63 की उम्र, 35 साल का सफर और रोज 40 किमी साइकिल

फादर्स डे विशेष

63 की उम्र, 35 साल का सफर और रोज 40 किमी साइकिल

  • अंजनियां के रामगोपाल ने अखबार बांटकर संवारा बच्चों का भविष्य
  • पिता की विरासत, बेटे का साथ
  • हर मौसम से लड़कर पिता ने सिखाया मेहनत का पाठ
  • अब बेटा ‘गज्जू’ बंटा रहा जिम्मेदारियों में हाथ

मंडला महावीर न्यूज 29. सुबह के ठीक 6 बजते हैं। जब अधिकांश लोग अपनी नींद से जागकर दिन की शुरुआत की तैयारी कर रहे होते हैं, तब 63 वर्षीय रामगोपाल पटेल अपनी साइकिल पर सवार होकर सफर पर निकल चुके होते हैं। करियर के 35 साल और ढलती उम्र के बावजूद उनके जज्बे में कोई कमी नहीं आई है। साइकिल पर अखबारों का भारी बंडल लादे रामगोपाल जी रोज 35 से 40 किलोमीटर का सफर तय करते हैं, ताकि अंजनियां सहित आसपास के आधा दर्जन गांवों के पाठकों तक सुबह की ताजा खबरें वक्त पर पहुंच सकें।

फादर्स डे के खास मौके पर रामगोपाल पटेल की यह कहानी उन सभी पिताओं को समर्पित है, जो बिना थके, बिना रुके अपने परिवार के सपनों को पूरा करने के लिए जिंदगी भर संघर्ष की साइकिल चलाते रहते हैं।

मौसम कोई भी हो, कभी नहीं थमे कदम

रामगोपाल पटेल ने अखबार वितरण को सिर्फ एक रोजगार नहीं, बल्कि अपने जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी माना है। इसी सीमित आय से उन्होंने न केवल अपने परिवार का सम्मानजनक पालन-पोषण किया, बल्कि बच्चों को उच्च संस्कार, अनुशासन और समय की कीमत भी समझाई। कड़कड़ाती ठंड, चिलचिलाती गर्मी हो या मूसलाधार बारिश—मौसम का कोई भी मिजाज कभी उनके इस सफर के आड़े नहीं आ सका। आज के डिजिटल दौर में, जहाँ मोबाइल और इंटरनेट का दायरा लगातार बढ़ रहा है, रामगोपाल जी का मानना है कि प्रिंट मीडिया (अखबार) की विश्वसनीयता और पाठकों से उसका जमीनी जुड़ाव आज भी अटूट है।

पिता से सीखी मेहनत आज मेरी पहचान: बेटा गज्जू

रामगोपाल पटेल के पुत्र गज्जू पटेल अपने पिता के इस संघर्ष को करीब से देखकर बड़े हुए हैं। गज्जू बताते हैं, > “मैंने बचपन से ही बाबूजी को हर मौसम में बिना नागा किए काम करते देखा है। उन्होंने हमें हमेशा यही सिखाया कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बस उसे पूरी ईमानदारी और लगन से करना चाहिए।”

आज गज्जू को इस बात का गर्व है कि वे अपने पिता की इस उम्र में उनके साथ इस जिम्मेदारी में हाथ बंटा रहे हैं। वर्षों की इस कठिन मेहनत से रामगोपाल जी ने न केवल अपने परिवार का भविष्य संवारा, बल्कि समाज के सामने अनुशासन और कर्तव्यपरायणता की एक अनूठी मिसाल भी पेश की है।


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