कुत्तों के हमले से बचने मकान में घुसा चीतल

कुत्तों के हमले से बचने मकान में घुसा चीतल

ग्रामीणों ने सुरक्षित बचाकर वन विभाग को सौंपा

  • डिप्टी रेंजर पर फोन न उठाने और लापरवाही का आरोप
  • ग्रामीणों में भारी नाराजगी
  • पंडीबारा प्रोजेक्ट क्षेत्र में नियमित गश्त न होने से गांवों की ओर रुख कर रहे वन्यजीव

मंडला महावीर न्यूज 29. नगर के समीपी ग्राम सिमराहा में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आवारा कुत्तों के हमले से जान बचाकर भाग रहा एक चीतल सीधे गांव के एक रिहाइशी मकान में घुस गया। ग्रामीणों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए चीतल को आवारा कुत्तों से सुरक्षित बचाया और उसे एक कमरे में बंद कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार, चीतल बेहद डरा-सहमा हुआ था। यदि समय रहते उसे सुरक्षित स्थान पर नहीं रखा जाता, तो कुत्तों के हमले में उसकी जान जा सकती थी।

अधिकारियों की बेरुखी से भड़के ग्रामीण

चीतल को सुरक्षित करने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सुखदेव ठाकुर सहित अन्य ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना देने का प्रयास किया। ग्रामीणों का आरोप है कि आपातकालीन स्थिति होने के बावजूद वन विभाग के जिम्मेदारों ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। कई बार फोन करने के बाद जब डिप्टी रेंजर ने फोन उठाया, तो उन्होंने तत्काल मौके पर टीम भेजने के बजाय व्यस्तता का हवाला दिया और ग्रामीणों को स्वयं ही व्यवस्था करने की बात कह दी। अधिकारियों के इस गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार पर ग्रामीणों ने तीखी नाराजगी व्यक्त की है।

गश्त न होने से रिहाइशी इलाकों में आ रहे वन्यजीव

बताया गया कि सिमराहा गांव पंडीबारा प्रोजेक्ट वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आता है। ग्रामीणों का कहना है कि:

  • क्षेत्र में रेंजर, डिप्टी रेंजर और वनरक्षक की तैनाती होने के बावजूद अधिकारी-कर्मचारी मुख्यालय व क्षेत्र से नदारद रहते हैं।
  • जंगलों में नियमित निगरानी और गश्त न होने के कारण वन्यप्राणी भटककर लगातार रिहाइशी इलाकों की तरफ आ रहे हैं, जिससे उनकी जान को खतरा बना हुआ है।

देर से पहुँची टीम, जंगल में कराया गया मुक्त

काफी जद्दोजहद और हंगामे के बाद आखिरकार वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची। टीम ने चीतल का रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित पकड़ा और ले जाकर वापस जंगल में छोड़ दिया।

ग्रामीणों की चेतावनी: क्षेत्रवासियों ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एक त्वरित रेस्क्यू टीम (Quick Rescue Team) की व्यवस्था की जाए। साथ ही क्षेत्र में मैदानी अमले की नियमित मौजूदगी और गश्त बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में वन्यजीवों और ग्रामीणों के बीच किसी भी तरह के टकराव या हादसे को रोका जा सके।


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