मंडला फोर्ट स्टेशन के कायाकल्प के लिए जनहित याचिका

मंडला फोर्ट स्टेशन के कायाकल्प के लिए जनहित याचिका

PMO और रेलवे बोर्ड तक पहुँचा रेल एक्टिविस्ट का तकनीकी रोडमैप

  • टर्मिनल विकास और यात्री सुविधाओं के लिए स्वतंत्र रेल कार्यकर्ता नितिन सोलंकी की बड़ी मुहिम
  • रेलवे बोर्ड ने नागपुर मंडल से मांगी समीक्षा

मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले के प्रमुख रेलवे स्टेशन ‘मण्डला फोर्ट’ को केवल एक साधारण स्टेशन के दायरे से निकालकर एक ‘आदर्श रेल टर्मिनल’ के रूप में विकसित करने की मांग तेज हो गई है। स्वतंत्र रेल कार्यकर्ता नितिन सोलंकी ने एक विशेष ‘जनहित याचिका’ (PIL) के माध्यम से इस मुहिम को एक निर्णायक मोड़ पर पहुँचा दिया है। उन्होंने मण्डला के रेल विकास का एक विस्तृत तकनीकी रोडमैप तैयार कर उसे सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली को प्रेषित किया है।

इस तकनीकी रोडमैप को PMO और रेलवे बोर्ड द्वारा बेहद गंभीरता से लिया गया है। इसके तुरंत बाद, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर मंडल (DRM Nagpur) के उच्च अधिकारियों को इस पूरे प्रस्ताव के तकनीकी परीक्षण और समीक्षा के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

मंडला की जनता के लिए उठाई गईं प्रमुख तकनीकी मांगें:

रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी द्वारा जनहित में सौंपे गए रोडमैप में मुख्य रूप से निम्नलिखित 4 बुनियादी और तकनीकी सुधारों को शामिल किया गया है:

1. पिट लाइन व स्टेबलिंग लाइन का निर्माण: स्टेशन के अंतिम छोर पर उपलब्ध खाली भूमि पर कम से कम 4 से 5 पिट और स्टेबलिंग लाइनों का तत्काल निर्माण अनिवार्य किया जाए। इससे मण्डला से लंबी दूरी की नई ट्रेनों का परिचालन और उनका स्थानीय स्तर पर रखरखाव (Maintenance) सुगम हो सकेगा।

2. प्लेटफॉर्म विस्तार को प्राथमिकता (5 प्लेटफॉर्म की मांग): मास्टर प्लान के ‘फेज-2’ में प्रस्तावित प्लेटफॉर्म विस्तार कार्य को ‘फेज-1’ में ही प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाए। स्टेशन पर कुल 5 प्लेटफॉर्म विकसित करने की मांग की गई है, ताकि आगामी समय में नई ट्रेनों के संचालन के दौरान यात्रियों को असुविधा न हो।

3. व्यावसायिक मॉल के बजाय यात्री-केंद्रित बुनियादी ढांचा: स्टेशन पर किसी व्यावसायिक मॉल के बजाय आम यात्रियों की सुविधाओं को सर्वोपरि रखा जाए। यहाँ एस्केलेटर, लिफ्ट, फूड कोर्ट, रनिंग लॉबी, आरपीएफ (RPF) चौकी, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और आधुनिक डिजिटल टिकटिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएं।

4. गुड्स प्लेटफॉर्म का आधुनिकीकरण: स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने और आदिवासी अंचल में रोजगार के नए अवसर सृजित करने हेतु यहाँ स्थित 2,006 वर्ग मीटर के गुड्स (मालगाड़ी) प्लेटफॉर्म का आधुनिक स्तर पर नवीनीकरण किया जाए।

प्रशासनिक संज्ञान और व्यावहारिक जुड़ाव

रेल एक्टिविस्ट ने इस प्रस्ताव को रेलवे के यांत्रिक (Mechanical) विभाग द्वारा 30 जुलाई 2026 से प्रस्तावित नाइट क्लीनिंग और क्विक वाटरिंग व्यवस्था के साथ एकीकृत करने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि जब स्टेशन पर ट्रेनों के रखरखाव की व्यवस्था शुरू हो ही रही है, तो टर्मिनल विकास का कार्य भी इसी के साथ समानांतर रूप से किया जाना तकनीकी और आर्थिक रूप से सबसे व्यावहारिक कदम होगा।

क्या कहते हैं रेल एक्टिविस्ट?

“यह मण्डला के भविष्य की रेल आकांक्षाओं का रोडमैप है। अब प्रशासन को यह तय करना है कि वे इस अंचल को केवल एक छोटा स्टेशन देना चाहते हैं या एक आधुनिक टर्मिनल। मुझे पूरा विश्वास है कि तकनीकी तथ्यों और जनहित की भावना के आधार पर हमारी यह मांग रेलवे प्रशासन को सकारात्मक निर्णय लेने पर मजबूर करेगी।”नितिन सोलंकी, स्वतंत्र रेल कार्यकर्ता


नितिन सोलंकी, स्वतंत्र रेल कार्यकर्ता 


 

Leave a Comment