- अपना भविष्य बनाने रंगमंच में पढ़ रहे नौनिहाल
- प्राथमिक शाला बुजबुजिया का शाला भवन जर्जर, करीब 60 बच्चे हैं दर्ज
- पढ़ाई का ना हो नुकसान, इसलिए अभिभावक बच्चों को भेज रहे शाला
मंडला महावीर न्यूज 29. हम सब अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, फौजी, पायलट, कलेक्टर बनाने का सपना देखते है, यदि ये सपनें टूट जाए तो बच्चे इन सपनों को कैसे पूरा कर सकते है। आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला का एक ऐसा ही गांव है, जहां कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चे शाला भवन में नहीं एक रंगमंच में अपना भविष्य बनाने आते है, लेकिन यह रंगमंच भी इनके भविष्य के लिए खतरा है। ऐसे में कैसे बच्चे अपने माता पिता का सपना पूरा कर सकते है। यह प्रश्न चिन्ह जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठता है। विकास कार्य के ढोल पीटने के साथ अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य का दावा किया जाता है, लेकिन मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर सूरजपुरा ग्राम पंचायत के बुजबुजिया ग्राम में इसकी बानगी स्पष्ट देखी जा सकती है।

जानकारी अनुसार आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में बेहतर शिक्षा के लिए शासन, प्रशासन द्वारा अभियान चलाने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता का भी अवलोकन किया जाता है। लेकिन जर्जर शाला भवनों पर जिला प्रशासन की निगाहें नहीं जाती है। इन जर्जर भवनों से मासूम बच्चों की जान हमेशा खतरे में बनी रहती है। यदि कोई अनहोनी हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। हम बात कर रहे है जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर ग्राम बुजबुजिया की। जहां शाला भवन जर्जर हो चुका है, जिसके कारण शासकीय प्राथमिक शाला बुजबुजिया के शिक्षक बच्चों को कभी खुले आसमान के नीचे, तो कभी पेड़ के नीचे और मौसम खराब हुआ तो ग्राम में बने रंगमंच में बैठाकर पढ़ाई करा रहे है। शिक्षक का कहना है कि शाला भवन जर्जर हो चुका है। कभी भी कोई हादसा हो सकता है, जिसके कारण शाला भवन में कक्षाएं नहीं लगाते है। अतिरिक्त भवन की व्यवस्था नहीं होने के कारण कक्षाएं रंगमंच में संचालित करनी पड़ रही है। ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारी को नहीं है, लेकिन आज दिनांक तक शाला भवन के सुधार कार्य की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
एक साथ लग रही पहली से पांचवी तक की कक्षाएं
प्रशासनिक उदासीनता के चलते जिले के ग्रामीण अंचल में संचालित शासकीय प्राथमिक शाला बुजबुजिया में पढऩे वाले नौनिहाल मासूम बच्चे रंगमंच में बैठकर अपना भविष्य गढऩे को मजबूर है। लगभग 2 वर्ष पहले यह भवन जर्जर हो गया था, इस स्कूल भवन की मरम्मत की मांग भी की गई थी, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि सूरजपुरा ग्राम पंचायत के बुजबुजिया गांव में दो साल से प्राथमिक स्कूल कभी रंगमंच पर तो कभी पेड़ के नीचे संचालित हो रहा है। वहीं प्राथमिक शाला की कक्षा पहली से पांचवी तक के बच्चों की कक्षाएं अलग-अलग नहीं बल्कि एक साथ ही संचालित हो रही है। शासकीय प्राथमिक शाला में पहली से पांचवी कक्षा तक की पढाई होती है। स्कूल भवन जर्जर होने के कारण गांव के ही एक छोटे से रंगमंच में पेड़ के नीचे कक्षा पहली से पांचवी तक के बच्चों की पढाई होती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चों के भविष्य के साथ किस प्रकार खिलवाड़ संबंधित विभाग कर रहा है।
60 बच्चों में आते है सिर्फ 20 बच्चे शाला
शासकीय प्राथमिक शाला बुजबुजिया में बच्चों की उपस्थिति देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पढऩे वाले बच्चों का भविष्य क्या होगा। जहां विकास के ढोल पीटे जाते है, वहां नौनिहालों के लिए एक शाला भवन शिक्षा विभाग दो वर्ष में भी नहीं बना पाया है। बुजबुजिया प्राथमिक शाला में करीब 60 बच्चे दर्ज है, लेकिन 20 बच्चे ही स्कूल आते है। कारण है कि बच्चों को पढऩे के लिए सुरक्षित स्थान नहीं मिल पा रहा है। कभी स्कूल पेड़ के नीचे तो कभी रंगमंच में लगता है। जिसके कारण यहां के नौनिहालों का भी मन स्कूल की तरफ से हटता जा रहा है। ऐसे में इस ग्राम के शिक्षा का स्तर क्या होगा ये तो आने वाला भविष्य ही बताएगा।
रंगमंच से भी टपक रहा पानी
शिक्षा के स्तर का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि एक रंगमंच में कक्षा पहली से लेकर पांचवी तक के बच्चो की एक साथ पढ़ाई करते है। शाला में करीब 60 बच्चे दर्ज है, जिसके कारण रंगमंच भवन में सभी बच्चों को बैठने के लिए जगह नहीं मिल पाती है और छोटे से रंगमंच में सभी बच्चों को बैठने पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती है। जिसके कारण अधिकत्तर बच्चे स्कूल हीं नहीं आते है। वहीं रंगमंच की भी हालत दयनीय है। रंगमंच चारो ओर से खुला हुआ है। रंगमंच से भी पानी टपकता है। जिसके कारण रंगमंच में भी बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं रहती। जहां पानी नहीं टपकता वहां बच्चें चटाई बिछाकर पढ़ाई करते है। छोटे से रंगमंच में एक साथ पहली से लेकर पांचवी तक की कक्षाएं संचालित होना जिले के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बात है। इस गंभीर समस्या के बाद भी शाला भवन निर्माण कराने में जिला प्रशासन से लेकर शिक्षा विभाग उदासीनता दिखा रहा है।















