श्रद्धा के साथ मनाया हलषष्ठी पर्व, माताओं ने मांगी पुत्रों की दीर्घायु
- पुत्रों की लंबी उम्र के लिए माताओं ने रखा हरछठ का व्रत
- जिले भर में महिलाओं ने किया विधि विधान से पूजन
मंडला महावीर न्यूज 29. शहर सहित सभी ग्रामीण अंचलों में हलषष्ठी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। पुत्रवती महिलाओं ने अपने पुत्रों की रक्षा और उनकी दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत धारण किया। महिलाओं ने विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की और अपने पुत्रों का तिलक किया। इस दौरान पुत्रों ने भी अपनी माताओं के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया। पर्व को लेकर बाजारों में खासी चहल-पहल देखी गई और पूजन सामग्री खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी।
बताया गया कि हलषष्ठी व्रत के कड़े नियम होते हैं। इस दिन गाय के दूध या उससे बनी किसी भी वस्तु दही, घी, मक्खन आदि का सेवन पूर्णत: वर्जित होता है। व्रती महिलाओं ने शाम के समय पूजन संपन्न किया और व्रत के पारण के रूप में केवल पसही के चावल का सेवन किया।
बिंझिया में हुई सामूहिक पूजा
जिले भर में बुधवार को हल षष्ठी पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। माताओं ने अपनी संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और मंगल कामना के लिए निर्जला व्रत रखा। बिंझिया में महिलओं ने सामूहिक पूजा की। महिलाओं ने महुआ, पसहर चावल और दही से बने व्यंजनों का भोग लगाया। मंदिरों और घरों में सामूहिक कथा का आयोजन हुआ, जिसमें हल षष्ठी की व्रत कथा सुनी गई। मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।
पर्व का है विशेष महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि यह मुख्य रूप से गो-पूजा का पर्व है। मान्यता है कि जिस प्रकार एक माता अपने बच्चे का निस्वार्थ भाव से पालन करती है, उसी प्रकार गो-माता भी अपने दूध से मनुष्य का पोषण और रक्षा करती है। इसी कृतज्ञता भाव के साथ इस दिन गो-माता की विशेष पूजा की जाती है।









