माहिष्मती नगरी का 142 साल पुराना राधा-कृष्ण मंदिर
1883 में मालगुजार ने करवाया था निर्माण
- जन्माष्टमी पर रहता है भक्तों का तांता
- पुरवा स्थित प्राचीन मंदिर में आज भी विराजमान हैं चार दुर्लभ मूर्तियां
- नर्मदा किनारे स्थापित है अंग्रेजों के जमाने का यह देवस्थान
- मालगुजार ने बनवाया था 142 वर्ष पहले राधाकृष्ण मंदिर
- एक मंदिर में राधाकृष्ण की चार मूर्ति स्थापित
मंडला महावीर न्यूज 29. ऐतिहासिक माहिष्मती नगरी (मंडला) अपनी पुरातन कलाकृतियों, विश्व विख्यात राजा-रानी के महलों और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। इन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है नर्मदा किनारे ग्राम पंचायत पुरवा में स्थित 142 वर्ष पुराना श्री राधा-कृष्ण मंदिर, जिसका निर्माण अंग्रेजों के जमाने में हुआ था। यह प्राचीन मंदिर आज भी भक्तों की अपार श्रद्धा और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
1883 में हुआ था निर्माण, आज भी विराजमान हैं दुर्लभ मूर्तियां
इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण सन् 1883 में करिया गांव के तत्कालीन मालगुजार गोधन पटेल द्वारा करवाया गया था। मंदिर के वर्तमान पुजारी उपेन्द्र पांडे के अनुसार, मंदिर निर्माण के पश्चात मालगुजार गोधन पटेल और उनकी पत्नी ने यहां राधा-कृष्ण की चार अत्यंत मनमोहक और दुर्लभ मूर्तियां स्थापित की थीं, जो आज भी गर्भगृह में विराजमान हैं। इनमें से एक मूर्ति लगभग 3 फीट और दूसरी मूर्ति 2 फीट ऊंची है।
पीढ़ियों से हो रही सेवा, जन्माष्टमी पर उमड़ता है जनसैलाब
पुजारी उपेन्द्र पांडे ने बताया कि उनके पिता स्व. भीखम लाल पांडे सन् 1987 से इस मंदिर की देखरेख और पूजा-पाठ करते आ रहे थे। 2005 में उनके निधन के बाद से उपेन्द्र पांडे इस प्राचीन मंदिर के पुजारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
बताया गया कि पिछले 142 वर्षों से इस मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाता है। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां विशेष भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और अन्य धार्मिक आयोजन होते हैं। कृष्ण जन्म के शुभ मुहूर्त पर शंख और घंटियों की मंगल ध्वनि से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो जाता है। इस दिन राधा-कृष्ण के दर्शनों के लिए दूर-दूर से भक्त यहां खिंचे चले आते हैं।








