एमए पास युवा राजेंद्र सिंह ने आधुनिक और प्राकृतिक खेती से बदली अपनी किस्मत

नौकरी छोड़ खेती को चुना

मंडला के एमए पास युवा राजेंद्र सिंह ने आधुनिक और प्राकृतिक खेती से बदली अपनी किस्मत

  • चिया सीड और किनोवा जैसी सुपर फूड फसलों से दोगुनी की आय
  • राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत बने मास्टर ट्रेनर

मंडला महावीर न्यूज 29. राज्य शासन द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने और पर्यावरण अनुकूल प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों के जमीनी परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं। मंडला जिले के विकासखंड बिछिया के अंतर्गत ग्राम घुघरी के निवासी राजेंद्र सिंह पन्द्रे आज क्षेत्र के प्रगतिशील और सफल कृषकों में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुके हैं। ग्रामीण परिवेश से जुड़े स्नातकोत्तर एमए शिक्षित राजेंद्र सिंह ने पारंपरिक सोच से हटकर नौकरी के पीछे भागने की बजाय कृषि को अपनाकर आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल पेश की है।शुरुआत में पारंपरिक खेती करने वाले राजेंद्र सिंह ने कृषि विभाग व आत्मा परियोजना के अधिकारियों से संपर्क किया। आत्मा योजना के विकासखंड तकनीकी प्रबंधक ओमवीर सिंह रघुवंशी के तकनीकी मार्गदर्शन और समय-समय पर किए गए फील्ड विजिट से राजेंद्र सिंह का खेती के प्रति दृष्टिकोण पूरी तरह बदल गया। उन्होंने विभाग द्वारा आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर जैविक खेती, उन्नत बीज चयन, पोषक तत्व प्रबंधन तथा कीट नियंत्रण की आधुनिक व वैज्ञानिक तकनीकों को बारीकी से सीखा।

सुपर फूड की खेती से लागत हुई कम, मुनाफा हुआ दोगुना 

राजेंद्र सिंह ने अपने खेतों में नवाचार करते हुए पारंपरिक फसलों के साथ बाजार में ऊंचे दामों पर बिकने वाली चिया सीड एवं किनोवा जैसी सुपर फूड फसलों की खेती प्रारंभ की। उन्होंने अपने खेतों में रासायनिक खादों को पूरी तरह बंद करके जीवामृत, जैविक खाद, बहुफसली एवं मिश्रित खेती प्रणाली को अपनाया। इससे रासायनिक खादों पर होने वाला उनका भारी-भरकम खर्च लगभग समाप्त हो गया। खेती की लागत कम होने और प्रीमियम फसलों का उत्पादन बढऩे से उनकी कृषि आय में दो गुना तक की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

बायो रिसोर्स केंद्र की स्थापना, 400 से अधिक किसानों को दे रहे हैं ट्रेनिंग 

राजेंद्र सिंह पन्द्रे की उत्कृष्ट क्षमता और समर्पण को देखते हुए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत उनके कृषि फॉर्म पर एक बायो रिसोर्स केंद्र की स्थापना की गई है। इस केंद्र के माध्यम से वे स्वयं के उपयोग के साथ क्षेत्र के अन्य किसानों को भी जीवामृत और नीमास्त्र जैसे जैविक इनपुट व उत्पाद उपलब्ध करा रहे हैं। वर्तमान में वे नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य कर रहे हैं। वे अपने गांव के लगभग 125 किसानों सहित बिछिया विकासखंड के विभिन्न क्लस्टरों के 300 से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती का व्यावहारिक प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देकर स्वावलंबी बना रहे हैं।

खेत में कटाई से पहले ही बुक हो जाती है पूरी उपज 

प्राकृतिक और शुद्ध पद्धति से उगाई गई उनकी फसलों की मांग बाजार में इस कदर बढ़ गई है कि अब उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए मंडी के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। व्यापारी और ग्राहक उनकी फसल कटाई से पूर्व ही खेतों पर आकर अच्छे दामों पर एडवांस बुकिंग कर लेते हैं। हाल ही में उन्होंने प्राकृतिक पद्धति से उत्पादित गेहूं को 2600 से 2700 रुपये प्रति क्विंटल के प्रीमियम भाव पर सीधे खेतों से विक्रय किया है, जो कि सामान्य बाजार दर से काफी अधिक है।

जिला स्तर पर मिल चुका है सम्मान 

उत्कृष्ट कृषि पद्धतियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सराहनीय योगदान के लिए राजेंद्र सिंह को जिला स्तर पर आत्मा योजना के अंतर्गत प्रगतिशील कृषक के रूप में सम्मानित भी किया जा चुका है। वे अपनी सफलता का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत, नवाचार, परिवार के सहयोग और शासन की कल्याणकारी योजनाओं को देते हैं। राजेंद्र सिंह का कहना है कि मेहनत, नवाचार और प्राकृतिक खेती का संगम ही सफलता की असली चाबी है। यदि देश का शिक्षित युवा सही मार्गदर्शन और नई तकनीक को अपनाए, तो कृषि को आत्मनिर्भरता और ग्रामीण समृद्धि का सबसे मजबूत आधार बनाया जा सकता है। आज उनकी यह सफलता की कहानी पूरे महाकौशल क्षेत्र के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी है।


 

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