खटोला गांव से रेस्क्यू किए गए घायल तेंदुए की मौत
मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर में चल रहा था उपचार
- घर में घुसे तेंदुए ने उपचार के दौरान तोड़ा दम
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
- निर्धारित प्रोटोकाल अनुसार किया गया दाह संस्कार
मंडला महावीर न्यूज 29. कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा शुक्रवार को सिझोरा बफर परिक्षेत्र के खटोला गांव से रेस्क्यू किए गए तेंदुए की शनिवार को मौत हो गई। घायल अवस्था में मिले इस तेंदुए का कान्हा के मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर में सघन उपचार चल रहा था, लेकिन शनिवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही कान्हा टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारी मुक्की पहुंच गए हैं और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
जानकारी अनुसार शुक्रवार को एक तेंदुआ जंगल से भटककर खटोला गांव के एक रिहायशी मकान में घुस गया था। घटना के वक्त घर में एक महिला अकेली थी, जो तेंदुए को देखते ही सुरक्षित बाहर निकल आई और ग्रामीणों को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग और कान्हा टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद विशेषज्ञों की टीम ने तेंदुए को सुरक्षित ट्रैंक्यूलाइज कर बाहर निकाला और उपचार के लिए मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर भेज दिया था।
चेहरे और सिर पर थीं गंभीर चोटें
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में रेस्क्यू किए गए तेंदुए के चेहरे और सिर पर गंभीर चोटें पाई गई थीं। इन्हीं चोटों के कारण उसकी हालत नाजुक बनी हुई थी और शनिवार सुबह उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। तेंदुए की मौत के बाद पार्क प्रबंधन ने जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है। वन्यजीव चिकित्सकों की टीम की मौजूदगी में तेंदुए का पोस्टमार्टम कराया गया।
जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा सैंपल
पार्क प्रबंधन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चोटों की वास्तविक प्रकृति और मौत के सटीक कारणों का आधिकारिक खुलासा हो सकेगा। तेंदुए के कैनाइन डिस्टेम्पर वायरस से संक्रमित होने की आशंका को देखते हुए जांच के लिए उसके सैंपल भी प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। पार्क प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की गाइडलाइन के अनुसार ही पूरी प्रक्रिया और अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
बताया गया कि मृत्यु के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया का पूर्णत: पालन करते हुए सक्षम अधिकारियों की उपस्थिति में मृत तेंदुए के शव का विधिवत शव परीक्षण (पोस्टमार्टम) कराया गया। इसके बाद निर्धारित प्रावधानों के अनुसार शव का भस्मीकरण (दाह संस्कार) की कार्यवाही भी पूर्ण कर दी गई।










