पेंड्रा रोड-मंडला-गोटेगांव रेल लाइन पर रेलवे प्रशासन का सकारात्मक रुख
अंतिम स्थान सर्वेक्षण (FLS) की स्वीकृति का इंतजार
- पर्यटन को रफ्तार देगा नया ‘जंगल रेल कॉरिडोर’
- कान्हा और अमरकंटक को जोड़ने वाली 406 किलोमीटर लंबी रेल लाइन की उम्मीदें जगीं
मंडला महावीर न्यूज 29. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) क्षेत्र के अंतर्गत प्रस्तावित 406.2 किलोमीटर लंबी पेंड्रा रोड-अमरकंटक-डिंडोरी-मंडला-गोटेगांव रेल लाइन परियोजना पर रेल प्रशासन ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को लेकर प्रशासन का रवैया सकारात्मक है। मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण), बिलासपुर द्वारा दी गई नवीनतम जानकारी के अनुसार, इस महत्वपूर्ण रेल लाइन के लिए आवश्यक टोह सर्वेक्षण (RECT Survey) वर्ष 2015 में ही पूरा कर रेलवे बोर्ड को भेजा जा चुका है। वर्तमान में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए रेलवे बोर्ड से अंतिम स्थान सर्वेक्षण (FLS) की स्वीकृति लंबित है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का मिल रहा समर्थन
रेलवे ने इस परियोजना के सामरिक और क्षेत्रीय महत्व को स्वीकार किया है। नागपुर मंडल के डीआरएम (DRM) और बिलासपुर जोन के महाप्रबंधक (GM) दोनों ने ही इस प्रस्ताव को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा है। इसके साथ ही, परियोजना के महत्व को देखते हुए सांसद श्रीमती फूल देवी नेताम ने भी इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाया है, ताकि इसे जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जा सके।
अद्वितीय ‘जंगल रेल कॉरिडोर’ के रूप में होगा विकसित
इस रेल लाइन के निर्माण का मुख्य उद्देश्य आदिवासी बहुल अंचलों का सामाजिक और आर्थिक विकास करना है। यह परियोजना न केवल यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि अमरकंटक, कान्हा नेशनल पार्क, पेंच राष्ट्रीय उद्यान और गोटेगांव जैसे प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थलों को एक सूत्र में पिरोएगी। इसके बनने से यह देश के एक अद्वितीय ‘जंगल रेल कॉरिडोर’ के रूप में स्थापित होगा, जिससे क्षेत्र में पर्यटन आधारित रोजगार को भारी बढ़ावा मिलेगा।
नागरिक सुझावों पर परिचालन विभाग करेगा चर्चा
रेल प्रशासन ने आम जनता और कार्यकर्ताओं की भागीदारी का भी स्वागत किया है। प्रशासन ने स्वतंत्र रेल कार्यकर्ता नितिन सोलंकी द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों की सराहना की है। यह आश्वासन दिया गया है कि इन सुझावों पर परिचालन विभाग के साथ विस्तृत चर्चा कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
अब पूरे क्षेत्र की निगाहें रेलवे बोर्ड पर टिकी हैं, ताकि जल्द से जल्द FLS के लिए आदेश जारी हो सकें और इस आदिवासी अंचल में रेल दौड़ने का सपना साकार हो सके।










