नर्मदा तट पर अपनी कल्पना को साकार रूप दिए चित्रकार

  • नर्मदा तट पर अपनी कल्पना को साकार रूप दिए चित्रकार
  • रजा स्मृति में पेंटिंग को लेकर दिखी दीवानगी
  • 8वीं पुन्यतिथि पर सुबह 10 बजे दी जाएगी पुष्पांजलि

मंडला महावीर न्यूज 29. चित्रकार सैयद हैदर रजा की 8वीं पुण्यतिथि पर उनके चाहने वाले श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। सुबह 10 बजे रजा फाउंडेशन द्वारा आयोजित रजा स्मृति के तहत विभिन्न कलाकार व उनके सभी चाहने वाले स्थानीय बिंझिया स्थित कब्रिस्तान पहुंचकर कर महान कलाकार को अपनी श्रद्धांजलि देंगे। रजा स्मृति में चार दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया है। तीसरे दिन भी बड़ी संख्या में कला के शौकीन रजा कला वीथिका पहुंचे और अपनी पसंद के मुताबिक चित्रकारी कर अपने चहेते कलाकार को याद किया। चित्रकारों ने सफेद छातों पर आकर्षक चित्रकारी की। गमले में भी लोगों में अपनी चित्रकारी का हुनर दिखाया। भीखम प्रजापति से लोगों ने चाक पर मिट्टी की चीजें बनाना सीखा।

रपटा घाट में आयोजित चित्रकला कार्यशाला में नर्मदा तट पर चित्रकारी कर रहे मेहमान कलाकार रजनी भोसले, प्रीति मान, रिव्या बकुत्रा, पूर्वी शुक्ल, अनूप श्रीवास्तव, सनी मालवतकर, दीपक कुमार श्याम, आत्माराम श्याम, हरिओम पाटीदार और प्रभात जोशी कैनवास पर अपनी कलाकृति को पूर्ण करने में जुटे हुए है। इनका काम देखने में भी बड़ी संख्या में कला के शौकीन रपटा घाट पहुंच रहे हैं। इसके पूर्व रजा स्मृति के दूसरे दिन रविवार की शाम झंकार भवन में रानू चंद्रौल द्वारा कथक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। रानू नृत्य की शुरुआत दुर्गा स्तुति से की फिर उसके बाद ताल, तीन ताल और कृष्ण जी की ठुमरी में अपनी प्रस्तुति दी। इसके बाद हिन्दी उर्दू कविता पाठ के पहले दिन वाजदा खान, पूनम अरोड़ा, चराग शर्मा और शाहबाज रिजवी ने अपनी गज़लें, नज्में, कविताएं पढ़ी।

कथक नृत्य और हिंदी उर्दू काव्य पाठ के बाद स्थानीय विधायक व प्रदेश शासन की कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उइके के हाथों छाते पर रंग और ग्रीष्म ऋतु में आयोजित कथक और चित्रकला के प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस मौके पर श्रीमती संपतिया उइके ने कहा कि रज़ा साहब के मंडला आने के वक्त से वो रज़ा फाउंडेशन के कार्यों से जुडी हुई है। रज़ा फाउंडेशन द्वारा कला के क्षेत्र में बहुत बढिय़ा कार्य किया जा रहा है। अपने स्तर से जितना भी संभव होगा उतना मेरा सहयोग कलाकारों के विस्तार के लिए मैं जरुर करुँगी।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कलाओं को समर्पित रज़ा फाउंडेशन ने महान चित्रकार की जन्भभूमि पर जो परंपरा विकसित की है वह भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। विभिन्न कलाओं से सजे इस कार्यक्रम की रूप रेखा आने वाली पीढ़ी के लिए अनुकरणीय है और मानवीय बने रहने की प्रेरणा देती है। रज़ा फाउंडेशन के सदस्य सचिव संजीव चौबे ने बताया कि मंगलवार को रज़ा साहब की 8वीं पुन्यतिथि पर बिंझिया स्थित कब्रिस्तान में सुबह 10 बजे पुष्पांजलि दी जाएगी। उन्होंने कला प्रेमियों से कब्रिस्तान पहुंचकर रज़ा साहब को श्रद्धा सुमन अर्पित करने की अपील की है।

इनका कहना है

गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में कुछ अच्छा करने का मौका मिला है, रजा उत्सव में आए बच्चे हमें अच्छी पेंटिंग कर रहे हैं। आज एक अच्छा अनुभव रहा, हम मिट्टी हाथों में लेकर उसे अपने हिसाब से आकार दिए।


त्रिवेणी पटेल

मैं धार जिले से आया हूं, मंडला में आयोजित रजा उत्सव में चित्रकला और आर्ट गैलरी भी लगी है। मैंने यहां मां नर्मदा परिक्रमा के ऊपर चित्र बनाया हूं, मैं नर्मदा घाट गया था, वहां जो महसूस हुआ उसे चित्रों में उकेरा।


अनूप श्रीवास्तव

मंडला में हर साल रजा स्मृति का आयोजन किया जाता है, यहां छोटे से लेकर बड़े सब एक साथ बैठकर गमला पेंटिंग, छाता पेंटिंग के साथ अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। यहां हर साल आते हैं, अच्छा लगता है।


अर्षणी विश्वकर्मा

रजा जी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा मंडला में ही की थी, मां नर्मदा के किनारे उनका शुरूआती जीवन गुजार है। फ्रांस में करीब 60 साल रहे, उसके बाद भारत लौटे, उनकी इच्छा थी कि उनके पिता की क्रब यहां है, तो उन्हें भी मंडला में दफऩाया जाए।


अखिलेश, वरिष्ठ चित्रकार

मैं कटनी जिले से रजा स्मृति उत्सव में पहली बार आई हूं, यहां हम सब मिलकर एक दूसरे काम देखकर सीखने को मिल रहा है, मां नर्मदा किनारे पेंटिंग करने का मौका मिला है, मेरे लिए यह अच्छा अनुभव है।


पूर्वी शुक्ला

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