नारायणगंज बस स्टैंड चौपाटी पर अव्यवस्था का आलम
पैसे वसूलने के बाद भी सुविधाएं शून्य
- गंदगी के बीच व्यापार करने को मजबूर दुकानदार
- बिना सील-साइन की पर्ची थमाकर हर महीने वसूले जा रहे 1000 रुपये
- दुकानदारों ने लगाया भेदभाव का आरोप
मंडला महावीर न्यूज 29. जनपद पंचायत नारायणगंज के अंतर्गत पड़रिया उर्फ नारायणगंज बस स्टैंड पर बनाई गई चौपाटी इन दिनों पंचायत की मनमानी और अव्यवस्था का केंद्र बन चुकी है। पड़रिया ग्राम पंचायत द्वारा राज्य परिवहन की भूमि पर कब्जा जमाकर यहाँ चाय, नाश्ता और पान के ठेले वालों के लिए एक चौपाटी नुमा जगह बनाई गई थी। दावा था कि इससे अव्यवस्था सुधरेगी, लेकिन आज यहाँ के छोटे दुकानदार खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। पंचायत द्वारा हर महीने मोटी रकम वसूलने के बावजूद दुकानदारों को बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं हो रही हैं।
चौपाटी के दुकानदारों ने पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दुकानदारों का आरोप है कि पंचायत द्वारा उनसे अमानत के तौर पर दो हजार और हर महीने किराये के रूप में एक हजार रूपए की वसूली की जा रही है। इसके अलावा साफ-सफाई के नाम पर 50 प्रति सप्ताह अलग से लिए जाते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस वसूली के बदले जो रसीद दुकानदारों को दी जाती है, उसमें न तो पंचायत की आधिकारिक सील है और न ही सरपंच के हस्ताक्षर। रसीद पर केवल सचिव के हस्ताक्षर की एक चिडिय़ा बनी होती है, जिससे इस पूरी वसूली के सरकारी खाते में जाने पर संदेह खड़ा हो रहा है।
चारों तरफ गंदगी का अंबार, खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर
हफ्ते के 50 रूपए सफाई शुल्क देने के बाद भी चौपाटी पर सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप है। चारों तरफ डिस्पोजल, प्लास्टिक और पानी के पाउच बिखरे पड़े हैं, जिससे उठती बदबू के कारण ग्राहकों को खड़े होने में भी परेशानी होती है। मौसम की मार से बचने के लिए भी यहाँ कोई इंतजाम नहीं हैं। दुकानदारों का कहना है कि भीषण गर्मी और अब आने वाली बरसात में पाल तिरपाल लगाने तक की जगह नहीं दी गई है। पंचायत गाँव के अन्य रसूखदारों और दुकानदारों को तो सुविधाएं दे रही है, लेकिन हर महीने ईमानदारी से पैसा देने वाले गरीब ठेले वालों को खुले आसमान के नीचे व्यापार करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
धंधा चौपट, ऊपर से अधिकारियों की धमकी
दुकानदारों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि चौपाटी को अंदर की तरफ शिफ्ट कर देने के कारण ग्राहकों का आना कम हो गया है, जिससे उनका धंधा पूरी तरह चौपट हो गया है। कई बार तो दिनभर की लागत भी नहीं निकल पाती। ऐसे में हर महीने का एक हजार रूपए का किराया देना भारी पड़ रहा है। जब दुकानदार असमर्थता जताते हैं, तो पंचायत कर्मी आकर उन्हें धमकाते हैं कि यदि समय पर राशि नहीं दी या रसीद नहीं कटवाई, तो उनके ठेलों को चौपाटी से बाहर फेंक दिया जाएगा।
स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने की जांच की मांग
पीडि़त दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले की तत्काल निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि आखिर बिना सील की रसीद से वसूला जा रहा यह पैसा किस खाते में जा रहा है? दुकानदारों की मांग है कि बस स्टैंड चौपाटी पर पक्षपात बंद कर अन्य लोगों की तरह टीन शेड लगाए जाएं, ताकि बरसात के दिनों में वे अपनी रोजी-रोटी बचा सकें और सम्मान से व्यापार कर सकें।









