पहली बारिश में बह गई 2.80 करोड़ की सड़क

पहली ही बारिश में बह गई 2.80 करोड़ की लागत से बनी सड़क

5 साल की गारंटी वाले निर्माण की खुली पोल

  • कटघरे में आरईएस और वन विभाग की कार्यप्रणाली
  • 3 मीटर की अनुमति पर 6 मीटर में बिछा दिया भ्रष्टाचार का डामर

मंडला महावीर न्यूज 29. जनपद मुख्यालय मवई से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के नाम पर किए जा रहे निर्माण कार्यों में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। वन ग्राम सठिया को हर्राटोला से जोडऩे के लिए लगभग 2 करोड़ 80 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही 5.2 किलोमीटर लंबी डामरीकृत सड़क पहली ही बारिश का सामना नहीं कर सकी। निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही करोड़ों की यह सड़क जगह-जगह से उखडऩे और बहने लगी है। इस बदहाल निर्माण ने जहां एक ओर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर वन विभाग की संदिग्ध चुप्पी ने भी कई आरोप-प्रत्यारोपों को जन्म दे दिया है।जानकारी अनुसार ग्राम पंचायत पखवार के अंतर्गत आने वाले वन ग्राम सठिया के निवासी वर्षों से पक्की सड़क के अभाव में अत्यंत कठिन और संघर्षपूर्ण जीवन जी रहे थे। जब ग्रामीण यांत्रिकी सेवा मंडला द्वारा इस डामरीकृत सड़क का निर्माण शुरू किया गया, तो ग्रामीणों ने इसे अपने गांव के विकास की नई सुबह माना था। उन्हें विश्वास था कि अब बारिश के दिनों में कीचड़ और जलभराव के कारण होने वाली आवागमन की समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी। लेकिन, ग्रामीणों की यह उम्मीद पहली ही बारिश में सड़क के डामर के साथ बह गई। सड़क कई जगहों से टूटकर धंस गई है, डामर किनारों से उखड़ गया है, पटरियां बह गई हैं और बीच सड़क पर गहरी दरारें उभर आई हैं। जबकि अभी भी कुछ पुल-पुलियों का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है।

कागजों तक सिमटी 5 साल की गारंटी 

परियोजना के सूचना बोर्ड पर स्पष्ट रूप से अंकित है कि इस सड़क के निर्माण के साथ 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक पूरे पांच वर्षों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी ठेकेदार की ही होगी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस सड़क का निर्माण कार्य अभी तक आधिकारिक रूप से पूर्ण भी नहीं हुआ है और जो महज कुछ महीनों में ही अपनी दुर्दशा बयां कर रही है, वह आने वाले पांच सालों तक कैसे टिकेगी?

आरईएस विभाग की तकनीकी निगरानी पर सवाल 

सड़क की इस जर्जर स्थिति ने आरईएस विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोल कर रख दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा निर्माण कार्य आरईएस विभाग के उपयंत्री, सहायक यंत्री तथा कार्यपालन यंत्री की कथित तकनीकी निगरानी में कराया जा रहा है। अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद गुणवत्ता का यह स्तर दर्शाता है कि या तो मौके पर कोई वास्तविक निरीक्षण नहीं किया गया, या फिर सब कुछ कागजों पर ही पूरा कर ठेकेदार को भुगतान की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच की गई होती, तो आज सरकारी खजाने के करोड़ों रुपये इस तरह बारिश के पानी में नहीं बहते।

3 मीटर की अनुमति, 6 मीटर पर कब्जा 

इस पूरे मामले में वन विभाग की कार्यप्रणाली भी गहरे संदेह के घेरे में आ गई है। मिली जानकारी के अनुसार, वन विभाग द्वारा सड़क निर्माण के लिए केवल 3 से 4 मीटर चौड़ाई की अनुमति प्रदान की गई थी। लेकिन, जमीनी हकीकत यह है कि ठेकेदार ने लगभग 6 मीटर से भी अधिक चौड़ाई में पक्की सड़क और पटरी का निर्माण कर दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगभग पांच किलोमीटर तक वन भूमि का अंधाधुंध और आवश्यकता से अधिक उपयोग किया गया। निर्माण के दौरान भारी मशीनों से बेखौफ खुदाई की गई। हैरानी की बात यह है कि वन परिक्षेत्र पूर्व सामान्य मवई का कार्यालय घटनास्थल से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद वन विभाग के अधिकारियों ने न तो इस अवैध कटाई और चौड़ीकरण को रुकवाया और न ही ठेकेदार पर कोई दंडात्मक कार्रवाई की। ग्रामीणों का आक्रोश इस बात पर भी है कि यदि कोई गरीब व्यक्ति वन भूमि पर एक झोपड़ी भी बना ले, तो विभाग तुरंत उसे बेदखल कर देता है, लेकिन करोड़ों के प्रोजेक्ट में नियमों की धज्जियां उडऩे पर पूरा महकमा मौन साधे बैठा है।

जनप्रतिनिधियों और युवाओं में भारी आक्रोश 

सड़क की दुर्दशा देखकर क्षेत्र के युवाओं और जनप्रतिनिधियों ने मोर्चा खोल दिया है। स्थानीय युवा लक्ष्मीकांत पाठक ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि जब अभी इस मार्ग पर भारी मालवाहक वाहनों या यात्री बसों का नियमित संचालन शुरू भी नहीं हुआ है, तब सड़क का यह हाल है। यदि भारी वाहन चलने लगे, तो यह सड़क पूरी तरह गायब हो जाएगी। पांच साल की गारंटी का यह कैसा मज़ाक है? यह जनता के पैसों की खुली बर्बादी है। उन्होंने मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग की है। वहीं युवा कांग्रेस विधानसभा बिछिया के अध्यक्ष बोधू सिंह मरावी ने इस निर्माण में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह केवल घटिया निर्माण का मामला नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की पूर्ण विफलता का प्रमाण है। बोधू सिह मरावी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी इंजीनियरों, अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।


Leave a Comment