मुक्की क्वारंटाइन सेंटर में जिंदगी की जंग हारा बीमार बाघ
तमाम कोशिशों के बाद भी नहीं बच सकी जान
- केनाइन डिस्टेम्पर की आशंका के चलते देश भर के वन्यजीव डॉक्टरों की टीम कर रही थी इलाज
- एनटीसीए प्रोटोकॉल के तहत हुआ भस्मीकरण
मंडला महावीर न्यूज 29. एशिया के सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय उद्यानों में से एक कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की क्वारंटाइन सेंटर में पिछले कई दिनों से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे एक अस्वस्थ बाघ ने मंगलवार को अंतिम सांस ली। देश के नामचीन वन्यजीव डॉक्टरों और प्रतिष्ठित संस्थानों के अथक प्रयासों के बावजूद इस राष्ट्रीय पशु को असमय काल के गाल में समाने से नहीं रोका जा सका।
कान्हा प्रबंधन से मिली जानकारी अनुसार उक्त बाघ को इसी महीने की शुरुआत में विगत 04 जून को हाथी गश्ती दल द्वारा बीट किसली के कक्ष क्रमांक 777 सन्दूक खोल के पास बेहद जीर्ण-शीर्ण और अस्वस्थ अवस्था में देखा गया था। बाघ की गंभीर स्थिति को देखते हुए पार्क के वरिष्ठ अधिकारियों के त्वरित निर्देशन में रेस्क्यू टीम ने तत्परता दिखाते हुए बाघ को सुरक्षित ट्रेंकुलाइज किया था और गहन चिकित्सा व एकांतवास के लिए मुक्की क्वारंटाइन सेंटर स्थानांतरित किया था।
केनाइन डिस्टेम्पर जैसे घातक रोग के मिले थे लक्षण
प्रारंभिक चिकित्सकीय जांच के दौरान बाघ में वन्यजीवों के लिए बेहद जानलेवा माने जाने वाले केनाइन डिस्टेम्पर रोग से संबंधित गंभीर लक्षण पाए गए थे। इसके तुरंत बाद कान्हा टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा एवं विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर के विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सकों और वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट के डॉक्टरों का एक संयुक्त दल गठित किया गया था, जो चौबीसों घंटे बाघ की सेहत पर सतत निगरानी और सघन उपचार कर रहा था। बाघ की जान बचाने के लिए भारत के कई अन्य शीर्ष वन्यजीव विशेषज्ञों से भी आपातकालीन तकनीकी सलाह ली गई थी, लेकिन बीमारी के गंभीर स्तर पर होने के कारण अंतत: बाघ ने दम तोड़ दिया।
एनटीसीए प्रोटोकॉल के तहत पोस्टमार्टम, सभी अंग पाए गए सुरक्षित
बाघ की मृत्यु के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के कड़े दिशा-निर्देशों व प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणि) भोपाल के निर्देशों का अक्षरश: पालन करते हुए आगे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई। डॉ. संदीप अग्रवाल वरिष्ठ वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ. आशीष वैद्य पशु चिकित्सक, बैहर एवं डॉ. अनुष्का उपाध्याय पशु चिकित्सक, एसडब्ल्यूएफएच जबलपुर के तीन सदस्यीय विशेषज्ञ दल द्वारा मृत बाघ का पोस्टमार्टम किया गया। प्राथमिक शव परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार बाघ के शरीर के समस्त महत्वपूर्ण अंग पूरी तरह सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे किसी भी प्रकार के अवैध शिकार की आशंका खारिज होती है। हालांकि मृत्यु के सटीक और अंतिम कारणों का वैज्ञानिक रूप से पता लगाने के लिए फॉरेंसिक जांच के लिए विसरा के नमूने सुरक्षित कर लैबोरेट्री भेजे गए हैं।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुआ भस्मीकरण
पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद नामित सदस्यों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में बाघ के पार्थिव शरीर को पूर्ण रूप से मुखाग्नि देकर पंचतत्व में विलीन किया गया। इस संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान रवींद्र मणि त्रिपाठी क्षेत्र संचालक, कान्हा टाइगर रिजर्व, जमुना प्रसाद भगत तहसीलदार, बैहर, अजिनक्या देशमुख फील्ड बायोलॉजिस्ट, चंद्रेश खरे मानसेवी वन्य जीव अभिरक्षक, परशुराम चौहान एनटीसीए प्रतिनिधि, श्रीमती शकुंतला मरकाम सरपंच, बम्हनी तथा संबंधित परिक्षेत्र अधिकारी मुक्की सहित कान्हा टाइगर रिजर्व का अन्य मैदानी स्टाफ मुख्य रूप से मौजूद रहा।










