मवई में कॉम्प्लेक्स निर्माण पर गहराया विवाद
ग्रामीणों ने कहा जांच के दावों के बीच कैसे शुरू हुआ काम
- प्रशासनिक दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग
- फिश पार्लर के नाम पर बड़ा निर्माण, मवई में भड़के ग्रामीण
- कार्रवाई के वीडियो साक्ष्य होने का दावा करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी विकासखंड मवई में फिश पार्लर के नाम पर किए जा रहे एक बड़े कॉम्प्लेक्स निर्माण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्र के युवाओं ने इस निर्माण कार्य की वैधता को चुनौती देते हुए जिला प्रशासन से निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित स्थल पर जिस निर्माण कार्य का प्रस्ताव या स्वीकृति ली गई थी, वह एक छोटे कॉम्प्लेक्स अथवा सीमित निर्माण के लिए थी। इसके विपरीत, मौके पर तय सीमा से कहीं बड़े और भव्य भवन का निर्माण धड़ल्ले से किया जा रहा है। इसी अनियमितता को लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताते हुए संबंधित अधिकारियों से लिखित शिकायत की थी।
प्रशासनिक अमले की कार्रवाई और वीडियो साक्ष्य का दावा
शिकायत के बाद प्रशासनिक और राजस्व अमला मौके पर जांच के लिए पहुंचा था। ग्रामीणों का दावा है कि निरीक्षण के दौरान अधिकारियों और पटवारी ने प्रारंभिक जांच में इस निर्माण को अवैध पाया था और काम को तुरंत रोकने के निर्देश दिए थे। स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि उस दिन हुई इस प्रशासनिक कार्रवाई और अधिकारियों के बयानों के पुख्ता वीडियो साक्ष्य उनके पास सुरक्षित हैं। इस मामले में तब और असमंजस की स्थिति बन गई, जब ग्राम पंचायत सचिव से संपर्क किया गया। सचिव ने इस तरह के किसी भी कॉम्प्लेक्स निर्माण के संबंध में स्पष्ट जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया, जिससे पंचायत स्तर पर पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बदले सुर और जनसुनवाई के दिन दोबारा शुरू हुआ काम
ग्रामीणों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करते हुए बताया कि जनसुनवाई के दिन, जब संबंधित अधिकारी मुख्यालय से बाहर थे, मौके पर निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि बाद में अधिकारियों के स्तर से इस निर्माण को वैध बताते हुए यह कहा गया कि प्रशासन की ओर से कभी कोई रोक नहीं लगाई गई थी। प्रशासन के इस बदलते रुख से नाराज ग्रामीणों ने तीखे सवाल उठाए हैं। यदि निर्माण कार्य पूरी तरह वैध था, तो अधिकारी मौके पर जांच करने और काम रुकवाने क्यों पहुंचे थे? और यदि निर्माण पर आपत्तियां थीं, तो बिना जांच पूरी हुए काम दोबारा किस आधार पर शुरू करा दिया गया।
दस्तावेज सार्वजनिक कर निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों और वार्ड के कई जनप्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें इस निर्माण कार्य के बारे में पूरी जानकारी ही नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण से संबंधित मूल प्रस्ताव, स्वीकृति पत्र, नक्शा और प्रशासनिक अनुमति के दस्तावेजों को तुरंत सार्वजनिक किया जाए। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक निर्माण कार्य पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।









