महाराजपुर संगम घाट पर गूंज रही शिव महिमा
पुरुषोत्तम मास में शिव महापुराण सुनने उमड़ रहा भक्तों का जनसैलाब
- भागवत भूषण विजयानंद शास्त्री के मुखारविंद से बह रही कथा की रसधारा
- यादव परिवार बम्हनी बंजर द्वारा कराया जा रहा भव्य आयोजन
मंडला महावीर न्यूज 29. मां नर्मदा के पावन तट महाराजपुर के पावन संगम घाट पर इन दिनों भक्ति का अनूठा माहौल देखने को मिल रहा है। पवित्र पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) के पावन अवसर पर यहाँ संगीतमय श्री शिव महापुराण कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक अनुष्ठान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और शिवभक्त पहुंचकर कथा श्रवण का लाभ ले रहे हैं। बम्हनी बंजर के यादव परिवार द्वारा आयोजित कराए जा रहे इस भव्य धार्मिक महोत्सव का विधि-विधान से समापन आगामी 16 जून को किया जाएगा।
शिव नाम स्मरण से दूर होते हैं सारे कष्ट: विजयानंद शास्त्री
कथा के मुख्य वाचक, सुप्रसिद्ध भागवत भूषण विजयानंद शास्त्री महाराज के मुखारविंद से शिव महापुराण की दिव्य रसधारा बह रही है। कथा व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शास्त्री जी ने पुरुषोत्तम मास की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पुरुषोत्तम मास का आगमन मानव जीवन में बड़े भाग्य और पुण्यों के उदय होने से होता है। इस विशेष महीने में की गई भक्ति का फल अनंत गुना हो जाता है।
शास्त्री जी ने भगवान भोलेनाथ की दयालुता का वर्णन करते हुए कहा:
“देवाधिदेव महादेव अत्यंत दयालु और भोले हैं। जो भक्त सच्चे मन से केवल उनके नाम का स्मरण मात्र कर लेता है, उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और वह परम सुख को प्राप्त करता है। शिव महापुराण साक्षात कल्याणकारी है।”
24 हजार श्लोकों में समाहित है जीवन का सार, बेलपत्र और रुद्राक्ष का बताया महत्व
कथा के दौरान महाराज जी ने बताया कि पवित्र श्री शिव महापुराण में कुल 24 हजार श्लोक समाहित हैं। यह पावन ग्रंथ मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, इन चारों पुरुषार्थों को प्रदान करने वाला है। कथा में शास्त्री जी ने भगवान शिव की प्रिय वस्तुओं जैसे बेलपत्र और रुद्राक्ष के आध्यात्मिक व वैज्ञानिक महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक लोटा जल और बेलपत्र अर्पण करने से आशुतोष भगवान प्रसन्न हो जाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने शिव नाम की महिमा का गुणगान किया, जिसे सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
शिव विवाह प्रसंग पर झूमे भक्त, अब होगी गणेश जन्म की कथा
संगीतमय शिव महापुराण के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का अत्यंत मनोहारी और जीवंत वर्णन किया गया, जिस पर भक्त भजनों की धुन पर झूमते और नृत्य करते नजर आए। कथा व्यास ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि आगामी दिनों में भगवान गणेश के जन्म की अलौकिक कथा का विस्तार से वर्णन किया जाएगा।
पुरुषोत्तम मास में दीपदान और स्नान का विशेष महत्व
श्रद्धालुओं को इस मास की महत्ता समझाते हुए विजयानंद शास्त्री जी ने कहा कि यह महीना स्वयं भगवान विष्णु का दिया हुआ नाम ‘पुरुषोत्तम’ है। इस पूरे महीने में पवित्र नदियों में स्नान, भगवान के सम्मुख दीपदान और पुराणों के श्रवण का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। ऐसा करने से अनजाने में हुए पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
बम्हनी बंजर के यादव परिवार द्वारा आयोजित इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने के लिए स्थानीय श्रद्धालु और सेवादार पूरी तन्मयता से जुटे हुए हैं। संगम घाट पर सुबह से लेकर शाम तक गूंजते ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयकारों से पूरा क्षेत्र शिवमय हो गया है।










