतिक शहद
- देश के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचता है जिले का शहद
मंडला महावीर न्यूज 29. जिला यूनियन मंड़ला के द्वारा वर्ष 2021-2022 में अंजनिया में प्रधानमंत्री वन धन विकास केन्द्र स्थापित किया गया था। केन्द्र के सदस्यों ने लघुवनोपजों के संग्रह के साथ शहद का एकत्रीकरण और प्रसंस्करण का कार्य प्रारम्भ किया। इस केन्द्र में संलग्न 15 वन धन समूह के 300 सदस्यों में से चिन्हित सदस्यों को वैज्ञानिक विधि से शहद एकत्रीकरण और प्रसंस्करण का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। यहां 6 लाख रूपए की लागत से शहद प्रसंस्करण इकाई स्थापित की गई।
वन धन केन्द्र के प्रभारी बालसिंह ठाकुर ने बताया कि प्रधानमंत्री वन धन विकास केन्द्र की अध्यक्ष कलिंद्री नेटी है। केन्द्र के द्वारा 225 रूपए किलो की दर से वनीय शहद एकत्र किया जाता है। केन्द्र द्वारा वर्ष में 30 क्विंटल शहद एकत्र किया जाता है। मंड़ला का शहद ए प्लस श्रेणी का उच्च गुणवत्ता का शहद है। उच्च गुणवत्ता के इस वनीय शहद को देश भर में आयोजित मेला, प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया जाता है। इसके साथ ही कान्हा नेशनल पार्क के शोभिनियर शॉप में भी यहां का शहद विक्रय के लिए जाता है। जहां आने वाले देशी, विदेशी पर्यटकों को यह प्राकृतिक शहद खूब पंसद आ रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय वनमेला में मिला था द्वितीय स्थान
मध्यप्रदेश शासन द्वारा भोपाल म़ें आयोजित अंर्तराष्ट्रीय वनमेला 2022 में जिला यूनियन पूर्व मंड़ला को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ था। बताया गया कि एमएफपी पार्क, भोपाल, ट्राइफेड और कान्हा नेशनल पार्क स्थित एम्पोरियम में जिले का शहद विक्रय के लिए उपलब्ध है। प्रबंध संचालक वनमंडल अधिकारी, पूर्व सामान्य वनमंडल मंडला श्रीमति प्रीता एसएम वनोपज से आत्मनिर्भरता के लिए प्रयासरत हैं। उपप्रबंधक माधव राव भी इस कार्य में सहयोगी हैं। वन धन केन्द्र अंजनिया के प्रभारी बाल सिंह ठाकुर ने बताया कि साजपानी के ग्रामीण प्रमुखता से शहद एकत्रीकरण के कार्य में संलग्न हैं। केन्द्र में शहद के अलावा वनोपज उत्पाद, आचार और गुड़ निर्माण व विक्रय किया जा रहा है।
प्रशिक्षण के साथ स्पेशल ड्रेस
शहद एकत्रित करने के लिए समूह के सदस्यों को समय समय पर प्रशिक्षित किया जाता है। इन्हें प्रशिक्षण के दौरान बताया जाता है कि किस तरह मधुमक्खी के छाते को नुकसान पहुंचाए बिना ही शहद एकत्रित किया जा सकता है। विक्रय केन्द्र के प्रभारी डॉ एमवाय खोखर ने बताया कि मधुमक्खी के छाते के महज 10 प्रतिशत हिस्से में ही शहद बनता है। जिसे तोडऩे से शहद असानी से निकल जाता है व छात्ते को नुकसान भी नहीं पहुंचता। पूर्व में गांव के लोग आग व धूंआ के माध्यम से शहद निकालते थे जिससे छत्ते को नुकसान तो होता ही है वहीं मधुमक्खियों की भी मौत हो जाती थी। प्रशिक्षण के बाद डंक रोधी स्पेशल ड्रेस सदस्यों को दी जाती है जिसे पहन कर बिना भय के छाते से शहद निकाल लेते हैं। बाद में उक्त शहद को 225 रुपए किलो के हिसाब से संस्था द्वारा खरीद लिया जाता है और उसे फिल्टर करने के बाद 300 रुपए के आसपास विक्रय किया जाता है। फिल्टर के दौरान 15 से 20 प्रतिशत खराब शहद व कचरा अलग कर दिया जाता है। शुद्ध शहद का विक्रय वनौषधि प्रसंस्करण एवं विक्रय केन्द्र के अलावा कलादिर्घा रपटा घाट में किया जा रहा है।
देश के विभिन्न क्षेत्रों में भेजा जा रहा शहद
बता दे कि विंध्य हर्बल्स उत्पाद श्रंृखला भोपाल के मार्ग दर्शन में लघुवनोपज प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केन्द्र का संचालन किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों को रोजगार उपलब्ध तो कराया ही जा रहा है वहीं वनोषधियों को भी संरक्षित किया जा रहा है। जिले में ग्राम पंचायत देवदरा में जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित पूर्व मंडला द्वारा वनौषधि प्रसंस्करण एवं विक्रय केन्द्र की स्थापना की गई है। जहां से जिले भर से शहद एकत्रित किया जाता है। केन्द्र में समूह से क्रय किए गए शहद को फिल्टर कर उपयोग लायक बनाया जाता है। जिसके बाद भोपाल स्थित केन्द्र भेज दिया जाता है जहां से पैंकिंग के बाद देश के विभिन्न क्षेत्रों में शहद पहुंचाया जाता है।















