देश का भविष्य जर्जर भवन में पढऩे मजबूर

  • देश का भविष्य जर्जर भवन में पढऩे मजबूर
  • बरामदे में लग रही कक्षा पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं
  • विकासखंड मवई के ग्राम अतरिया प्राथमिक शाला टिकराटोला का मामला
  • शाला भवन के कक्ष हो गए क्षतिग्रस्त, हादसे का है अंदेशा


मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के अंतिम छोर में बसा वनांचल आदिवासी बाहुल्य विकासखंड मवई मध्यप्रदेश की अंतिम सीमा में बसा है। इसके बाद से छत्तीसगढ़ की सीमा लग जाती है। दो प्रदेशों के बीच में बसा यह आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र मवई आज भी विकास की दौड़ में पीछे है। मूलभूत सुविधाओं से यहां के वनांचल वासी वंचित है। इस मवई क्षेत्र ऐसे कई दूरांचल ग्रामीण क्षेत्र है, जहां मूलभूत सुविधाएं नाम मात्र की है। कहीं पहुंच मार्ग नहीं है, तो कहीं आज भी अंधेरे में जीवन यापन किया जा रहा है, तो कहीं शुद्ध पेयजल के लिए लोग तरस रहे है। शिक्षा, स्वास्थ्य समेत अन्य सुविधाएं विकास की बातें ही है, लेकिन इनकी जमीनी हकीकत देखी जाए तो विकास के नाम पर शून्य है। पूरे जिले भर में ऐसे कई प्राथमिक शालाएं है, जो जर्जर हो चुके है, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। इन जर्जर शालाओं के कारण नौनिहालों की जान खतरें में है। संबंधित विभाग यदि समय रहते जिले की इस समस्या का निराकरण नहीं की तो कभी भी कोई बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता है।

जानकारी अनुसार आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में बेहतर शिक्षा के लिए शासन, प्रशासन द्वारा अभियान चलाने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता का भी अवलोकन किया जाता है। लेकिन जर्जर शाला भवनों पर जिला प्रशासन की निगाहें नहीं जाती है। इन जर्जर भवनों से मासूम बच्चों की जान खतरे में बनी रहती है। यदि कोई अनहोनी हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। हम बात कर रहे है जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर दूर विकासखंड मवई के ग्राम अतरिया टिकराटोला की। जहां प्राथमिक शाला भवन जर्जर हो चुका है, जिसके कारण शासकीय प्राथमिक शाला टिकराटोला के शिक्षक बच्चों को भवन के बरामदें में पढ़ाने मजबूर है। आदिवासी वनांचल ब्लॉक मवई की ग्राम अतरिया के टिकराटोला में संचालित प्राथमिक शाला भवन अपनी कहानी स्वयं बया कर रहा है। इस शाला में ग्राम के नौनिहाल अपना भविष्य बनाने जर्जर भवन के नीचे पढऩे मजबूर है।

दो कक्ष फिर भी एक साथ संचालित हो रही कक्षाएं 

प्रशासनिक उदासीनता के चलते जिले के ग्रामीण अंचल में संचालित शासकीय प्राथमिक शाला टिकराटोला में बच्चों को पढ़ाने के लिए दो कक्ष है। वहीं पहली से पांचवीं की कक्षा में 11 बच्चे दर्ज है। जिसके लिए यहां दो कक्ष बनाए गए थे। जिसमें पहली में 4, दूसरी में 4, तीसरी में 0, चौथी में 2, पाँचवी में 1 बच्चा है। इन 11 बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां दो शिक्षक नियुक्त है। वहीं एक रसोईया भी है। बताया गया कि शाला भवन विगत तीन वर्षो से जर्जर है। बारिश के सीजन में कक्ष में पानी भर जाता है, छत से पूरे कमरें में पानी टपकता है। जिसके कारण बच्चे कक्ष के अंदर बैठकर पढ़ नहीं सकती है। तीन वर्षो से बच्चे बारिश के सीजन में भवन के बरामदें में ही पढ़ाई कर रहे है। अभी कुछ दिनों पूर्व बारिश के पहले ही कक्षाएं भवन के अंदर कक्षाओं में लग रही थी, लेकिन जर्जर अवस्था के कारण भवन की छत का मटेरियल गिरने लगा, जिसके कारण शिक्षक खतरे के अंदेशा के कारण बच्चों को बाहर बरामदें में पढ़ाने मजबूर है। वहीं शाला का किचिन भी दयनीय स्थिति में है।

जान जोखिम में डालकर पढ़ रहे थे बच्चे 

बताया गया कि प्राथमिक शाला टिकराटोला का भवन की हालत अत्यंत दयनीय हो गई है। इस भवन को देखकर लग रहा है कि इस वर्ष शायद ये भवन अपना अस्तित्व खो देगा। शाला भवन इतना जर्जर हो चुका है कि विद्यालय के शिक्षक और बच्चे जान जोखिम में डालकर भवन के अंदर अध्य्यन कार्य कर रहे थे लेकिन जब छत की पपड़ी नीचे गिरने लगी, ता बच्चों कक्षा से बाहर बरामदे में बैठाकर अध्ययन कार्य कराया जाने लगा। नौनिहाल भवन होने के बावजूद बाहर बरामदें में बैठकर अपना भविष्य बनाने पढ़ाई कर रहे है। इसे देखकर आधुनिक भारत की कल्पना करना और बड़े बड़े विकास के वायदे सब खोखले दिखाई देने लगते है। देश के भविष्य के ऊपर जान का खतरा मंडरा रहा है।

बजट का रोते है रोना 

प्राथमिक शाला टिकराटोला भवन की हालत को देखते हुए संबंधित विभाग और प्रशासन को लगातार अवगत कराते हुए आवेदन दिया जा रहा है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी बजट का रोना रोते नजर आते है। जिले में बड़े स्तर में सीएम राईज विद्यालय निर्माण कराए रहे है, इसके साथ ही शालाओं में कई गतिविधियां बड़े स्तर में भी कराई जाती है। बड़े-बड़े निर्माण कार्य भी कराए जाते है। लेकिन आने वाले भविष्य को संवारे शासन के पास बजट की कमी है। बेहतर उच्च शिक्षा का दावा करने वाले जिले की प्राथमिक शालाओं पर नजर दौड़ाए तो जमीनी हकीकत सामने आ जाएगी, लेकिन अधिकारियों को इन सबसे से कोई लेना देना नहीं है।

विधायक के नाम दिया आवेदन 

ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन शायद किसी बड़े हादसे के इंतजार में है। जिसके बाद जिले के जर्जर शाला भवनों की तरफ इनका ध्यान जाएगा। यदि कोई घटना शाला भवन में हो गई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। शुक्रवार को विद्यालय के एसएमसी अध्यक्ष नीतम धुर्वे,पालकगण रंजना धुर्वे, गीता बाई, संतोष कुमार, सत्तू, रतनू, रामसिंह, रामकली ने क्षेत्रीय विधायक के नाम विधायक प्रतिनिधि ऐजाज खान को जर्जर शाला भवन के स्थान पर जल्द से जल्द नवीन भवन निर्माण कराने की मांग की है।

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