प्रेमचंद जनवादी अभिव्यक्ति के नायक थे

  • प्रेमचंद जनवादी अभिव्यक्ति के नायक थे-प्रो.शरद नारायण
  • गर्ल्स कॉलेज में मुंशी प्रेमचंद जयंती कार्यक्रम आयोजित

मंडला महावीर न्यूज 29. शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय मंडला में प्राचार्य प्रो(डॉ) शरद नारायण खरे के मार्गदर्शन व ग्रंथपाल डीके रोहितास के संयोजन संचालन व स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में महान जनवादी रचनाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई। इस दौरान डॉ. अंजु सिंह ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आम आदमी की परेशानियों की आवाज है। उन्होंने उनकी संवेदनशीलता पर भी प्रकाश डाला। इतिहास के प्राध्यापक, सुपरिचित साहित्यकार व महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो (डॉ) शरद नारायण खरे ने विस्तारपूर्वक व्याख्यान देते हुए बताया कि उनका वास्तविक नाम धनपत राय था, और उन्होंने उर्दू में नवाबराय के नाम से लिखा। वे उपन्यास सम्राट व महान कथाकार के रूप में जाने जाते हैं। जयंती अवसर पर छात्राओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन मंजु श्रीवास ने किया।

प्रेमचन्द के उपन्यास भारत के राजनीतिक और सामाजिक जीवन का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करते हैं। उनके उपन्यासों में आदर्शोन्मुख यथार्थ के चित्रण द्वारा जीवन संघर्ष और चेतन जगत का सुन्दर चित्रण हुआ है। उनका गोदान भारत के समाज का यथार्थ और पूर्ण चित्र उपस्थित करने वाला महाकाव्यात्मक उपन्यास है। उन्होंने विस्तृत व प्रभावशाली प्रस्तुति देते हुए कहा कि वास्तव में प्रेमचंद का रचना संसार बहुत बड़ा और समृद्ध है। बहुआयामी प्रतिभा के धनी प्रेमचंद ने कहानी, नाटक, उपन्यास, लेख, आलोचना, संस्मरण, संपादकीय जैसी अनेक विधाओं में साहित्य का सृजन किया है। उन्होंने कुल 300 से ज्यादा कहानियां, 3 नाटक, 15 उपन्यास, 10 अनुवाद, 7 बाल-पुस्तकें लिखीं गबन, गोदान, निर्मला, रंगभूमि, कर्मभूमि, सेवा सदन उनके प्रमुख उपन्यासों में शामिल हैं।

अगर ऐसा कहा जाए कि जब तक देश और विश्व में हिंदी साहित्य बना रहेगा, मुंशी प्रेमचंद का नाम सदा अमर रहेगा तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। मुंशी जी की सहाबहार प्रसिद्धि का कारण उनकी कहानियों और उपन्यासों में समय को मात देने का हुनर है। उनकी कई कहानियां जैसे बड़े भाई साहब 1910 में, ईदगाह 1933, कफन 1936 में लिखीं गई थीं, लेकिन ये सब आज भी जीवंत हैं। इन सब कहानियों को आज भी पढ़कर लगता ही नहीं है कि ये कहानियां 80 से 90 साल पहले लिखी गईं थीं। प्रेमचंद को शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने सर्वप्रथम उपन्यास सम्राट के नाम से नवाजा, इसके बाद उनकी यह उपाधि साहित्यिक जगत में आज भी सम्मान के साथ उन्हें प्रदत्त है। उन्होंने कहानी व उपन्यास लेखन की ऐसी शैली विकसित की,जिससे पूरी सदी ने सीखा है।

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