महिला को शिकार बनाने वाली 14 वर्षीय बाघिन का रेस्क्यू
दांत घिसने के कारण आबादी में कर रही थी शिकार की तलाश
- आदमखोर बाघिन टी-27 को कान्हा प्रबंधन ने पकड़ा
- वन विहार भोपाल की गई शिफ्ट, शिकार के बाद दहशत में थे ग्रामीण
मंडला महावीर न्यूज 29. मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में एक बुजुर्ग महिला को अपना शिकार बनाने वाली 14 वर्षीय बाघिन को वन विभाग की टीम ने 24 घंटे के भीतर सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया है। बाघिन के दांत घिसे हुए पाए गए हैं, जिसके कारण वह आसान शिकार की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों की ओर आ रही थी। ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बाघिन को रेस्क्यू कर विशेष वाहन से वन विहार, भोपाल भेज दिया गया है।
जानकारी अनुसार 2 अगस्त की मध्य रात्रि कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन वनमंडल खापा बफर परिक्षेत्र की कुम्हादेही बीट के ग्राम पर्रापुर स्कूल टोला में यह दर्दनाक घटना हुई थी। यहाँ एक बाघ ने हमला कर श्रीमती सुगनी बाई पति बुधराम बैगा को अपना शिकार बना लिया था, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से तहसील परसवाड़ा और बैहर थाना क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल था।
सर्चिंग अभियान और हाथी दल की ली गई मदद
घटना के तत्काल बाद कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी। बाघ की पहचान और रेस्क्यू के लिए सघन अभियान चलाया गया। जिसमें क्षेत्र में जगह-जगह कैमरा ट्रैप लगाए गए। गश्ती दल बनाकर लगातार सर्चिंग की गई। हाथी दल की मदद से जंगल और गांव के आसपास के इलाकों का सघन निरीक्षण किया गया। इस दौरान टीम को 14 वर्षीय मादा बाघ (टी-27) गांव के निकट विचरण करती मिली। जांच में यह भी सामने आया कि यह बाघिन पहले भी ग्रामीण इलाकों में घूमती रही है और घटना वाली रात भी उसने गांव के समीप शिकार (गारा) करने का प्रयास किया था।

पशु चिकित्सक ने किया ट्रेंकुलाइज, दांत मिले घिसे हुए
बाघिन की समस्या जनित गतिविधियों को देखते हुए भोपाल स्थित प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव से रेस्क्यू की अनुमति मांगी गई। 3 अगस्त की दोपहर क्षेत्र संचालक रवींद्र मणि त्रिपाठी और उपसंचालक बफर अमिता केबी के मार्गदर्शन में हाथी दल की मदद से बाघिन को घेरा गया। वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल ने बाघिन को सुरक्षित रूप से ट्रेंकुलाइज किया। स्वास्थ्य परीक्षण में पाया गया कि बाघिन के कैनाइन (शिकार करने वाले मुख्य दांत) अत्यधिक घिस चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक शिकार करने में अक्षम होने के कारण ही वह आसान शिकार की तलाश में रिहायशी इलाकों का रुख कर रही थी।
वन विहार भोपाल रवाना, ग्रामीणों से की अपील
शासकीय अनुमति और ग्रामीणों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बाघिन को रेस्क्यू के तुरंत बाद एक विशेष परिवन वाहन से वन विहार, भोपाल रवाना कर दिया गया है। कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने क्षेत्र के आम नागरिकों से अपील की है कि वे वन्यजीवों की किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को दें। खुद किसी भी तरह का जोखिम न उठाएं, विभाग मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।










