प्राकृतिक कृषि अपनाकर गीता तेकाम ने कमाया 3 लाख से अधिक का शुद्ध मुनाफा
खेती में एमए पास बेटी का कमाल
- मंडला में आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
- सुपरफूड की खेती से कृषि सखी बनीं 125 किसानों की मार्गदर्शक
- गीता तेकाम बनीं मंडला जिले की प्रेरणा
मंडला महावीर न्यूज 29. ग्रामीण भारत में कृषि को केवल पेट भरने या जीविकोपार्जन का साधन मानने की सोच अब तेजी से बदल रही है। आज के दौर में ग्रामीण महिलाएं कृषि को एक घाटे के सौदे से उबारकर इसे एक सफल और मुनाफे वाले व्यवसाय के रूप में स्थापित कर रही हैं। मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले के विकासखंड बीजाडांडी अंतर्गत ग्राम लावर मुडिय़ा की निवासी श्रीमती गीता तेकाम ऐसी ही एक प्रगतिशील और प्रेरणादायक महिला कृषक हैं। उन्होंने आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और पारंपरिक प्राकृतिक खेती का ऐसा सटीक तालमेल बैठाया है, जिसने न केवल उनकी अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए समृद्धि का एक नया रास्ता खोल दिया है।
जानकारी अनुसार स्नातकोत्तर (एमए) तक शिक्षित गीता तेकाम के पास अपनी पढ़ाई के दम पर शहरों में रोजगार और नौकरी पाने के कई आसान विकल्प मौजूद थे। लेकिन उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी और कृषि को ही अपने जीवन का मुख्य लक्ष्य बनाया। दृढ़ संकल्प, निरंतर सीखने की ललक और एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बल पर उन्होंने पारंपरिक खेती की पुरानी सीमाओं को तोड़ दिया। गीता का स्पष्ट मानना है कि यदि किसान दृढ़ संकल्प ले लें, तकनीकी नवाचारों को समझें और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों का समन्वय करें, तो खेती को देश का सबसे बेहतरीन और लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।
मिला विभागीय मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग
गीता तेकाम की इस अद्वितीय सफलता के पीछे कृषि विभाग तथा आत्मा परियोजना का एक महत्वपूर्ण और मार्गदर्शक योगदान रहा है। विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में गीता ने हमेशा बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस सक्रिय भागीदारी के माध्यम से उन्होंने जैविक खेती, उन्नत बीजों का वैज्ञानिक चयन, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए जैविक कीट नियंत्रण जैसी आधुनिक तकनीकों को गहराई से सीखा। इसके साथ ही आत्मा योजना के सहायक तकनीकी प्रबंधक मोहित गोल्हानी द्वारा समय-समय पर उनके खेतों का व्यक्तिगत भ्रमण किया गया। उनके द्वारा दिए गए तकनीकी सुझावों और व्यावहारिक सलाहों का नतीजा यह रहा कि गीता की खेती की उत्पादकता और फसलों की गुणवत्ता में रिकॉर्ड सुधार देखने को मिला।
सुपरफूड की खेती और फसल विविधीकरण से बढ़ी आय
गीता तेकाम ने लीक से हटकर सोचने का साहस दिखाया। वे केवल पारंपरिक फसलों जैसे धान या गेहूं तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि बाजार की आधुनिक मांग और रुख को भांपते हुए उन्होंने चिया सीड और किनोवा जैसी उच्च मूल्य वाली सुपरफूड फसलों की खेती की शुरुआत की। उन्होंने महंगे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर अपनी निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर दिया। इसके स्थान पर उन्होंने अपने घर पर ही तैयार किए गए जीवामृत, घनजीवामृत और अन्य जैविक खादों का भरपूर उपयोग किया। मिश्रित और बहुफसली खेती की पद्धति अपनाने से उनकी भूमि की प्राकृतिक उर्वरता भी सुरक्षित रही, उत्पादन की लागत में भारी गिरावट आई और फसल खराब होने का जोखिम भी न्यूनतम हो गया। इसी का परिणाम है कि उनकी खेती अब अधिक टिकाऊ और अत्यधिक लाभकारी बन चुकी है।
सीमित संसाधनों में हासिल की बड़ी वित्तीय उपलब्धि
आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती और बाजार के बेहतर विपणन प्रबंधन के माध्यम से गीता तेकाम ने अपनी कृषि आय में जो उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर प्रबंधन से गीता तेकाम को 4 लाख 6 हजार 850 रुपये की कुल सकल आय प्राप्त हुई, जिसमें से 1 लाख 4 हजार रुपये लागत घटाकर उन्हें 3 लाख 2 हजार 850 रुपये का शुद्ध वार्षिक लाभ मिला। प्रतिवर्ष 3 लाख से अधिक का यह शुद्ध मुनाफा यह साबित करता है कि खेती को एक सफल कॉर्पोरेट मॉडल की तरह चलाया जा सकता है।
कृषि सखी बनकर बदल रहीं 125 से अधिक परिवारों की तकदीर
गीता तेकाम की इस असाधारण कार्यकुशलता और अद्भुत नेतृत्व क्षमता को देखते हुए सरकार द्वारा उन्हें नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत कृषि सखी के रूप में चयनित किया गया है। आज वे स्वयं तो आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी ही हैं, साथ ही अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों के लगभग 125 साथी किसानों को भी प्राकृतिक खेती की बारीकियों का प्रशिक्षण और निरंतर मार्गदर्शन दे रही हैं। उनकी इस जमीनी पहल से पूरे बीजाडांडी क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के प्रति एक नई चेतना जगी है।
सम्मान और प्रेरणा का केंद्र
कृषि क्षेत्र में किए गए इन बेहतरीन नवाचारों और उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए गीता तेकाम को आत्मा योजना के अंतर्गत जिला स्तरीय प्रगतिशील महिला कृषक सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। आज उनकी सफलता की गूंज सिर्फ बीजाडांडी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मंडला जिले के स्वयं सहायता समूहों, महिला किसानों और युवा बेरोजगारों के लिए एक बड़ा संबल बन चुकी है। गीता तेकाम आज उस सशक्त ग्रामीण महिला शक्ति का चमकता हुआ चेहरा हैं, जो अपने आत्मविश्वास और नेतृत्व से भारत की कृषि को एक नई और समृद्ध दिशा दे रही हैं।











