पुलिस ने सुलझाई गुमशुदगी से मर्डर तक की गुत्थी

मंडला पुलिस की बड़ी कामयाबी

बम्हनी के तरेंद्र यादव अंधे कत्ल का सनसनीखेज खुलासा

  • 5 शातिर आरोपी गिरफ्तार
  • आपसी रंजिश में बारात के दिन रची गई थी हत्या की साजिश
  • ₹25,000 के इनामी बदमाश चढ़े बम्हनी पुलिस के हत्थे
  • बम्हनी के अंधे हत्याकांड का खुलासा, 25 हजार के इनामी 5 आरोपी गिरफ्तार
  • पुलिस ने सुलझाई गुमशुदगी से मर्डर तक की गुत्थी

मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिला पुलिस को एक अंधे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना बम्हनी क्षेत्र के अंतर्गत हुए चर्चित तरेंद्र यादव हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने घटना में शामिल सभी 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह कामयाबी पुलिस अधीक्षक (SP) मंडला श्री राजेश रघुवंशी के कुशल निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री शिवकुमार वर्मा एवं अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) नैनपुर श्री मनीष राज के मार्गदर्शन में गठित विशेष टीम को मिली है। इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझने के साथ ही क्षेत्र में फैली सनसनी पर विराम लग गया है।

गुमशुदगी से शुरू हुआ मामला, नाले में मिला शव

मामले की शुरुआत दिनांक 22 जून 2026 को हुई, जब प्रार्थी रविन्द्र यादव (40 वर्ष) निवासी मुगदरा ने थाना बम्हनी में अपने छोटे भाई तरेंद्र यादव (36 वर्ष) के अचानक लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू ही की थी कि उसी दिन (22 जून) बोरिया नाला, लिमरुआ के पास से तरेंद्र यादव का शव बरामद हुआ।

शव मिलने के बाद हड़कंप मच गया। बम्हनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में डॉक्टरों के पैनल द्वारा शव का पोस्टमार्टम कराया गया। मर्ग जांच और प्रारंभिक साक्ष्यों से यह साफ हो गया कि यह सामान्य मौत नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या थी। अज्ञात हमलावरों ने तरेंद्र की गला घोंटकर बेरहमी से हत्या की थी और साक्ष्य छिपाने के इरादे से लाश को नाले में फेंक दिया था। इसके बाद बम्हनी पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) और 238 के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की।

आईजी ने की थी ₹25,000 इनाम की घोषणा, साइबर सेल ने दी मदद

मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक (IG) बालाघाट जोन, श्री ललित शाक्यवार द्वारा आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी के लिए ₹25,000/- के नकद पुरस्कार की घोषणा की गई थी। इसके बाद थाना प्रभारी निरीक्षक सत्येन्द्र रघुवंशी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने जमीन स्तर पर मुखबिरों को सक्रिय करने के साथ-साथ तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल कॉल डिटेल्स और लोकेशन के आधार पर साइबर सेल की मदद से जांच का दायरा बढ़ाया। संदेहियों की कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पुलिस आखिरकार मुख्य आरोपियों तक पहुंच गई। पुलिस ने जब संदिग्धों को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

पुरानी रंजिश और खेती-बाड़ी का विवाद बना हत्या का कारण

पुलिस पूछताछ में यह बात सामने आई कि मृतक तरेंद्र यादव और उसके घर के सामने रहने वाले जीवनलाल यादव के परिवारों के बीच खेती-बाड़ी और आपसी प्रतिस्पर्धा को लेकर लंबे समय से गंभीर रंजिश चली आ रही थी। कुछ समय पहले जीवनलाल यादव की मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उसके परिवार के सदस्य तरेंद्र यादव के प्रति मन में गहरी शंका और वैमनस्य पाले हुए थे। इसी रंजिश का बदला लेने के लिए जीवनलाल के बेटे राजा यादव ने अपने साथी अविनाश यादव के साथ मिलकर तरेंद्र को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली।

शादी समारोह का फायदा उठाकर वारदात को दिया अंजाम

विवेचना के अनुसार, आरोपियों को पता था कि 21 जून 2026 को मृतक तरेंद्र यादव के घर पर एक शादी समारोह और बारात का कार्यक्रम है। उन्होंने इसी दिन को वारदात के लिए चुना ताकि शोर-शराबे और भीड़भाड़ के बीच किसी को तत्काल शक न हो। योजना के मुताबिक, आरोपी अविनाश यादव ने तरेंद्र से अपनी पुरानी पहचान का फायदा उठाया और बारात के माहौल से अलग उसे शराब पीने के बहाने स्कूल के पीछे ले गया। वहाँ पहले से घात लगाए बैठे अन्य आरोपी राहुल उर्फ नीरज परते, सूर्यकांत उर्फ सूर्या और कृष्ण कुमार उर्फ राजा ने तरेंद्र को दबोच लिया और गला घोंटकर उसकी जान ले ली। इसके बाद साक्ष्य मिटाने के लिए शव को पास के बोरिया नाले में फेंक कर फरार हो गए।

सलाखों के पीछे पहुंचे ये 5 आरोपी

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वारदात में शामिल सभी पांचों आरोपियों को 25 जून 2026 को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:

  1. राजा यादव पिता जीवन यादव (निवासी ग्राम मुगदरा, थाना बम्हनी) — मुख्य साजिशकर्ता
  2. अविनाश यादव पिता राममिलन यादव (निवासी ग्राम देवगांव)
  3. राहुल उर्फ नीरज परते पिता नानक सिंह परते (निवासी ग्राम खमरौती, थाना बिछिया)
  4. सूर्यकांत उर्फ सूर्या (निवासी ग्राम खमरौती, थाना बिछिया)
  5. कृष्ण कुमार उर्फ राजा (निवासी ग्राम खमरौती, थाना बिछिया)

पुलिस टीम की रही सराहनीय भूमिका

इस चुनौतीपूर्ण और अंधे हत्याकांड का महज कुछ ही दिनों के भीतर पर्दाफाश करने में एसडीओपी नैनपुर मनीष राज के नेतृत्व में थाना प्रभारी निरीक्षक सत्येन्द्र रघुवंशी, उपनिरीक्षक (उनि) अतुल वासनिक (पर्यटन चौकी खटिया), उनि जयंत पिछोडें (थाना बम्हनी), उनि विक्रम बघेल (थाना नैनपुर), उनि राजेन्द्र सिलेवार (चौकी पाण्डीवारा), सहायक उपनिरीक्षक (सउनि) शिशांक श्रीवास्तव की मुख्य भूमिका रही। इसके साथ ही प्रधान आरक्षक अर्जुन रजक, इन्दर सिंह राजपूत, आरक्षक उमेश प्रसाद मार्को, नवीन कठौते, सुरेश भटेरे और सुर्यचंद बघेल ने भी सराहनीय कार्य किया। पुलिस टीम की इस तत्परता और सफलता की उच्च अधिकारियों सहित आम जनता ने भी सराहना की है।


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