- सोमवती अमावस्या पूर्ण रूपेण शिव जी को समर्पित
- नर्मदा स्नान के साथ श्रद्धालुओं ने हवन पूजन व अन्य अनुष्ठान किए
- रपटा घाट में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का समापन
- हवन पूजन व पूर्णाहुति के बाद भंडारा का वितरण
मंडला महावीर न्यूज 29. सोमवती अमावस्या पर सोमवार को नर्मदा नदी में श्रृद्धालुओं का हुजूम उमड़ा, जहां पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई। हजारों की संख्या में श्रद्धालु नर्मदा नदी में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किये। तड़के 4 बजे से अमावस्या का स्नान के लिए लोगों का आना शुरू हो गया था। सोमवती अमावस्या पर्व के लिए हजारों श्रद्धालु एक दिन पूर्व ही पहुंच गए थे। सोमवार को दिन भर घाटों में स्नान का क्रम चलता रहा और पंडि़तों को दान-पुण्य किया गया। मंदिरों में देवदर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
जानकारी अनुसार सोमवार भगवान शिव जी का दिन माना जाता है और सोमवती अमावस्या तो पूर्ण रूपेण शिव जी को समर्पित होता है। इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्त्र गोदान का फल मिलता है। शास्त्रों में इसे पीपल वृक्ष प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गई है। इस दिन विवाहित स्त्रियों ने पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा और वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेटकर परिक्रमा की। बताया गया कि सोमवती अमावस्या पर रपटा घाट में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। नर्मदा स्नान करने के लिए बड़ी संया में श्रद्धालु पहुंचे। स्नान के बाद सुहागीन महिलाओं ने पीपल, आंवला और तुलसी की 108 परिक्रमा की।
महिलाएं सुबह से ही स्नान व शृंगार कर मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए पहुंची। जहां महिलाओं ने पीपल के वृक्ष के समक्ष फल-फूल, नैवेद्य आदि चढ़ाकर भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति भाव से पूजन किया। वहीं पूजन के बाद महिलाओं ने पीपल के वृक्ष के 108 फेरे लगा रक्षा सूत्र लपेट कर अपने पति व पुत्र की दीर्घायु होने की कामना की। इसके साथ ही वैवाहिक जीवन के कष्ट दूर करने तथा पूरे परिवार की सुख-समृद्धि की कामना किया। वहीं कई लोगों ने सोमवती अमावस का पितृ दोष के लिए पूजन कराया तथा दान पुण्य किया।
रपटा घाट में 27 अगस्त से चल रही श्रीमद् भागवत कथा का समापन हुआ है। जहां पर हवन पूजन व पूर्णाहुति के बाद भंडारा का वितरण हुआ। कथा का वाचन पंडित विजयानंद शास्त्री ने किया है। उन्होंने सोमवती अमावस्या का महत्व बताते हुए कहा कि ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से पति की आयु लंबी होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। सोमवती अमावस्या का पर्व महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।











