- जिले में रोजगार के साधन नही, पलायन को मजबूर
- जिले से बाहर मजदूरी के लिए जाना पड़ रहा
- पलायन रोकने जिले में उद्योग खोलने की मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला के जिला मुख्यलय, ग्राम पंचायत, ग्राम स्तर पर रोजगार के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नही होने के कारण ग्रामों के अधिकांश लोग रोजगार की तलाश में अन्य शहरो की ओर भाग रहे हैं। जिले के अधिकत्तर बस स्टैंड में सुबह से लेकर शाम तक मजदूरों की भीड़ देखकर इसका अंदाजा स्पष्ट लगाया जा सकता है। बस स्टेंडों में मजदूरों की भीड़ को देखकर ऐसा लगता है कि पूरा का पूरा गांव खाली हो गया है।
जानकारी अनुसार रक्षा बंधन पर्व के पूर्व आए मजदूर और खेती किसानी के कार्य के साथ रोपा परहा से निवृत्त होकर त्योहार मनाकर अब ग्रामीण अंचलों के लोग जिले से अन्य शहरो में अपने काम की ओर लौटते नजर आ रहे है। मजदूरों का कहना है कि हमारे जिले में रोजगार के पर्याप्त साधन नहीं है, उद्योग धंधे नहीं है, ना ही सरकार इस ओर ध्यान दे रही है। जिसके कारण ग्रामीणजन काम की तालाश में अन्य शहरों की तरफ अपना रूख कर रहे है।
दीवाली में लौटेंगे अब लोग
ग्रामीणों का कहना है कि अन्य बड़े शहरों में काम के साथ पर्याप्त मजदूरी भी मिलती है। परिवार को चलाने के लिए हमें जिले से बाहर जाना ही पड़ता है, यदि दूसरे शहर में काम करने ना जाए तो खाने के लाले पड़ जाएगे, क्योकि यहां काम नहीं है। अब जो मजदूर जिले से बाहर काम के लिए निकले है, अब वे दीपावली के पूर्व लौटेंगे। उस समय धान की कटाई गहाई और रबी फसल की बोनी का समय होगा।
महंगाई बढ़ी लेकिन जिले में काम नहीं
नाम ना बताने की शर्त पर अन्य शहर जा रहे लोगों ने बताया कि केन्द्र और प्रदेश सरकार के पास फ्री के लालीपाप के आलावा कुछ नहीं है, गांवो में काम नहीं है, महंगाई बढ़ गई है। हर समान की कीमत आसमान छू रही है, जो सामान दस, बीस रूपए में मिलता था आज वह 100 से 200 रूपए से कम में नहीं मिलता। खर्च बढ़ गया है, इस महंगाई के जमाने में कैसे घर चलेगा। इस महंगाई में घर चलाना आसान काम नहीं है।
जिले से बाहर जा रहे जिले के लोग
अन्य शहर जा रहे लोगों ने बताया कि बाहर जा रहे लोगों में ज्यादातर रायपुर, छत्तीसगढ़, केरल, नागपुर, महाराष्ट्र, उड़ीसा, मद्रास, हैदरावाद समेत अन्य बड़े शहरों की ओर जा रहे है। वहां उन्हे ठेकेदारों के माध्यम से काम मिलता है। जिसका कुछ भाग उसे भी देना होता है। बताया गया कि विगत दिवस शाम को रायपुर की ओर जा रही बस में मजदूरों को जाते देखा गया। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में वर्षों से देखा जा रहा है कि लोग काम की तालाश में अन्य शहर का रूख कर रहे है। सरकार कभी क्षेत्र की इस बड़ी समस्या की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। स्थानीय स्तर पर पर लोगों को काम नहीं मिल पा रहा है। सरकार और शासन लोगों की इस समस्या के निदान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।













