- व्यतिपात, वरियान, गुरू पुष्य योग में महिलाएं रखेंगी निर्जला व्रत
- करवा चौथ में सुख, समृद्धि और पति की लंबी आयु की करेंगी कामना
- करवा चौथ व्रत की तैयारियों में जुटी महिलाएं
मंडला महावीर न्यूज 29. महिलाओं का सबसे प्रिय त्यौहार करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि मनाया जाता है। 20 अक्टूबर को करवा चौथ पर तीन शुभ योग बन रहा हैं। ग्रहों की विशेष स्थिति बनने से इस दिन किए गए व्रत और पूजा-पाठ का शुभ फल मिलेगा। करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से शुरू होता है और शाम को चांद निकलने तक रखा जाता है। शाम को चंद्रमा का दर्शन कर के अध्र्य देने के बाद पति के हाथ से पानी पीकर महिलाएं व्रत खोलती हैं।
पंडित विजयानंद शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष तीन शुभ योग बन रहे है। जिसका शुभ लाभ महिलाओं को मिलेगा। चांद निकलने का समय रात्रि 7 बजकर 54 मिनट में रहेगा। यह योग महिलाओं के लिए लाभकारी वा मंगलदायक रहेगा। करवा चौथ के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती है। यह व्रत सुख समृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए होता है। महिलाएं रात को चंद्रमा की पूजा दर्शन के बाद और पति का चेहरा देखकर अपना व्रत खोलती है।
बताया गया कि इस व्रत को सुहागिन महिलाओं के अलावा वो कन्याएं भी रख सकती हैं, जिनका विवाह तय हो चुका है। लेकिन कुंवारी कन्याओं को चंद्र दर्शन नहीं करने चाहिए। ज्योतिष में चांद प्रेम और प्रसिद्धि का प्रतीक है। यही वजह है कि सुहागिन महिलाएं करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा करती हैं, जिससे उनके आशीर्वाद से सारे गुण उनके पति के अन्दर आ जाए। जो महिलाएं बीमारी या किसी अन्य कारण से करवा चौथ का व्रत न कर पाए, उनके पति को यह व्रत करना चाहिए।
करवा चौथ पर पूजा का शुभ मुहूर्त
हिंदी पंचांग के मुताबिक कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को इस बार करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त 20 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 46 मिनट से शुरू होगा, जो शाम 7 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। इस दिन व्रती महिलाओं को पूजा के लिए केवल 1 घंटा 16 मिनट का ही शुभ समय प्राप्त होगा। करवा चौथ के व्रत में व्रती महिलाओं को चांद के निकलने की प्रतीक्षा करनी पड़ती है क्योंकि कृष्ण पक्ष का चंद्रोदय देर से होता है। इस वर्ष करवा चौथ पर चांद शाम को 7 बजकर 54 मिनट पर निकलेगा, करवा चौथ के दिन चंद्रमा को देखने और उसकी पूजा करने के बाद ही व्रत खोला जाता है।
करवा चौथ में शुभ संयोग के साथ तीन योग
पंडित विजयानंद शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष करवा चौथ के दिन बेहद शुभ योग का संयोग बन रहा है। महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत रखना बहुत ही फलदायी रहेगा। करवा चौथ के दिन व्यतिपात योग, वरियान योग और गुरु पुष्य योग बन रहा है। इसके साथ ही चंद्रमा से जुड़े रोहिणी नक्षत्र में महिलाएं अध्र्य देंगी। पंडित विजयानंद का कहना है कि तीनो योग करवा चौथ को बहुत खास बना रहे हैं। शास्त्रों में इन योगों को बहुत शुभ बताया गया है. लेकिन पूजा करने के लिए पूरे दिन में व्रती महिलाओं को सिर्फ लगभग सवा घंटे का ही समय मिलेगा।
पति के प्रति समर्पण का पर्व है करवा चौथ
करवा चौथ का त्योहार भारतीय संस्कृति के उस पवित्र बंधन का प्रतीक है जो पति-पत्नी के बीच होता है। भारतीय संस्कृति में पति को परमेश्वर की संज्ञा दी गई है। करवा चौथ का व्रत रख पत्नी अपने पति के प्रति यही भाव प्रदर्शित करती है। स्त्रियां श्रृंगार करके ईश्वर के समक्ष दिनभर के व्रत के बाद यह प्रण भी लेती हैं कि वे मन, वचन एवं कर्म से पति के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना रखेंगी।
महाभारत काल से है परंपरा
बताया गया कि वनवास काल में अर्जुन तपस्या करने नीलगिरि के पर्वत पर गए थे। द्रौपदी ने अुर्जन की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण से मदद मांगी। उन्होंने द्रौपदी को वैसा ही उपवास रखने को कहा जैसा माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। द्रौपदी ने ऐसा ही किया और कुछ ही समय के पश्चात अर्जुन वापस सुरक्षित लौट आए। ये करवा चौथ का ही व्रत था।
इनका कहना है
प्रतिवर्ष करवा चौथ का व्रत रहते है। इसको लेकर मन में काफी उत्साह रहता है। करवा चौथ की तैयारियां कर ली है। ससुराल और मायके से तो तौहफा मिलेगा ही, अपने हिसाब से भी अपने लिये खरीददारी कर रहे है। ऐसे तो प्रति पल अपने सुहाग की सलामती की कामना करती हूं लेकिन करवा चौथ के दिन विधि-विधान पूर्वक व्रत करके पति से आशीर्वाद लेने के बाद व्रत पूरी करूंगी।
साल में एक बार आने वाले करवा चौथ को लेकर मन में काफी उत्साह रहता है, सजने, संवरने का मौका एक बार फिर मिलता है। व्रत को लेकर पूरी तैयारियां कर ली है, फिर भी कही कोई कमी ना रह जाए इसकी भी चिंता रहती है। हालांकि, बचपन से ही मां को पूजा करते देखती आई हूं। मेरे लिए यह सिर्फ एक व्रत नहीं बल्कि खास दिन है। इस दिन को बेहतरीन तरीके से सेलिब्रेट करूंगी। जमकर खरीददारी भी आज और करेंगे।
प्रथम करवा चौथ में जो उत्साह था वही उत्साह आज 23 वें करवाचौथ को लेकर भी है। समय के साथ परंपराएं कहीं न कहीं और मजबूत हुई है। त्यौहार ग्लोबल हुए हैं। पहले यह पर्व कुछ खास वर्ग तक ही सीमित था। अब हर ओर त्यौहार की खुशियां देखने को मिलता है। करवा चौथ भारतीय संस्कृति में पति के लिए पत्नी के समर्पण भाव को दर्शाता है। इस व्रत को लेकर हम काफी उत्साहित रहते है।
सुहागिनें अपने पति के लंबे उम्र की कामना करते हुए करवा चौथ का व्रत रखती हैं, वहीं युवतियां भी योग्य वर की कामना के साथ निर्जला उपवास करती हैं। दशहरे के बाद अब करवा चौथ को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह रहता है। कपड़े, फैंसी आईटम के लिये बाजार में रौनक रहती है। इसके बाद धनतेरस और दीवाली का माहौल बन जाएगा। करवा चौथ की तैयारी कर ली गई है।
प्रतिवर्ष मैं करवा चौथ का व्रत रखती हूं। इस व्रत को लेकर उत्साह भी रहता है, जिसे हम खूब इंज्वाए करते है। पूरा परिवार जब साथ होता है तो त्यौहार की खुशियां चार गुना हो जाती है। हालांकि इस बार कोरोना संक्रमण के कारण आसपास की महिलाएं एक साथ नहीं जुट पायेंगी। बावजूद इसके मस्ती में कोई कमी नहीं रहने दिया जाएगा। शाम को पूजा और चांद देखने के बाद पतिदेव के हाथ व्रत पूरा होगा।
















