मवई आजीविका मिशन के ब्लॉक प्रबंधक पर गंभीर आरोप
265 महिला समूहों ने खोला मोर्चा, मनमाने नियमों से राशि आहरण रोका
- बिना सहमति अध्यक्ष-सचिव बदलने और 3 साल से मानदेय न देने का आरोप
- प्रताडऩा से तंग आकर महिलाओं ने कलेक्टर से की हटाने की मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य विकासखंड मवई के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में एक बड़ा विवाद सामने आया है। मोतीनाला सेक्टर के अंतर्गत कार्यरत लगभग 265 महिला स्व-सहायता समूहों ने ब्लॉक प्रबंधक राकेश जघेला की कार्यप्रणाली के खिलाफ सीधे जिला कलेक्टर से लिखित शिकायत की है। समूहों से जुड़ी सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि ब्लॉक प्रबंधक अपनी मनमानी और तानाशाही पर उतारू हैं, जिससे वनांचल में महिलाओं के स्वरोजगार और आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में बताया गया कि मोतीनाला सेक्टर के इन 265 समूहों के माध्यम से मध्यान भोजन, साझा चूल्हा, गल्ला व्यापार और किराना दुकान जैसे महत्वपूर्ण जनहितैषी कार्य संचालित किए जाते हैं। पूर्व में इन कार्यों के संचालन के लिए समूह की अध्यक्ष और सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर तथा सील के माध्यम से बैंक से सीधे राशि का आहरण कर लिया जाता था। लेकिन वर्तमान ब्लॉक प्रबंधक ने कथित रूप से नियमों को ताक पर रखकर नया फरमान जारी कर दिया है। अब राशि निकालने के लिए ब्लॉक प्रबंधक की लिखित अनुमति और हस्ताक्षर को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए उन्होंने बैंकों को भी लिखित निर्देश दे दिए हैं। महिलाओं का कहना है कि मोतीनाला से मवई ब्लॉक मुख्यालय की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है, जहाँ जाने के लिए पूरे दिन में मात्र 2 बसें ही चलती हैं। ऐसे में सुदूर गांवों की गरीब महिलाओं को पैसे निकालने के लिए बार-बार मवई के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
बिना सहमति के अध्यक्ष-सचिव बदले, 3 साल से मानदेय रोका
शिकायती पत्र में ब्लॉक प्रबंधक पर पद के दुरुपयोग के कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। महिलाओं का आरोप है कि प्रबंधक ने बिना किसी समूह की सहमति या बैठक के, अपने मनमुताबिक संकुल स्तरीय अध्यक्ष और सचिव बदल दिए हैं। यहाँ तक कि समूहों की सील (मोहर) भी बिना सहमति के नई बनवा दी गई है। इसके अलावा समूहों की मदद के लिए रखी गई समूह सखी, कर्मचारी को भी बिना किसी ठोस कारण के नौकरी से निकाल दिया गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन समूहों में कार्य करने वाली दीदियों को पिछले लगभग तीन वर्षों से उनके हक का मानदेय भी नहीं दिया गया है, जिससे उनके परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति निर्मित हो गई है।
अधिकारियों की धौंस देकर चुप कराने का आरोप
पीडि़त महिलाओं ने आरोप लगाया कि जब भी कोई महिला इस तानाशाही का विरोध करती है, तो ब्लॉक प्रबंधक द्वारा उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताडि़त किया जाता है। विरोध करने पर उन्हें एसडीएम और कलेक्टर के आदेशों की धौंस देकर चुप करा दिया जाता है। मध्यान्ह भोजन बनाने वाली कम पढ़ी-लिखी रसोइया महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशान किया जा रहा है।
प्रबंधक को हटाओ, या हमारे समूह बंद कर दो
मवई के चक्कर काट-काट कर थक चुकी महिलाओं ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि ब्लॉक प्रबंधक अक्सर मवई मुख्यालय में भी नहीं मिलते; कभी वे बिछिया तो कभी मंडला में होना बताते हैं। इस कमरतोड़ महंगाई में छोटी सी तनख्वाह के भरोसे परिवार चलाने वाली महिलाएं बार-बार यात्रा का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। निराश होकर इन महिला समूहों ने जिला प्रशासन से दो टूक शब्दों में कहा है कि या तो इस ब्लॉक प्रबंधक को तत्काल पद से हटाया जाए, अन्यथा उनके समूहों को प्रशासनिक तौर पर बंद कर दिया जाए। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इन वनांचल की महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।










