मंडला जिला अस्पताल में गार्ड भर्ती के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा
नौकरी के बदले वसूले ₹50 हजार, तय राशि से कम वेतन देने के आरोप
- ठेका एजेंसी के संचालक पर लगा बेरोजगार युवाओं के आर्थिक शोषण का आरोप
- पीड़ितों ने निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की उठाई मांग
वार्ड बॉय के नाम पर दी गार्ड की नौकरी
ठेकेदार पर घर का काम कराने और कम वेतन देने का पीड़ितों ने लगाया गंभीर आरोप
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिला अस्पताल में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत युवाओं ने ठेका एजेंसी के संचालक पर नौकरी दिलाने के नाम पर अवैध वसूली करने, तय राशि से आधा वेतन देने और निजी कार्य कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले में परेशान पीड़ितों ने प्रशासनिक अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
नौकरी के नाम पर ऐंठे पैसे, कराया जा रहा घरेलू काम
पीड़ित प्रवीण पटेल ने आरोप लगाते हुए बताया कि ‘मृत्युंजय ट्रेडर्स एजेंसी’ के ठेकेदार रविकांत चतुर्वेदी ने उन्हें अस्पताल में वार्ड बॉय की नौकरी दिलाने का झांसा देकर 25 हजार रुपये लिए थे, लेकिन बाद में उन्हें सुरक्षा गार्ड के पद पर नियुक्त कर दिया गया। प्रवीण की मां ने भी पुष्टि की कि उनके परिवार की ओर से ठेकेदार को कुल 50 हजार रुपये की राशि दी गई थी। पीड़ित का यह भी आरोप है कि नौकरी के दौरान उनसे ठेकेदार के घर पर बोरियां ढोने सहित अन्य निजी और घरेलू कार्य भी जबरन कराए जाते हैं।
वेतन में कटौती और आर्थिक शोषण का खेल
एक अन्य सुरक्षा गार्ड तीरथ प्रसाद परते ने बताया कि वह पिछले एक वर्ष से यहाँ कार्यरत हैं। नौकरी पर रखते समय उनसे भी 15 से 20 हजार रुपये लिए गए थे और 12 से 13 हजार रुपये मासिक वेतन देने का वादा किया गया था, लेकिन उन्हें हर महीने सिर्फ 9 हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं।
वहीं प्रवीण पटेल ने बताया कि उन्हें 15 से 16 हजार रुपये मासिक वेतन देने की बात कही गई थी, लेकिन पहले 8 हजार रुपये और वर्तमान माह में केवल 5,600 रुपये का ही ऑनलाइन भुगतान किया गया। पीड़ितों का आरोप है कि यह पूरा लेन-देन और भुगतान ठेकेदार के स्वयंसेवक अंकित मांझी के माध्यम से संचालित किया जाता है।
“बेरोजगार युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर उनका आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है। हमारी मांग है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो ताकि दोषियों को सजा मिल सके।”
दूसरी तरफ का पक्ष आना बाकी
गौरतलब है कि जिला अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अभी तक ठेका एजेंसी अथवा संबंधित आरोपी पक्ष का बयान सामने नहीं आ सका है। समाचार माध्यमों के अनुसार, उनका पक्ष प्राप्त होते ही उसे भी प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।











