कवियों ने किया देश की शौर्य गाथा का वर्णन

जयश्री फाउंडेशन के तत्वाधान में राजश्री साहित्य अकादमी मंच द्वारा स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या ऑनलाईन आयोजन

  • कवियों ने किया देश की शौर्य गाथा का वर्णन
  • काव्य गोष्ठी में कवि, लेखकों ने दी एक से बढ़कर एक प्रस्तुति
  • कवि, लेखकों ने अपनी ओजस्वी वाणी से अमर शहीदों को दी श्रद्धांजलि, श्रद्धा सुमन किया अर्पित

मंडला महावीर न्यूज 29. अखिल भारतीय राष्ट्रीय काव्य सम्मेलन एक शाम शहीदों के नाम का ऑनलाइन आयोजन किया गया। जिसमें देश के प्रख्यात कवि डॉक्टर गोविंद नारायण शांडिल्य कानपुर मुख्य अतिथि, प्रखर साहित्यिक कवि लेखक एवं व्यंगकार नरेंद्र भट्ट ग्वालियर अध्यक्ष, राजश्री साहित्य अकादमी मंच के संस्थापक राजेंद्र पांडेय राज बिलासपुर और मंच के अध्यक्ष मृदुल शीतल श्रृंगार काव्य के कवि पंकज जोशी जगदलपुर विशिष्ट अतिथि थे। अखिल भारतीय काव्य सम्मेलन में मंच संचालन का जिम्मा जयपुर राजस्थान की वरिष्ठ पत्रकार, तेज तर्रार, बहुमुखी प्रतिभा की वाणी, कवयित्री, मंच की सशक्त महानिर्देशक मणिमाला शर्मा ने सम्भाला। उनका साथ मवई मंडला के राष्ट्रीय सशक्त युवा हस्ताक्षर भयंकर बोस अद्भूत सन्यासी जिनकी अद्भुत लेखन शैली और काव्य की वजह से अद्भुत सन्यासी की उपाधि मिली हुई है जिन्होने बखूबी निभाया और कवियों द्वारा प्रस्तुत रचनाओं की कुशलता से समीक्षा की।

राजश्री साहित्य अकादमी सोशल-मीडिया पर ख्याति प्राप्त अखिल भारतीय स्तर के सर्वश्रेष्ठ साहित्य मंच के रूप में अपनी पहचान बन चुका है। वर्तमान स्थिति में लगभग 15000 रचनाकार इस मंच पर अपनी सहभागिता देते हैं। भारत के इस सर्वश्रेष्ठ मंच में भारतीय संस्कार और संस्कृति को प्राथमिकता देते हुए नवांकुर साहित्यकारों को प्राथमिकता के साथ उनका स्तर बढ़ाने का प्रयास निरंतर किया जाता है। राजश्री साहित्य मंच संपूर्ण भारतवर्ष में एक प्रतिष्ठित और शासन द्वारा पंजीकृत सर्वश्रेष्ठ ऑनलाइन साहित्य मंच है, जो छत्तीसगढ़ राज्य से संचालित होता है। इस मंच के संस्थापक राजेंद्र पांडेय राज के नेतृत्व में नित्य निरंतर नए आयाम को छू रहा है। इसी क्रम में स्वतंत्रता दिवस की 78वीं वर्षगांठ के उपलक्ष में मंच पर अखिल भारतीय ऑनलाइन काव्य सम्मेलन का आयोजन किया गया।

काव्य सम्मेलन में दिल्ली की प्रसिद्ध कवयित्री स्वर्णलता सोन ने अपनी मीठी वाणी से मां सरस्वती की सुंदर वंदना कर काव्य गोष्ठी को आरंभ किया। इस सम्मेलन में देश के एक से बढ़कर एक कवि-कवयित्रीयों ने शिरकत की। स्वतंत्रता-दिवस की पूर्व संध्या पर अपने ओजस्वी वाणी से अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किया। मुख्य अतिथि डॉक्टर गोविंद नारायण ने देशभक्तों को अपनी रचना समर्पित करते हुए अपनी वाणी में सेवा के शौर्य पराक्रम की सशक्त गाथाओं के साथ सुंदर मुक्तक काव्य के साथ चंदन जैसी माटी जिसकी स्वर्ग दीप सावधान ऐसा पवन देश भारत जिसका नाम रचना गीत से अपनी बेहतरीन प्रस्तुति मंच को प्रदान की।
उत्तराखंड हिमाचल की तराइयों से आये नरेश चंद उनियाल के देशभक्ति पूर्ण जज्बे को श्रोतागण सुनते ही रह गए। भारत का हृदय कहे जाने वाले मध्यप्रदेश के सशक्त शिक्षाविद मंडला जिले के प्रोफेसर शरद नारायण खरे द्वारा भारत माता की महिमा सब गाते हैं, निष्ठा शक्ति श्रद्धा शीश झुकाते हैं, गीत सुनाकर देश की सेवा का शौर्य गाथा का वर्णन करते हुए भारत माता की महिमा का जागरण करते हुए अपनी सुंदर कविता से भारतीय संस्कार संस्कृति की झलक दिखाकर सभी का मन मोह लिया। युवा प्रतिभा के धनी सशक्त लेखनी के जादूगर शिव आशीष दौनेरिया उत्तरप्रदेश ने अपनी प्रखर आवाज और अपनी कलात्मक वाणी की मधुरता से देश के हित में मचलना चाहिए, अंधेरे में सूरज निकालना चाहिए रचना से सबके हृदय में ओजस्वी भाव जाग्रत कर दिये और श्रोताओं की वाहवाही लूटी।

उत्तरप्रदेश के अनेक मंचों पर अपनी प्रत्यक्ष प्रतिभा को प्रमाणित करने वाले आशीष ने अपनी ओजस्वी आवाज से कविता पाठ करते हुए अखंड भारत की भूमिका पर अपनी सशक्त प्रस्तुति देते हुए शहीदों को नमन किया। इसी क्रम में दिल्ली की कवयित्री और मंच की एडमिन शिखा खुराना ने काव्य पाठ करते हुए सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। प्रसिद्ध कवयित्री और मंच की एडमिन मीना राजू वर्मा ने भी अपनी सुंदर काव्य पाठ से सभी का मन मोह लिया । भोपाल की सुप्रसिद्ध कवयित्री सुनीता तिवारी ने समां को बांधते हुए अपनी भाव विहार कविता आओ आज तिरंगा फहराते हैं अपने देश पर बलि-बलि जाते है की प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। रचनात्मक कविताओं के धनी और व्यंग्यकार ग्वालियर के प्रसिद्ध साहित्यकार नरेंद्र भट्ट ने अपनी ओजस्वी वाणी से साहित्यिक भाषा में वीरता की शहादत को बड़े सलीखे से प्रस्तुत करते हुए सभी दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया।

सन्नाटे की दरमियां गीतिका काव्य से सबके मन को मोहने वाले भयंकर बस अद्भुत संन्यासी ने समापन पर काव्यदीप को प्रचलित करते हुए अंत में अपनी कलात्मक ओजस्वी वाणी से कविता का पाठ करते हुए देशवासियों को कविता निवेदित की और भारत माता के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए। मंच की प्रखर संचालिका ओजस्वी व्यक्तित्व की वरिष्ठ पत्रकार मणिमाला शर्मा ने इस राष्ट्रीय काव्य सम्मेलन को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए सभी आगंतुकों का प्रति अभिनंदन करते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने वंदे मातरम के काव्य पाठ के साथ इस काव्य गोष्ठी का समापन किया।

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