मंडला की रेल क्रांति के लिए विधायक नारायण सिंह पट्टा की बड़ी पहल
रेल मंत्री से फोन पर हुई लंबी चर्चा, सौंपे ऐतिहासिक मांग पत्र
- ✦ स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी के तकनीकी सुझावों को ज्ञापनों में मिली प्रमुखता
- ✦ व्यस्तता के चलते प्रत्यक्ष भेंट न होने पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फोन पर की सकारात्मक बातचीत
मंडला महावीर न्यूज 29. महाकौशल और छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य अंचलों में दशकों से लंबित रेल सुविधाओं के विस्तार और विकास के लिए बिछिया विधानसभा क्षेत्र के सजग विधायक नारायण सिंह पट्टा ने देश की राजधानी दिल्ली में एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। मण्डला जिले की रेल समस्याओं को देश के शीर्ष पटल पर रखने के उद्देश्य से विधायक पट्टा दिल्ली प्रवास पर रहे।
इस दौरान व्यस्तता के चलते केंद्रीय रेल मंत्री माननीय अश्विनी वैष्णव जी से प्रत्यक्ष भेंट संभव नहीं हो सकी, लेकिन विधायक पट्टा के निरंतर प्रयासों और विशेष अनुरोध पर रेल मंत्री ने उनसे फोन पर अत्यंत सकारात्मक और विस्तृत चर्चा की।
इस महत्वपूर्ण दूरभाष वार्ता के दौरान विधायक नारायण सिंह पट्टा ने मण्डला जिले की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कुल 6 विशेष मांग पत्र (ज्ञापन) रेल मंत्रालय को सौंपे। विधायक ने स्पष्ट किया कि इन मांगों को केवल सरकारी फाइलों के पारंपरिक नजरिए से न देखकर ‘नीतिगत सुधार’ और ‘व्यापक जनहित’ के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
📑 विधायक द्वारा सौंपे गए ज्ञापनों की प्रमुख मांगे और तकनीकी आधार
1. 126 वर्ष पुराने ‘बिलासपुर-जबलपुर रेल कॉरिडोर’ को राष्ट्रीय प्राथमिकता
- सर्वे की मांग: बिलासपुर-पंडरिया-मंडला-जबलपुर रेल कॉरिडोर के ‘मिसिंग लिंक’ (पंडरिया-मंडला-ग्वारीघाट) के बीच 230 किलोमीटर के ‘Updated Traffic Survey’ को तत्काल मंजूरी दी जाए।
- ऐतिहासिक साक्ष्य: ‘बिलासपुर डिस्ट्रिक्ट गजेटियर 1910’ और ‘मंडला डिस्ट्रिक्ट गजेटियर 1912’ प्रमाणित करते हैं कि यह मार्ग 126 साल पहले से स्वीकृत था।
- आर्थिक व्यावहारिकता: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के हालिया डेटा के अनुसार इस क्षेत्र का ROR (Rate of Return) बढ़कर +1.73% हो चुका है।
- दूरी में बचत: 230 किमी के इस मिसिंग लिंक से जबलपुर और बिलासपुर के बीच 100 से 110 किमी की दूरी कम होगी।
2. ‘नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर’ (पेंड्रा रोड से गोटेगांव) के लिए FLS की स्वीकृति
- परियोजना: पेंड्रा रोड-अमरकंटक-डिंडौरी-मंडला-घंसौर-लखनादौन-गोटेगांव (श्रीधाम) तक 406.2 किलोमीटर लंबी नवीन रेल परियोजना के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण (FLS) की स्वीकृति मांगी गई।
- जंगल रेल कॉरिडोर: ₹4395.85 करोड़ की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना अमरकंटक और झोतेश्वर धाम जैसे धार्मिक स्थलों तथा कान्हा, पेंच व अचानकमार जैसे राष्ट्रीय उद्यानों को जोड़ेगी।
3. मण्डला फोर्ट स्टेशन को पूर्ण ‘टर्मिनल स्टेशन’ का दर्जा
- सुविधाओं का विस्तार: मण्डला फोर्ट स्टेशन पर टर्न-अराउंड अटेंशन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- आधारभूत ढांचा: रेलवे बोर्ड के ‘सेकेंडरी मेंटेनेंस’ नियमों के तहत पिट लाइन, वॉशिंग लाइन और कोचिंग डिपो विकसित कर इसे पूर्ण टर्मिनल बनाया जाए।
4. मण्डला फोर्ट से 9 नई सुपरफास्ट ट्रेनों का संचालन
विधायक ने मण्डला फोर्ट से देश के विभिन्न प्रमुख शहरों के लिए 9 नई सुपरफास्ट ट्रेनों की नीतिगत स्वीकृति मांगी है:
- कान्हा सुपरफास्ट: बेंगलुरु – मण्डला
- नर्मदा महाकाल सुपरफास्ट: इंदौर – मण्डला
- रानी दुर्गावती सुपरफास्ट: दिल्ली – मण्डला
- मां राजराजेश्वरी सुपरफास्ट: मुंबई – मण्डला
- अवध सुपरफास्ट: अयोध्या – मण्डला
- नर्मदा रामेश्वरम सुपरफास्ट: रामेश्वरम – मण्डला
- रानी फूलकुंवर बाई सुपरफास्ट: हावड़ा – मण्डला
- गंगा नर्मदा त्रिवेणी सुपरफास्ट: काशी – मण्डला
- शक्ति-नर्मदा सुपरफास्ट: SMVD कटरा – मण्डला
(इसके अतिरिक्त बीकानेर के लिए नई ट्रेन ‘स्वर्ण-मरु नर्मदा एक्सप्रेस’ तथा पेंचवैली व पातालकोट एक्सप्रेस का विस्तार मण्डला तक करने का सुझाव दिया गया है।)
5. मण्डला फोर्ट स्टेशन के मास्टर प्लान में संशोधन
- प्लेटफॉर्म व पिट लाइन: स्टेशन के अंतिम छोर की रिक्त भूमि पर 4-5 पिट/स्टेबलिंग लाइनें और कुल 5 प्लेटफॉर्म बनाए जाएं।
- यात्री सुविधाएं: संपूर्ण भूमि का उपयोग केवल रेल परिचालन एवं यात्री सुविधाओं (फूड कोर्ट, एस्केलेटर, लिफ्ट, आरपीएफ चौकी, वाई-फाई) के लिए किया जाए।
6. दोहरीकरण, नैनपुर बाईपास एवं रेल कोच फैक्ट्री
- दोहरीकरण व बाईपास: मण्डला फोर्ट-नैनपुर-सिवनी-छिंदवाड़ा-आमला जंक्शन तक 230 किमी मार्ग का दोहरीकरण हो तथा लोको रिवर्सल की समस्या के समाधान हेतु नैनपुर बाईपास लाइन बनाई जाए।
- रेल कोच फैक्ट्री: नैनपुर में उपलब्ध 700 एकड़ से अधिक सरप्लस रेलवे भूमि पर ‘रेल कोच फैक्ट्री’ स्थापित की जाए और पुनः पूर्ण DRM कार्यालय बनाया जाए।
🚂 रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी की पहल लाई रंग
आदिवासी अंचल के रेल विकास के लिए प्रयासरत स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी द्वारा प्रस्तुत तकनीकी सुझावों और आंकड़ों को विधायक नारायण सिंह पट्टा के मांग पत्रों में प्रमुखता से शामिल किया गया। नितिन सोलंकी व क्षेत्र के नागरिकों ने इन मांगों को केंद्रीय स्तर पर उठाने के लिए विधायक का आभार व्यक्त किया।
💬 विधायक की हुंकार
“मण्डला एक आदिवासी बहुल जिला मुख्यालय है, जहाँ नर्मदा जी की कृपा से जल की प्रचुरता और सड़क संपर्क उत्कृष्ट है। विडंबना यह है कि आज भी बिछिया, डिंडौरी, मोहगांव और चाबी के 99% यात्रियों को लंबी दूरी की ट्रेन पकड़ने के लिए जबलपुर जाना पड़ता है। यदि रेल मंत्रालय इन ज्ञापनों पर नीतिगत निर्णय लेता है, तो यह इस अंचल की अर्थव्यवस्था को बदलने वाला कदम होगा। माननीय रेल मंत्री जी ने विषयों को ध्यान से सुना है और मुझे पूर्ण विश्वास है कि वे त्वरित कार्रवाई करेंगे।”
नारायण सिंह पट्टा (विधायक, बिछिया विधानसभा)











