गतिविधियों से बच्चों की समझ कर रहे विकसित

  • गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की समझ कर रहे विकसित
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के चार साल पूर्ण
  • सभी स्कूलों में मनाया जा रहा शिक्षा सप्ताह
  • गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के साथ किया जा रहा नवाचार

मंडला महावीर न्यूज 29. शिक्षा क्षेत्र में शिक्षार्थियों, शिक्षकों, नीति निर्माताओं और हितधारकों के बीच सहयोग और नवाचार की भावना को बढ़ावा देना के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बनाया गया है। जिसके चार वर्ष पूर्ण हो गए है। चौथी वर्षगांठ के अवसर पर सात दिवसीय गतिविधियां आयोजित शुरू की गई है। प्रत्येक दिन एक विशिष्ट विषय को लेकर छात्रों के बीच गतिविधियां कराई जा रही है। एक सप्ताह चलने वाले शिक्षा सप्ताह में शिक्षा और विकास के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया जा रहा है। शिक्षा सप्ताह के अंतिम दिन 28 जुलाई को सामुदायिक जागरूकता के लिए रैली, नुक्कड़ नाटक समेत अन्य गतिविधियां कराई जाएगी।

जानकारी अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू हुए चार वर्ष पूर्ण हो गए हैं। इस उपलक्ष्य में सभी स्कूलों में सात दिवसीय शिक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है। प्रतिदिन अलग-अलग विषय पर गतिविधियां आयोजित कराई जा रही है। लर्निंग किट, जादुई पिटारा, मुखौटे और पेंटिंग से कहानी लोककथा से बच्चों को जोड़ा जा रहा है। एफएलएन दिवस में संगोष्ठी नवाचारी शिक्षण पद्धतियों और आनंदमय शिक्षण पर संवाद सत्र आयोजित किये जा रहे है। शिक्षा सप्ताह का उद्देश्य विद्यार्थियों व शिक्षकों के बीच सहयोग व नवाचार के भाव को बढ़ाना है।

अलग-अलग विषय पर हो रही गतिविधि 

शिक्षा सप्ताह के अंतर्गत प्रतिदिन अलग-अलग विषय पर गतिविधियां आयोजित की जा रही है। पहले दिन टीएलएम दिवस, दूसरे दिन एफएलएन दिवस मनाया गया। तीसरे दिन खेल गतिविधि, चौथे दिन सांस्कृतिक गतिविधि, पांचवें दिन कौशल और डिजिटल पहल दिवस, छठवें दिन स्कूल न्यूट्रीशन-डे व ईको क्लब से संबंधित गतिविधियां कराई जाएंगी। अंतिम दिन सामुदायिक सहभागिता दिवस के साथ सामुदायिक जागरूकता के लिए रैली, नुक्कड़ नाटक समेत अन्य गतिविधियां कराई जाएगी।

बच्चों के सामने खुला जादुई पिटारा 

एपीसी डॉ. शेषमणी गौतम ने बताया कि टीएलएम दिवस पर कपड़े या गत्ते पर शैक्षिक बोर्ड गेम डिजाइन करने के साथ कठपुतली बनाना, कहानी कार्ड और चार्ट बनाना, विषयों पर व्याख्यात्मक के साथ चार्ट आदि तैयार करना बताया गया। इसके जरिए भोजन, सब्जियों, परिवार के रिश्तों, रंग, जानवरों आदि की जानकारी देते हुए घन, आयत, वृत्त आदि की भी समझ विकसित कराई गई। मुखौटे और पेंटिंग से कहानी, लोककथा से बच्चों को जोड़ा जा रहा है। श्रेणीवार टीएलएम के लिए विशेष स्टाल लगाए गए, जादुई पिटारा, ई-जादुई पिटारा बनाकर शिक्षकों ने गतिविधियां कराई। जिससे बच्चे देखकर प्रफुल्लित हो उठे। संगीत प्रदर्शन, साहित्य प्रदर्शन का भी आयोजन किया गया।

स्वदेशी खेल से सीखे अनुशासन 

शिक्षा सप्ताह के अंतर्गत एफएलएल दिवस और खेल दिवस दूसरे और तीसरे दिन मनाया गया। इस आयोजन में मूलभूत साक्षरता ओर संख्यात्मक कौशल पर केन्द्रित गतिविधियां और खेलों के माध्यम से कराई गई। काहानियों के माध्यम से बच्चों की भाषा का विकास साक्षरता कौशल के साथ नए शब्दावली से बच्चों को ज्ञान हुआ। यहां बच्चे कहानी पढ़कर और सुनकर अपने ही एक अलग अंदाज में उस कहानी को प्रस्तुत किया। इसके साथ ही एफएलएन के उद्देश्य को समझने ओर इसके महत्व के विषय में लोगों के बीच जागरूकता लाने के लिए इससे संबंधित फिल्म भी बच्चों को दिखाई गई। एफएलएन के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। तीसरे दिन छात्रों में खेल भावना विकसित करने के लिए खेल दिवस का आयोजन किया गया। जिससे बच्चे स्वदेशी खेलों के माध्यम से छात्रों में अनुशासन और टीम वर्ग विकसित हो सके। इसके साथ ही खेल के माध्यम से शारीरिक स्वास्थ्य के महत्व को भी बच्चों को समझाया गया।

नुक्कड़ नाटक, लोकगीत के साथ होगें सांस्कृतिक गतिविधियां 

एपीसी डॉ. शेषमणी गौतम ने बताया कि शिक्षा सप्ताह में अगले चार दिन विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएगी। जिसमें सभी प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं के सर्वांंगीण विकास सुनिश्चित किया जाएगा, विद्यार्थियों में कलात्मक और रचनात्मकता विकसित की जाएगी। भारतीय संस्कृति से बच्चों को अवगत कराया जाएगा। विद्यार्थियों में सृजनशीलता एवं कल्पनाशीलता का विकास किया जाएगा। डिजिटल उपकरणों के माध्यम से शैक्षिक महत्व को बताया जाएगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जागरूक किया जाएगा। पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के लिए पेड़ कितने आवश्यक है, इसकी समझ बच्चों में विकसित की जाएगी। स्वयंसेवी गतिविधियों के माध्यम से समाज में जागरूकता एवं सहयोग की भावना जागृत की जाएगी। इसके साथ ही छात्रों में नेतृत्व क्षमता का विकास किया जाएगा।

नोडल अधिकारी नियुक्त 

बताया गया कि सात दिवसीय शिक्षा सप्ताह के लिए शाला स्तर पर गतिविधियां आयोजित की जाएगी। प्रत्येक विद्यालय में अधिक से अधिक विद्यार्थियों एवं समुदाय के सदस्य इसमें सहभागिता करेंगे। गतिविधियों का चयन बुनियादी स्तर प्रोपेटरी स्तर, मीडिल स्तर और सेकेण्डरी स्तर के विद्यार्थियों की आयु वर्ग को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इसके लिए जिला, संकुल एवं विकासखंड पर एनईपी के नोडल अधिकारी नियुक्त भी किये गए है।

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