देवरी कला में आरक्षित वन भूमि पर मिलीभगत से फर्जी पट्टा
ग्रामीणों के विरोध के बाद जागा वन विभाग
- वन भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई
- ग्रामीणों ने की फेंसिंग और पौधारोपण कराने की मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. स्थानीय देवरी कला बबलिया वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आरक्षित वन भूमि आरएफ 141 पर राजस्व अधिकारियों की साठगांठ से फर्जी तरीके से पट्टा बनाकर अतिक्रमण करने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। ग्राम मझगांव और देवरी कला के निवासियों ने आरोप लगाया है कि अतिक्रमणकर्ता संतोष बैरागी निवासी मझगांव ने पटवारी हल्का और राजस्व अधिकारियों से मिलीभगत कर वन विभाग की आरक्षित नाला भूमि की अधिकार पुस्तिका पट्टा बनवा लिया और वहां जबरन खेती शुरू कर दी, जबकि उक्त स्थान पर वन विभाग का मुनारा पहले से लगा हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह पूरा क्षेत्र सार्वजनिक निस्तार के लिए है। पटवारी द्वारा वन क्षेत्र के भीतर सरकारी भूमि का फर्जी पट्टा जारी किए जाने पर ग्रामीणों ने तीखा विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व विभाग को वन भूमि का पट्टा देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सरहदी क्षेत्र में नाली बॉन्डिंग बनाकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है। हालांकि ग्रामीणों ने शिकायत की है कि कार्रवाई के बाद भी अतिक्रमणकर्ता द्वारा रातों-रात कुछ पत्थर रखकर पुन: कब्जा करने की नीयत से प्रयास किया जा रहा है।
फेंसिंग और पौधारोपण कराने की मांग
वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष धरम कुलस्ते, भारत सिंह एवं अन्य ग्रामवासियों ने मांग की है कि इस सार्वजनिक निस्तार की भूमि को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए वहां तुरंत फेंसिंग कराई जाए और सघन पौधारोपण किया जाए, जिससे भविष्य में कोई दोबारा कब्जा न कर सके। वन क्षेत्र अधिकारी ने बताया कि रान टोला बीट में कंपार्टमेंट 141 के आरक्षित वन भूमि से भी अतिक्रमण हटाया गया है। इसके साथ ही कुछ लोग और है, जिन्हें नोटिस दिया गया है। समय सीमा में इनके द्वारा अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
इनका कहना है
मामले की जानकारी मिलते ही सरहदी क्षेत्र में नाली बॉन्डिंग बनाकर अतिक्रमण हटाने की प्रारंभिक कार्रवाई की गई है। वन क्षेत्र के अंतर्गत जितने भी अतिक्रमणकर्ता हैं, उन्हें चिन्हित कर हटाया जाएगा और नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मयंक उपाध्याय, क्षेत्र अधिकारी, वन विभाग










