घुघरी बस स्टैंड का बिछिया तिराहा बना तालाब

प्रशासनिक दावों की खुली पोल

घुघरी बस स्टैंड का बिछिया तिराहा बना तालाब

  • रसूखदारों के अतिक्रमण से जल निकासी ठप
  • जिम्मेदार मौन: भीगे कपड़ों में स्कूल जाने को मजबूर मासूम
  • मंडराया डेंगू-मलेरिया का खतरा

मंडला महावीर न्यूज 29. क्षेत्र में पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने स्थानीय मुख्यालय घुघरी में प्रशासनिक दावों और ग्राम पंचायत की खोखली व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। घुघरी बस स्टैंड अंतर्गत आने वाले बिछिया रोड तिराहे पर जलभराव के कारण स्थिति इस कदर बदतर हो चुकी है कि मुख्य मार्ग ने एक बड़े तालाब का रूप ले लिया है। नाली निकासी की समुचित व्यवस्था न होने और रसूखदारों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण के कारण हर साल की तरह इस बार भी आम जनता को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।

अतिक्रमण की भेंट चढ़ी जल निकासी व्यवस्था

स्थानीय नागरिकों से मिली जानकारी के अनुसार, बिछिया रोड तिराहे पर जलभराव का मुख्य कारण नहर की नाली और मुख्य चैंबरों पर किया गया अवैध निर्माण है। क्षेत्र के कुछ रसूखदार अतिक्रमणकारियों ने नाली के ऊपर ही फर्सीकरण (पक्का निर्माण) कर लिया है, जिसके चलते पानी की निकासी पूरी तरह ठप हो चुकी है। अब आलम यह है कि जरा सी बारिश होते ही नाली का गंदा पानी सड़कों पर उफनने लगता है।

भीगे कपड़ों में पढ़ाई करने को मजबूर स्कूली बच्चे

इस प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा और दर्दनाक खामियाजा राहगीरों सहित मासूम स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है:

  • गंदे पानी से रास्ता: बच्चे घुटने भर गंदे पानी के बीच से गुजरने को मजबूर हैं, जिससे सुबह-सुबह ही उनके कपड़े और जूते पूरी तरह भीग जाते हैं।
  • वाहनों की लापरवाही: मुख्य मार्ग होने के कारण जब बड़े वाहन यहाँ से तेज रफ्तार में गुजरते हैं, तो गंदा पानी राहगीरों और मासूम बच्चों के ऊपर उछल जाता है।
  • बीमारी का डर: बच्चे दिनभर स्कूल में इन्हीं भीगे कपड़ों में बैठने को विवश हैं, जिससे उनके बीमार होने का खतरा बेहद बढ़ गया है।

“अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं और अधिकारी कुंभकर्णी नींद में हैं। बच्चों का भविष्य और जनता का स्वास्थ्य दांव पर लगा है।” — स्थानीय निवासी

गंभीर संक्रमण फैलने की आशंका, दहशत में लोग

स्थानीय निवासियों ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि तिराहे पर बारिश का पानी कई दिनों तक इसी तरह जमा रहता है। बारिश थमने और धूप निकलने के बाद यह रुका हुआ पानी सड़ने लगता है, जिससे दुर्गंध और संक्रमण फैलने की संभावना दोगुनी हो जाती है। बरसात के इस मौसम में इतने लंबे समय तक जलभराव रहने से अब इलाके में मलेरिया, डेंगू, डायरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है, जिससे स्थानीय लोग बेहद डरे हुए हैं।

जनता की मांग: स्थाई न सही, अस्थाई समाधान तो करो!

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन और ग्राम पंचायत थोड़ी भी तत्परता दिखाए, तो नाली के ऊपर से अवैध अतिक्रमण को हटाकर पानी निकासी का एक अस्थाई रास्ता तुरंत बनाया जा सकता है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि हर साल सामने आने वाली इस गंभीर समस्या पर न तो स्थानीय प्रशासन कोई ठोस कदम उठा रहा है और न ही ग्राम पंचायत इस ओर ध्यान देने को तैयार है। जिम्मेदारों का यह मौन किसी बड़ी जनहानि या महामारी को आमंत्रण दे रहा है।


रिपोर्टर- दुर्गेश प्रजापति घुघरी ✍️


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