सौभाग्य योजना में घपलेबाजी, ऊर्जा मंत्री को लिखा सांसद का पत्र भी गायब
- घोटाले में चार्जशीट के बाद भी जमे हैं कार्यपालन अभियंता
- सांसद के पत्र के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
- मंडला विद्युत विभाग में हावी भ्रष्टाचार
मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के कथित भ्रष्टाचार ने पूरी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों के कारण आम जनता परेशान है और जनसमस्याओं की अनदेखी की जा रही है। स्थिति यह है कि घोटाले के आरोप में चार्जशीट दाखिल होने और सांसद व विधायकों की शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि रसूख के चलते जनप्रतिनिधियों के पत्राचार को भी दबा दिया जा रहा है।
जानकारी अनुसार मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड, मंडला में पदस्थ कार्यपालन अभियंता राकेश अमपुरी की कार्यप्रणाली लंबे समय से सवालों के घेरे में है। आरोप है कि सौभाग्य योजना जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजना में घपलेबाजी करने और जांचों को प्रभावित करने में इनकी बड़ी भूमिका रही है। बताया गया कि चार्जशीट तय होने के बाद भी कथित तौर पर जुगाड़ के चलते वे पुन: जिले में पदस्थ होने में सफल रहे। बीते माह मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखकर उन्हें हटाने की मांग की थी। वहीं बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा ने भी विधानसभा में प्रश्न लगाकर ऊर्जा विभाग से इस संबंध में जवाब मांगा था।
ऊर्जा मंत्री को लिखा गया पत्र हुआ गायब
सूत्रों के अनुसार विभागीय संरक्षण के चलते संबंधित अधिकारी को अब तक नहीं हटाया जा सका है। चौंकाने वाली बात यह है कि ऊर्जा मंत्री को लिखा गया सांसद का पत्र भी मंडला और जबलपुर कार्यालय से कथित रूप से गायब कर दिया गया है। चर्चा यह भी है कि अधिकारी विभागीय कार्यों के साथ-साथ ठेकेदारी से भी जुड़ चुके हैं।
उपभोक्ताओं की बढ़ रही परेशानियां
शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक बिजली विभाग के खिलाफ उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश है। कार्यालय अब समस्या समाधान का केंद्र कम और लोगों को चक्कर लगवाने वाला अड्डा अधिक बन गया है। आम जनता को प्रतिदिन कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बताया गया कि आमजनों को नया बिजली कनेक्शन लेने, मीटर बदलवाने और गलत बिल के सुधार में हफ्तों का समय लग रहा है। ट्रांसफार्मर खराब होने पर कई दिनों तक गांवों की बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होती। बिना कथित सुविधा शुल्क के फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक ही घूमती रहती हैं। वास्तविक खपत से कई गुना अधिक राशि के बिजली बिल जारी हो रहे हैं।
पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल
नागरिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि विभाग में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के कारण व्यवस्था में पारदर्शिता खत्म हो गई है और जवाबदेही की कमी आई है। प्रभावशाली लोगों के काम तुरंत हो जाते हैं, जबकि आम आदमी धक्के खाने को मजबूर है। बरसात के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों बिजली गुल रहने से पेयजल व्यवस्था, कृषि कार्य, व्यापार और बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि बिजली विभाग का काम केवल मनमाने बिल वसूलना नहीं, बल्कि समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण सेवा देना है। प्रशासन को चाहिए कि लंबे समय से जमे अधिकारियों की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा करे और दोषियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए।









