अमृत भारत स्टेशन योजना
17 जुलाई को देश में मनेगा रेलवे का ‘अमृत’ उत्सव
- लेकिन विकास की इस योजना से मंडला फोर्ट फिर रहा अछूता
- एमपी के 13 स्टेशनों का होगा कायाकल्प, मंडला के यात्रियों की झोली में आई सिर्फ उपेक्षा और निराशा
मंडला महावीर न्यूज 29. भारतीय रेलवे आगामी 17 जुलाई 2026 को ‘विकसित भारत’ की दिशा में एक और बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दिन देश के 19 राज्यों में फैले 75 पुनर्विकसित ‘अमृत भारत स्टेशनों’ (ABSS) का भव्य डिजिटल लोकार्पण करेंगे। इस महत्वाकांक्षी योजना में मध्य प्रदेश 13 स्टेशनों के साथ पूरे देश में शीर्ष पर है। हालांकि, रेलवे के इस महा-उत्सव और विकास की सौगातों के बीच मंडला जिले की जनता को एक बार फिर गहरी निराशा और प्रशासनिक उपेक्षा का ही सामना करना पड़ा है।
पड़ोसी जिलों के स्टेशनों की बदलेगी तस्वीर
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत मध्य प्रदेश के जिन स्टेशनों का कायाकल्प होने जा रहा है, उनमें जुन्नारदेव, भिंड और हरपालपुर के साथ-साथ मंडला के पड़ोसी जिले बालाघाट, छिंदवाड़ा और नैनपुर जंक्शन तक शामिल हैं। रेलवे के इस कदम से इन शहरों के रेलवे स्टेशनों की तकदीर और तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है, लेकिन विकास की इस ‘सुपरफास्ट’ सूची से जिला मुख्यालय के मुख्य स्टेशन “मंडला फोर्ट” का नाम पूरी तरह से गायब है।
रेलवे बोर्ड और SECR की इच्छाशक्ति पर उठे सवाल
मंडला फोर्ट का नाम इस बड़ी योजना में शामिल न होना इस बात की ओर इशारा करता है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) और रेलवे बोर्ड की फाइलों में मंडला के विकास को लेकर इच्छाशक्ति का घोर अभाव है। क्षेत्रवासियों का सीधा सवाल है कि जब एक ही रेल मंडल के नैनपुर जंक्शन को आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त रूप दिया जा सकता है, तो जिला मुख्यालय होने के बावजूद मंडला फोर्ट स्टेशन के विकास को हमेशा ठंडे बस्ते में क्यों डाल दिया जाता है?
विकास की दौड़ में पिछड़ता पर्यटन और जनजातीय बाहुल्य जिला
पर्यटन और जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र होने के दृष्टिकोण से मंडला फोर्ट स्टेशन का विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद इसे इस केंद्रीय योजना से बाहर रखना क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ सीधा खिलवाड़ माना जा रहा है। एक तरफ जहां रेलवे देश के हर यात्री को ‘VIP अहसास’ कराने का दावा कर रहा है, वहीं मंडला के यात्रियों को आज भी स्टेशन पर बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। 17 जुलाई का यह ऐतिहासिक लोकार्पण अवसर मंडला की जनता को अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक उपेक्षा की कसक हमेशा याद दिलाता रहेगा।










