पदोन्नति और कैडर रिव्यू की मांग, पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

पदोन्नति और कैडर रिव्यू की मांग

घुघरी में पटवारियों की अनिश्चितकालीन ‘कलम बंद’ हड़ताल

  • राजस्व कार्य ठप होने से किसानों की बढ़ी मुश्किलें
  • आय, जाति और नामांतरण जैसे जरूरी काम अटके

मंडला महावीर न्यूज 29.  मध्य प्रदेश पटवारी संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर घुघरी तहसील के समस्त पटवारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 3 अगस्त से अनिश्चितकालीन ‘कलम बंद’ हड़ताल शुरू कर दी है। सोमवार को तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर पटवारियों ने काम बंद कर दिया। इस हड़ताल के कारण तहसील में राजस्व संबंधी सभी कार्य पूरी तरह से प्रभावित हो गए हैं, जिससे किसानों और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पदोन्नति में भेदभाव का आरोप

पटवारियों में शासन के रवैये को लेकर भारी नाराजगी है। उनका आरोप है कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा लंबे समय बाद विभिन्न विभागों के कर्मचारियों, यहां तक कि भू-प्रबंधन एवं संसाधन विभाग के अन्य कर्मचारियों को भी पदोन्नति का लाभ दिया गया है, लेकिन पटवारी संवर्ग को इससे पूरी तरह वंचित रखा गया है।

ये हैं प्रमुख मांगें

पटवारी संघ ने इससे पहले 8 जुलाई 2026 को अपनी मांगों के समर्थन में मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • कैडर रिव्यू लागू करना।
  • पटवारियों की पदोन्नति और समयमान वेतनमान देना।
  • नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा आयोजित करना।
  • पटवारी संवर्ग को जॉब प्रोटेक्शन एक्ट के दायरे में लाना।
  • लंबित वित्तीय भुगतानों का शीघ्र निराकरण करना।

चेतावनी के बाद भी नहीं हुआ समाधान

संघ के अनुसार, शासन स्तर पर कोई सकारात्मक पहल न होने पर पटवारियों ने 15 से 19 जुलाई तक सामूहिक अवकाश लेकर अपना विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद 20 जुलाई को वे वापस काम पर लौट आए थे, लेकिन मांगों का निराकरण न होने के कारण अब उन्हें मजबूरन 3 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाना पड़ा है।

घुघरी के पटवारी आशीष रंगारी ने बताया कि पटवारी वर्ग लंबे समय से अपनी जायज मांगों की ओर शासन का ध्यान आकर्षित कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि शासन द्वारा शीघ्र कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो यह अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी और वे पीछे नहीं हटेंगे।

आम जनता और किसान बेहाल

पटवारियों के दफ्तरों से नदारद रहने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के सबसे जरूरी काम लटक गए हैं। हड़ताल के चलते आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनने का काम रुक गया है। इसके अलावा सीमांकन, नामांतरण और बंटवारा जैसे महत्वपूर्ण राजस्व कार्य भी ठप पड़े हैं। इस स्थिति में सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों को हो रहा है, जिन्हें अपने दैनिक और कृषि कार्यों के लिए इन दस्तावेजों की सख्त जरूरत है।


रिपोर्टर- दुर्गेश प्रजापति घुघरी ✍️


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