नियमों को दरकिनार कर ईट भट्टे का संचालन
- अंजनिया क्षेत्र में कई जगह कारोबार, पर्यावरण नियमों की कर रहे अनदेखी
मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के कई क्षेत्रों में नियमों को दरकिनार कर ईट भट्टे का संचालन कर ईटें बनाई जा रही हैं। जिले में बड़ी संख्या में ईट भट्टे चल रहे है, लेकिन अधिकांश ऐसे हैं जो नियमों के मुताबिक ईंट का निर्माण नहीं कर रहे हैं। कई ईट भट्टे संचालकों के पास पर्यावरण की स्वीकृति भी नहीं है। नियमों को दरकिनार कर ईट बेचकर संचालक अपनी जेब भर रहे है। इन ईट भट्टे संचालकों पर संबंधित विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा है।
जानकारी अनुसार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों बिना लाइसेंस के ईट भट्टे का संचालन धड़ल्ले से जारी है। जिस पर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं है। संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में होने के बाद भी आंख बंद करके सब देख रहे है। बताया गया कि ईट भट्टा संचालन के लिए एनजीटी के आदेशानुसार ईट भट्टा संचालकों को एनओसी लेनी पड़ती है, इसके बाद ही ईट भट्टों का संचालन करना पड़ता है। ईट भट्टा संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के अभाव में इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। ईंट ठेकेदारों द्वारा पर राजस्व, खनिज और जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा अनदेखी की जा रही है। नियमों का खुलेआम धज्जियां उड़ाते अनगिनत ईट भट्टे संचालित हो रहे हैं। इससे पर्यावरण तो प्रदूषित हो ही रहा है, इसके साथ ही राजस्व को होने वाले आय का भी नुकसान हो रहा है। बड़े पैमाने पर ईंट का निर्माण कर शासकीय व निजी जमीन के खनन करने में लगे हुए हैं। जंगल से मुफ्त की लकड़ी से ईंट पकाया जाता है, जिसके कारण प्रति हजार ईट तीन से चार हजार रुपए में बेचकर अपनी जेब भर रहे है।
यहां हो रहा ईट भट्टे का संचालन
जनपद पंचायत बिछिया के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्र अंजनिया पंचायत और उसके आसपास गांव जिगराघाट, खामटीपुर, बोकर, बगली, नारा दिवारा, बंजी, अहमदपुर, डुडका, रामनगर, मांद समेत अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध ईट भट्टे का कारोबार बेखौफ चल रहा है। इससे खनिज विभाग को हर महीने लाखों रुपए के राजस्व की हानि हो रही है। मगर ईट भट्टे संचालकों पर कार्रवाई नहीं होने से संचालकों के हौसले बुलंद है। इसके साथ ही नारायणगंज क्षेत्र में भी ईट भट्टे संचालित हो रहे हैं।
पर्यावरण को हो रहा नुकसान
अवैध ईट भट्टो से न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि राजस्व एवं जंगल की लकड़ी, पानी, मिट्टी, चोरी की बिजली का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसके कारण लगातार भू-जल स्तर गिरता जा रहा है। बता दे कि उप तहसील अंजनिया के आसपास के क्षेत्र के गांवो में अवैध ईट भट्टे का संचालन जोरों पर है, लेकिन भट्टे संचालकों पर कार्रवाई न होने के कारण ईट भट्टों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इससे प्रशासन भी बेखबर है।
ग्रामीण ईलाके में नहीं हो सकते संचालित भट्टे
बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल, दफ्तर, कार्यालय के अलावा पेड़ पौधों की 800 मीटर परिधि से दूर अवैध ईट भट्टे का संचालन करने का नियम है, लेकिन इन गांव में इनका पालन नहीं हो रहा है। वही अंजनिया के इन गांव से सटकर कान्हा नेशनल पार्क भी है। जिससे वन संपदा को क्षति पहुंच रही है। इस पर भी संबंधित विभाग का ध्यान नहीं है।
प्रदूषण से बचने नियमों का पालन नहीं
ईट भट्टे के संचालन में प्रदूषण नियंत्रण के लिए तय मानकों की जमकर अनदेखी हो रही है। निर्देश के बावजूद परंपरागत तरीके से बिना चिमनी लगाए खुले में ईंटों को पकाया जा रहा है। इससे निकलने वाले विषैले धुएं से आसपास के रहवासियों में गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। ईट भट्टों का संचालन करने वाले नियमों का पालन नहीं कर रहे है। बिना अनुमति के ही नियमों की धज्जियां उड़ाकर वातावरण को प्रदूषित किया जा रहा है।











