कान्हा के वन्यजीव प्रबंधन और री-वाइल्डिंग से सीखेगा कर्नाटक
वन विभाग के प्रतिनिधिमंडल ने किया तीन दिवसीय अध्ययन दौरा
- बारासिंगा संरक्षण, गौर स्थानांतरण और ईको-पर्यटन मॉडल की हुई सराहना
- कर्नाटक के प्रस्तावित कार्यक्रमों के लिए कान्हा के अनुभव बनेंगे प्रेरणा
मंडला महावीर न्यूज 29. वन्यजीव संरक्षण और विशेषकर री-वाइल्डिंग (वन्यजीवों को वापस जंगल के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया) के क्षेत्र में कान्हा टाइगर रिजर्व के सफल मॉडल्स अब अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं। इसी कड़ी में, री-वाइल्डिंग एवं बड़े शाकाहारी वन्यजीवों के संरक्षण व पुनर्स्थापन कार्यक्रमों का अध्ययन करने के लिए कर्नाटक वन विभाग के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने 30 जुलाई से 01 अगस्त तक कान्हा टाइगर रिजर्व का तीन दिवसीय सघन दौरा किया। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव के नेतृत्व में आए इस 5 सदस्यीय दल में बांदीपुर और भद्रा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक और बांदीपुर के वरिष्ठ पशु चिकित्सक शामिल थे।
बताया गया कि भ्रमण के पहले दिन कान्हा प्रबंधन द्वारा प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत किया गया। दल को कान्हा टाइगर रिजर्व की विस्तृत प्रबंधन प्रणाली, विभिन्न संरक्षण गतिविधियों और अभिनव प्रबंधन पहलों की जानकारी दी गई। भ्रमण के दूसरे दिन कर्नाटक के दल ने घोरेला टाइगर री-वाइल्डिंग सेंटर और मुक्की स्थित क्वारंटीन सेंटर का दौरा किया। यहाँ उन्होंने पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, निगरानी व्यवस्था और वैज्ञानिक मॉनिटरिंग की मानक प्रक्रियाओं पर चर्चा की। घासभूमि (ग्रासलैंड) प्रबंधन और आक्रामक वनस्पतियों के नियंत्रण के लिए बनाए गए स्थायी अनुसंधान प्लॉट का निरीक्षण किया। बारासिंगा होम का दौरा कर इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण में इस्तेमाल हो रही बोमा तकनीक और इन-सीटू संरक्षण व्यवस्था की बारीकियां समझीं। इसके अलावा दल ने भूरसिंह पब्लिक स्कूल और कान्हा चिकित्सालय का भी अवलोकन कर कर्मचारियों व स्थानीय समुदाय के लिए किए जा रहे कल्याणकारी कार्यों की सराहना की।
शाकाहारी वन्यजीवों का स्थानांतरण और जाना पर्यटन प्रबंधन
भ्रमण के तीसरे और अंतिम दिन खटिया स्थित ईको सेंटर में कान्हा प्रबंधन द्वारा बड़े शाकाहारी वन्यप्राणियों जैसे- गौर और जंगली भैंसा के सफल स्थानांतरण पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई। दल ने कान्हा के इस मॉडल को कर्नाटक के आगामी प्रोजेक्ट्स के लिए बेहद उपयोगी बताया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने कान्हा जंगल कैंप, पर्यटन प्रवेश द्वार और पर्यटक सुविधा केंद्र का भ्रमण किया। उन्होंने मध्य प्रदेश वन विभाग की एकीकृत ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रणाली और पर्यटन विनियमन की जमकर तारीफ की।
अधिकारियों ने साझा किए अनुभव
इस अध्ययन भ्रमण के दौरान कान्हा के क्षेत्र संचालक रविन्द्र मणि त्रिपाठी, वन्यजीव पशु चिकित्सक डॉ. संदीप अग्रवाल, सहायक संचालकों, परिक्षेत्र अधिकारियों और फील्ड बायोलॉजिस्टों ने कर्नाटक के दल के साथ अपने जमीनी और व्यावहारिक अनुभव साझा किए। कर्नाटक के अधिकारियों ने माना कि कान्हा के ये सफल वैज्ञानिक प्रयोग उनके राज्य में प्रस्तावित री-वाइल्डिंग कार्यक्रमों के लिए एक मजबूत आधार का काम करेंगे।









