मप्र के व्यावसायिक प्रशिक्षकों की बड़ी जीत

  • मप्र के व्यावसायिक प्रशिक्षकों की बड़ी जीत
  • उच्च न्यायालय ने अधिकार और सम्मान को किया सुरक्षित
  • जल्द स्कूलों में पहुंचेंगे व्यावसायिक प्रशिक्षक
  • हाई कोर्ट से व्यावसायिक प्रशिक्षकों को मिली राहत

मंडला महावीर न्यूज 29. उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश ने हाल ही में पारित निर्णय से प्रदेश के 3386 व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने राहत की सांस ली और अपने रोजगार पर आए संकट को दूर करने के लिए न्यायालय का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही अब व्यावसायिक प्रशिक्षकों की कमी भी स्कूल से दूर हो जाएगी। जिले में लगभग 250 व्यावसायिक प्रशिक्षक हैं जो शासन के आदेश का इंतजार कर रहे थे। इस सत्र में प्रशिक्षकों की चयन प्रक्रिया नहीं हुई है। नई भर्ती या पुन: भर्ती में समय लग रहा है। लेकिन आदेश के बाद प्रक्रिया भी जल्द पूरी कर ली जाएगी।

लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा समग्र शिक्षा अभियान मध्यप्रदेश के अंतर्गत सरकारी विद्यालयों में अनुबंध पर कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों की सेवाएं अचानक 31 मई 2024 को एक आदेश के द्वारा स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद पूर्व से अनुबंधित विभिन्न वीटीपीएस के अनुबंध को समय पूर्व समाप्त कर नए वीटीपीएस को अनुबंधित कर जुलाई में नये प्रशिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को आरंभ कर दिया गया। डीपीआई द्वारा ठीक इसी प्रकार की स्थिति 2021 में भी निर्मित की गई थी जिसके विरोध में व्यावसायिक प्रशिक्षकों द्वारा मप्र की उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। जिसमें उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने उच्चतम न्यायालय के द्वारा स्थापित नीति को आधार मानकर 2022 में आदेश पारित किया कि एक अनुबंधित कर्मचारी को दूसरे अनुबंधित कर्मचारी से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता।
बावजूद इसके, लोक शिक्षण संचालनालय मध्य प्रदेश ने वर्तमान सत्र 2024 में, उच्च न्यायालय के आदेश की अनदेखी करते हुए पुन: 6 से 9 वर्ष की सेवाएं दे चुके पूर्व से कार्यरत प्रशिक्षकों की सेवाएं अचानक समाप्त कर दी और उन्हें सेवा में बने रहने के लिए पुन: नए सिरे से चयन प्रक्रिया द्वारा चयनित होकर आने के लिए बाध्य किया। व्यवसायिक प्रशिक्षकों को पुन: न्यायालय की शरण में जाना पड़ा।

लगा दी गई थी रोक 

मामला कोर्ट में प्रस्तुत होते ही उच्च न्यायालय ने अपीलार्थियों को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए, नई भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। परंतु लोक शिक्षण संचालनालय ने स्टे ऑर्डर को गंभीरता से लेने के बजाय भर्ती प्रक्रिया जारी रखी, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर ने न्यायालय की अवहेलना का नोटिस लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल आयुक शिल्पा गुप्ता को भेजा। तब कहीं जाकर उक्त कार्यालय को आनन-फानन में नई ज्वाइनिंग स्थगित करने के आदेश निकालने पड़े। उच्च न्यायालय ने आदेश जारी कर दिए हैं। जिसमें कहा है कि पुराने कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों (विटी) को उनके अनुभव और योग्यता के आधार पर बनाए रखना चाहिए, न कि उन्हें नए सिरे से चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़े। न्यायालय ने यह भी कहा है कि राज्य द्वारा कुछ ट्रेडों में योग्यता मानदंडों में अनावश्यक परिवर्तन किया गया है, और विटी के हितों की रक्षा के लिए राज्य ने 2022 में वचन दिया था। व्यावसायिक प्रशिक्षकों का कहना है कि निश्चित ही यदि विभाग द्वारा प्रशिक्षकों के हितों को ध्यान में रखकर योजना के क्रियान्वयन का कार्य किया जाता है तो नई शिक्षा नीति 2020 में व्यावसायिक शिक्षा को लेकर जो सपने देखें है उनको पुरा करने में प्रशिक्षक अपना शत प्रतिशत प्रदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। इसके साथ ही मप्र के व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए जॉब पॉलिसी का निर्धारण शासन प्रशासन द्वारा किया जाए जिससे कि इनका भविष्य भी सुरक्षित हो सके।

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