- ओजोन कवच को बचाना हम सब की जिम्मेदारी
- मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल कार्यक्रम को सतत बढ़ाना होगा
- अंतर्राष्ट्रीय ओजोन दिवस पर हुए विभिन्न कार्यक्रम
मंडला महावीर न्यूज 29. 13 सितंबर से 16 सितंबर तक विद्यालय में छात्र एवं छात्राओं को ओजोन के प्रति जागरूक करके मानव के द्वारा किए हुए प्रदूषण के कारण ओजोन परत के प्रभाव को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। विद्यार्थियों को ओजोन क्या है वह हमारे जीवन रक्षक के रूप में किस तरह होता है, उसे बचाने के लिए आम नागरिक क्या करें उसकी जानकारी ओजोन दिवस पर छात्रों को दी जाती है। पृथ्वी के ऊपर ओजोन एक कवच के रूप में होता है जो की ऑक्सीजन के तीन परमाणु से मिलकर बना होता है।
शासकीय कन्या हायर सेकेंडरी रानी अवंती बाई के इको क्लब के छात्राओं के मध्य ओजोन परत की सुरक्षा के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। पर्यावरण नियोजन एवं संगठन भोपाल के निर्देशन व सहायक आयुक्त जनजाति विकास मंडला के मार्गदर्शन में विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है इस अवसर पर श्रीमती जय लक्ष्मी सोनी प्राचार्य के मार्गदर्शन व वरिष्ठ व्याख्याता स्नेहल जोशी व प्रवीण वर्मा के सहयोग से कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर राजेश क्षत्री पर्यावरण सदस्य के द्वारा छात्रों को ओजोन के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। सभी छात्रों ने एक-एक पेड़ लगाकर ओजोन को बचाने का संकल्प लिया।
छात्रों को बताया कि सूर्य से आने वाली खतरनाक अल्ट्रा बायोटिक किरणों को रोकने का कार्य यह ओजोन परत करती है, इसलिए यह जीवन रक्षक कहलाती है लेकिन मानव के बढ़ते हुए भौतिक विलासिता के कारण बढ़ रहे फ्रिज, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर जैसे इंस्ट््रूमेंट का उपयोग करने से क्लोरोफ्लोरो कार्बन गैस से उत्सर्जन से प्रभाव पड़ रहा है। जिसके कारण ओजोन की परत पतली होती जा रही है। यदि यही होता रहा तो सूर्य की निकलने वाली अल्ट्रा बायोटिक किरणें पृथ्वी पर आने से पृथ्वी का तापमान बढऩे लगेगा। तापमान बढऩे के कारण पृथ्वी पर ग्लेशियर जल के रूप में धारण करेंगे और समुद्र का जलस्तर बढ़ जाएगा और समुद्री तटो में रहने वाले शहर पानी में डूब जाएंगे। इसके कारण मनुष्य एवं जीव जंतुओं पर कैंसर जैसी बीमारी का प्रभाव बढ़ जाएगा। ओजोन की सुरक्षा करने के लिए हर व्यक्ति को जंगलों की सुरक्षा, वृक्ष लगाना, वाहनों का उपयोग कम करना, एसीव फ्रीजर का उपयोग कम करने से ही हम ओजोन परत को बचा सकते हैं।
बताया गया कि सन 1987 में सबसे पहले मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल कार्यक्रम कनाडा में सभी दुनिया के अनेक देशों के साथ में बैठकर ओजोन को बचाने के लिए संकल्प लिया, तब से लगातार सभी देशों में ओजोन की सुरक्षा के लिए उपाय किए जा रहे हैं, इस संदर्भ में भारत ने भी 2047 तक संपूर्ण प्रदूषण को कम करने एवं कार्बन डाइऑक्साइड को कम करने का निर्णय लिया है, इसलिए विद्यालय एवं महाविद्यालय में ओजोन सप्ताह का कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों में जागरूकता लाई जा रही है।










