ढोल-मंजीरों की थाप पर नाग की तरह लहराए बरूआ
मंडला के रामबाग, बिनैका, बम्हनी समेत अन्य क्षेत्रों में दिखी अद्भुत आस्था
- नागपंचमी पर अंचलों में गूंजे पारंपरिक गीत
- पटा बिठालकर हुई नागदेवता और आस्तिक मुनि की विशेष पूजा
मंडला महावीर न्यूज 29. श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की नागपंचमी के अवसर पर पूरे मंडला जिले और ग्रामीण अंचलों में नाग देवता की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान जिले के विभिन्न हिस्सों में वर्षों पुरानी अद्भुत और अनोखी लोक परंपराएं जीवंत हो उठीं। सुबह से ही शिवालयों में भक्तों का तांता लगा रहा और लोगों ने नाग देवता को कच्चा दूध व नारियल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।
रामबाग और बिनैका की अनोखी परंपरा, नाग रूप में आते हैं बरूआ
मुख्यालय के नजदीकी ग्राम रामबाग और बिनैका में नागपंचमी की अनोखी पूजा पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है। यहाँ सुर और ताल की लय पर युवक (बरूआ) नाग देवता के भाव में आकर नाग की तरह लहराते और फुफकारते नजर आते हैं। ढोलक की थाप और मंजीरे की टन-टन के बीच धरती को थामे बरूआ अपनी कला और चमत्कार दिखाते हैं। बाजे-गाजे के साथ सबसे पहले आस्तिक मुनि की पूजा की जाती है, जिसके बाद उस्ताद अपने नए और पुराने बरूओं को तैयार करते हैं। इस अद्भुत नजारे को देखने दूर-दराज से भारी भीड़ जुटती है। पुरवा और सकवाह में भी इसी तरह नागदेव की आराधना की गई।
इस पंरपरा का विशेष महत्व
ग्रामीण अंचलों में नाग पूजा के दौरान पटा बिठालने की अनिवार्य रस्म निभाई जाती है। पटा वास्तव में चावल, नारियल, पूजन सामग्री और लाठी से मिलकर तैयार होता है। मान्यता है कि जब तक विधिवत पटा नहीं बैठेगा, तब तक नागदेवता भक्तों के बीच भाव रूप में नहीं आते। ग्रामीणों का मानना है कि नाग चूहों से फसलों की रक्षा करते हैं और उन्होंने मनुष्यों के लिए पृथ्वी छोड़कर पाताल लोक में रहना स्वीकार किया, इसलिए उन्हें मित्र और देवता मानकर पूजा जाता है।
घुघरी में शिवालयों से लेकर खेतों तक हुई पूजा
विकासखंड घुघरी में सुबह से ही धार्मिक स्थलों पर भक्तों का तांता लगा रहा। लोगों ने अपनी परंपरा के अनुसार खेतों में जाकर नागदेव को दूध चढ़ाया। वहीं, आस्तिक चौक घुघरी में युवाओं द्वारा आस्तिक मुनि और नागदेवता की पूजा-अर्चना की गई तथा पटा पूजन कर धूमधाम से पर्व मनाया गया।
वनग्राम जैदेपुर में गूंजे पारंपरिक गीत, नाची नाग-नागिन की जोड़ी
आधुनिकता के इस दौर में भी बम्हनी बंजर नैनपुर के अंतर्गत आने वाले वनग्राम जैदेपुर के ग्रामीणों ने अपनी पुरानी लोक संस्कृति को सहेज कर रखा है। यहाँ पारंपरिक पंचमी गायन कार्यक्रम आयोजित किया गया। ग्रामीणों ने लोक नृत्य और संगीत के माध्यम से नाग-नागिन का नृत्य प्रस्तुत किया। इस दौरान पारंपरिक रूप से पटा बिठालने की रस्म भी निभाई गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ सहभागिता की।










