सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ चैत्र नवरात्र की शुरूआत
- आज से चैत्र नवरात्र आरंभ
- आज होगी मॉं शैलीपुत्री का पूजन
- मंत्र जाप से होती मनोकामना पूर्ण
- शक्ति की आराधना के लिए नवरात्र उत्तम
मंडला महावीर न्यूज 29. चैत्र शुक्ल पक्ष की नवरात्र का आरंभ आज 30 मार्च से प्रारंभ होगा। इसी दिन से हिंदु नवसंवत्सर का आरंभ भी होता है। चैत्र मास के नवरात्र को वार्षिक नवरात्र कहा जाता है। इन दिनों नवरात्र में शास्त्रों के अनुसार कन्या या कुमारी पूजन किया जाता है। कुमारी पूजन में दस वर्ष तक की कन्याओं का विधान है। नवरात्रि के पावन अवसर पर अष्टमी व नवमी के दिन कुमारी कन्याओं का पूजन किया जाता है। मां दु्र्गे की आराधना का पर्व नवरात्र वर्ष में दो बार आता है, एक चैत्र मास में, दूसरा आश्विन मास में। अश्विन मास की नवरात्रि के दौरान भगवान राम की पूजा और रामलीला अहम होती है जबकि चैत्र मास की नवरात्रि पूरी तरह देवी मां की पूजा पर आधारित होती है। चैत्र नवरात्र की अपनी विशिष्टता और महत्ता है। इस साल चैत्र नवरात्र 30 मार्च से शुरू हो रही है।

पंडित नीलू महाराज ने बताया कि नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्र पर्व में माँ दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री देवी की पूजा का विधान है। नवरात्र के इन प्रमुख नौ दिनों में लोग नियमित रूप से पूजा पाठ और व्रत का पालन करते हैं। दुर्गा पूजा के नौ दिन तक देवी दुर्गा का पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ इत्यादि धार्मिक क्रिया, पौराणिक कथाओं में शक्ति की अराधना का महत्व व्यक्त किया गया है। इसी आधार पर आज भी माँ दुर्गा जी की पूजा संपूर्ण भारत वर्ष में बहुत हर्षोउल्लास के साथ की जाती है।
घट स्थापना से शुरू होती है पूजा
चैत्र नवरात्र पूजन का आरंभ घट स्थापना से शुरू हो जाता है। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन प्रात: स्नानादि से निवृत हो कर संकल्प किया जाता है। व्रत का संकल्प लेने के बाद मिटटी की वेदी बनाकर जौ बौया जाता है। इसी वेदी पर घट स्थापित किया जाता है। घट के ऊपर कुल देवी की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन किया जाता है। दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है और इसके साथ ही लोग अखंड ज्योत भी जलाते है।
मंत्र जाप से होती मनोकामना पूर्ण
दुर्गा पूजा के साथ इन दिनों में तंत्र और मंत्र के कार्य भी किये जाते है। बिना मंत्र के कोई भी साधाना अपूर्ण मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार हर व्यक्ति को सुख, शांति पाने के लिये किसी न किसी ग्रह की उपासना करनी ही चाहिए। माता के इन नौ दिनों में ग्रहों की शान्ति करना विशेष लाभ देता है। इन दिनों में मंत्र जाप करने से मनोकामना शीघ्र पूरी होती है। नवरात्र के पहले दिन माता दुर्गा के कलश की स्थापना कर पूजा प्रारम्भ की जाती है। तंत्र-मंत्र में रुचि रखने वाले व्यक्तियों के लिये यह समय ओर भी अधिक उपयुक्त रहता है। गृहस्थ व्यक्ति भी इन दिनों में माता की पूजा आराधना कर अपनी आन्तरिक शक्तियों को जाग्रत करते है। इन दिनों में साधकों के साधन का फल व्यर्थ नहीं जाता है। मां अपने भक्तों को उनकी साधना के अनुसार फल देती है। इन दिनों में दान पुण्य का भी बहुत महत्व कहा गया है।
आज होगी मॉं शैलीपुत्री का पूजन
चैत्र नवरात्र 30 मार्च से 6 अप्रैल तक चलेंगे। नवरात्र पर्व पर देवी मां की आराधना करने से वह प्रसन्न होकर अपने भक्तों के सभी कष्टों का निवारण करती हैं और उन्हें सुख, समृद्धि प्रदान करती हैं। नवरात्र का पहला दिन माता शैलपुत्री की आराधना से शुरू होती है। मां दुर्गा अपने प्रथम स्वरूप में शैलपुत्री के रूप में जानी जाती हैं। पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म लेने से भगवती को शैलपुत्री कहा गया। मॉं दुर्गा को सर्व प्रथम शैल पुत्री के रूप में पूजा जाता है। इनका वाहन वृषभ है। इस लिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से जानी जाती है। इनके दाए हाथ में त्रिशूल और वायं हाथ में कमल सुशोभित है।
पूजन विधि और कलश स्थापना
नवरात्र के पहले दिन स्नान आदि के बाद घर में धरती माता, गुरुदेव व इष्ट देव को नमन करने के बाद गणेश जी का आह्वान करना चाहिए। इसके बाद कलश की स्थापना करनी चाहिए। इसके बाद कलश में आम के पत्ते व पानी डालें। कलश पर पानी वाले नारियल को लाल वस्त्र या फिर लाल मौली में बांध कर रखें। उसमें एक बादाम, दो सुपारी एक सिक्का जरूर डालें। इसके बाद मां सरस्वती, मां लक्ष्मी व मां दुर्गा का आह्वान करें। जोत व धूप बत्ती जला कर देवी मां के सभी रूपों की पूजा करें। नवरात्र के खत्म होने पर कलश के जल का घर में छींटा मारे और कन्या पूजन के बाद प्रसाद वितरण करें।
चैत्र नवरात्र की तिथि
इस वर्ष द्वितीया और तृतीया तिथि 31 मार्च को एक ही दिन लगने से तृतीया तिथि का क्षय हो रहा है, इसलिए चैत्र नवरात्र में आठ दिन ही व्रत रखे जाएंगे। इस वर्ष चैत्र नवरात्र में 30 मार्च को मां शैलपुत्री पूजन और घी का भोग लगाया जाएगा। 31 मार्च द्वितीया मां ब्रह्मचारिणी पूजन सुबह 9.12 बजे तक, चीनी का भोग, सायं काल दूध का भोग, 01 अप्रैल चतुर्थी मां कूष्मांडा पूजन, मालपुआ का भोग, 02 अप्रैल पंचमी मां स्कंदमाता पूजन केला का भोग, 03 अप्रैल षष्ठी मां कात्यायनी पूजन, मधु, शहद का भोग, 04 अप्रैल सप्तमी मां कालरात्रि पूजन, गुड़ का भोग, 05 अप्रैल अष्टमी मां महागौरी पूजन, नारियल का भोग, 06 अप्रैल नवमी मां सिद्धिदात्री पूजन, धान के लावा का भोग लगाया जाएगा। इसके साथ 07 अप्रैल को नवरात्रि का पारण किया जाएगा।
शुभ योग में नवरात्रि
पंडित नीलू महाराज ने बताया कि इस वर्ष नवरात्रि की शुरुआत सर्वार्थ सिद्धि योग, ऐंद्र योग, बुधादित्य योग, शुक्रादित्य योग और लक्ष्मीनारायण योग जैसे कई शुभ योगों में हो रही है। ये योग लाभदायक और उन्नति कारक माने जाते हैं। माना जाता है कि चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा की भक्तिभाव से पूजा-अर्चना करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पं राम गोपाल शास्त्री
नीलू महाराज वरदान आश्रम
अंजनिया 8435337499
8989445146















