दो अनाथ बेटियों की जमीन पर सगे चाचा का अवैध कब्जा

दो अनाथ बेटियों की जमीन पर सगे चाचा का अवैध कब्जा

पढ़ाई और भरण-पोषण के लिए कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

  • पिता की मौत के बाद बेसहारा हुईं बेटियों को चाचा ने खेती करने से रोका
  • विरोध करने पर दी जान से मारने की धमकी, सदमे में परिवार

मंडला महावीर न्यूज 29. कलयुगी रिश्तों और अनाथ बेटियों के हक पर अपनों द्वारा ही डाका डालने का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। तहसील नैनपुर के ग्राम चीचगांव की रहने वाली दो सगी बहनों ने अपने सगे चाचा पर पैतृक कृषि भूमि पर अवैध कब्जा करने, मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। न्याय की आस में भटक रही इन बेटियों ने जिला कलेक्टर को आवेदन सौंपकर अपनी ही जमीन पर वापस कब्जा दिलाने और सुरक्षा प्रदान करने की अपील की है।

नाबालिग उम्र में सिर से उठा पिता का साया, नाना ने पाला 

जानकारी अनुसार आवेदिका नेहा साहू, 21 वर्ष, बीए तृतीय वर्ष की छात्रा और उसकी छोटी बहन रिसिका साहू 18 वर्ष, 12वीं उत्तीर्ण छात्रा के पिता स्वर्गीय रामकुमार साहू का निधन विगत 18 फरवरी 2008 को तब हो गया था, जब दोनों बहनें अत्यंत छोटी थीं। पिता के देहावसान के बाद दोनों अनाथ बेटियों को उनके नाना रतन और हरिप्रसाद साहू ने अपने घर ग्राम चीचगांव लाकर पाला-पोषा और उनकी पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठाया। वर्तमान में बड़ी बहन कॉलेज में है और छोटी बहन को आगे कॉलेज में दाखिला लेना है, जिसके चलते नाना पर अत्यधिक आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

न्यायालय के आदेश के बाद भी चाचा का अवैध कब्जा 

शिकायत में बताया गया कि ग्राम जेवनारा में स्थित कृषि भूमि खसरा नंबर 36/2/1 और 89/2/1 कुल रकबा 0.70 हेक्टेयर राजस्व अभिलेखों में इन दोनों बहनों के नाम पर दर्ज है। पिता की मृत्यु के बाद न्यायालय तहसीलदार नैनपुर द्वारा पारित आदेश दिनांक 10 मार्च 2017 के तहत यह हिस्सा विभाजन इन बहनों को प्राप्त हुआ था। आरोप है कि ग्राम जेवनारा में रहने वाले उनके सगे चाचा इंद्रकुमार साहू ने इस पूरी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है और वे ही वहां खेती कर रहे हैं। इस भूमि से होने वाली आय में से अनाथ बहनों को फूटी कौड़ी भी नहीं दी जा रही है।

विरोध करने पर मारपीट और जान से मारने की धमकी 

आवेदिकाओं ने अपने शिकायती पत्र में बेहद चौंकाने वाले आरोप लगाते हुए कहा है कि जब वे अपनी खुद की भूमि पर स्वयं कृषि कार्य करने या हक मांगने जाती हैं, तो उनके चाचा इंद्रकुमार द्वारा उनके साथ मारपीट की जाती है और उन्हें जान से खत्म करने की धमकियां दी जाती हैं। इस खौफ और पारिवारिक डर के माहौल के कारण दोनों बहनें अपनी ही जमीन से आर्थिक लाभ उठाने में असमर्थ हैं।

पंचों का फैसला भी ठुकराया 

मामले को सुलझाने के लिए पिछले वर्ष 8 जून 2025 को ग्राम जेवनारा में चार पंचों की एक बैठक बुलाई गई थी। पंचों ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था कि चाचा इंद्रकुमार इन दोनों बहनों को जमीन की आय के एवज में 12 हजार 500 रूपए की राशि का भुगतान करेंगे। लेकिन दबंगई के चलते चाचा ने पंचों के इस फैसले को भी ठेंगा दिखा दिया और अब तक कोई राशि नहीं दी।

आर्थिक और मानसिक रूप से टूट चुकी हैं बहनें 

भूमि का लाभ न मिलने और चाचा के प्रताडऩा भरे व्यवहार के कारण दोनों बहनें और उनके वृद्ध नाना आर्थिक और मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं। बहनों की आगे की पढ़ाई अधर में लटकी हुई है। जिससे परेशान होकर मंगलवार को मंडला कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन के माध्यम से पीडि़त बेटियों ने निवेदन किया है कि मामले की नियमानुसार जांच कराकर उन्हें उनकी कृषि भूमि का वास्तविक कब्जा दिलाया जाए, जिससे वे अपना भरण-पोषण और आगे की पढ़ाई सुचारू रूप से कर सकें।


 

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