निराश्रित पशुओं के मूलभूत सुविधाओं के लिए पशु प्रेमी आए आगे

निराश्रित पशुओं के मूलभूत सुविधाओं के लिए पशु प्रेमी आए आगे

  • विकलांक, वृद्ध, बीमार पशु, पक्षियों के लिए शेल्टर होम स्थापना की मांग

मंडला महावीर न्यूज 29. भारतीय संविधान में पशुओं के लिए निर्मित कानून मनुष्य के समान अधिकार प्रदान करता है। भारतीय न्याय संहिता, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, मौलिक कर्तव्यों में अनुच्छेद करूणा भाव रखने पशुओं को सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार देता है। इन्हीं बेजुबानों की फ्रिक के लिए जिले में कुछ पशु प्रेमी अपनी दयालुता दिखाते हुए इनके हित में जिला प्रशासन से निराश्रित पशुओं के हितार्थ मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की है।

पशु प्रेमी निशा सिंह ने विगत दिवस मंडला कलेक्टर से मुलाकात कर निराश्रित पशुओं के हितार्थ मूलभूत सुविधाओं के लिए चर्चा करते हुए मांग की है। पशु प्रेमी ने जिला प्रशासन को निरीह पशुओं के हितार्थ कुछ बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित कराया है। जिसमें कहां गया है कि शासकीय पशु चिकित्सालय में कम सेकम 20 बीमार पशुओं के भर्ती होने की व्यवस्था बनाई जाए, जिससे चिकित्सक के अवलोकन में इन्हें समुचित उपचार मिल सके। विकलांग वृद्ध बीमार पशु पक्षियों के लिये शेल्टर होम की स्थापना की जाए। वर्तमान स्थिति में 9 बजे से सायं 04 बजे के बाद कोई भी चिकित्सा सेवा न होने से पीडि़त पशु तड़प तड़प कर मर जाते है। 24&7 चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने की मांग की है।

माधोपुर में जल्द शुरू किया जाए वेटरनरी कॉलेज 

पशु पे्रमियों ने आगे और भी महत्वपूर्ण बिन्दुओं में बताया है कि अस्पताल में पशुपालको के बैठने, हाथ धोने, पानी पीने की व्यवस्था की जायें, पशुओं को भी पानी पिलाने की व्यवस्था की जाये। ऐनिमल्स के आपरेशन थियेटर को दवाइयों का गोदाम बना दिया गया है। जिसे खाली कराकर पशुओं के आपरेशन के लिये उपयोग में लाया जायें। स्ट्रे डॉग्स की नसबंदी आपरेशन शिविर का आयोजन किया जाए। ग्राम माधोपुर मंडला में बहुप्रतीक्षित वेटरनरी कालेज को जल्द से जल्द शुरू किया जाए। ऐंटी रेबीज इंजेक्शन पशु अस्पतालों में अनिवार्य: उपलब्ध कराया जायें। जिले में सैकडो आवारा घायल, चोटिल, रेबीज ग्रस्त एनिमल्स दर्द से कराह रहे है। जिन्हें पकड़कर अतिशीघ्र उपचार कराया जाए। लेकिन प्रशासन के पास इसके लिए कोई भी रेस्क्यू टीम नहीं है। एक प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम का गठन किया जाये।

गोचर भूमि के लिए आरक्षित की जाए भूमि 

पशु प्रेमियों ने कहां कि पशु जिला अस्पताल में इलेक्ट्रोकॉटरी, एक्सरे मशीन, सोनोग्राफी, सीटी स्केन, ईसीजी लेप्रोस्कोपी, डायलसिस, ब्लड स्मियर जाँच, फीकल सेंपल जॉच, सीबीपी जॉच, बिलोरोबिन जॉच, एबीसीटी, क्रियोटिनिन जॉच, एसजीपीटी, एसजीओटी उपकरण उपलब्ध कराए जाए। इसके साथ ही राजस्व अभिलेखानुसार प्रत्येक गाँव में पशुधन के चारण विचरण के लिए 02 प्रतिशत भूमि आरक्षित है लेकिन 90 प्रतिशत गाँवों की गोचर भूमि में लोगों ने कब्जा कर लिया है। शासन ने विकास के नाम पर इमारतों का निर्माण कर दिया। जिसके कारण गोपशुओ को खड़े होने तक की जगह नहीं बची है। किसानों के खेतों में घुसने पर उन्हे धारदार हथियारो, डडों से जानलेवा हमला किया जाता है। इसके साथ ही पशुप्रेमियों के साथ मारपीट भी आम हो गई है।

बाहरी व्यक्ति ने कर लिया कब्जा 

पशु प्रेमी निशा सिंह ने बताया कि जिला मुख्यालय से करीब 9 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम अचली सेमरखापा की खाली भूखंडों में जहाँ पेड़ पौधे लगे है। ग्राम का पशुधन घूमता है। वहाँ लोग पेड़ो को काटकर आग लगाकर कब्जा कर रहे है। बताया गया कि घुघरी ब्लाक का एक व्यक्ति ने इस भूखंड में आकर कब्जा कर घर बना लिया है। जिसके कारण यहां आए दिन विवाद होता है। यहां किये गए अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए। उक्त भूखंड को सार्वजनिक गोचर भूमि घोषित कर पशुओं के लिए आरक्षित की जाए।



 

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