सिंहस्थ-2028 की तैयारी, नर्मदा तट पर रेस्क्यू का लाइव डेमो

सिंहस्थ-2028 की तैयारी, नर्मदा तट पर रेस्क्यू का लाइव डेमो

  • मंडला पुलिस को मिला विशेष आपदा एवं जल बचाव का व्यावहारिक प्रशिक्षण
  • कैबिनेट मंत्री, कलेक्टर और एसपी की मौजूदगी में प्रशिक्षण आयोजित

मंडला महावीर न्यूज 29.  वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले वैश्विक पर्व ‘सिंहस्थ’ की पूर्व तैयारियों के मद्देनजर मंडला जिला पुलिस द्वारा एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पुलिस अधीक्षक (SP) राजेश रघुवंशी के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) शिवकुमार वर्मा के मार्गदर्शन में जिला पुलिस बल के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विशेष आपदा एवं जल बचाव प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके तहत नर्मदा नदी के घाट पर बाढ़ और डूबते हुए व्यक्तियों को सुरक्षित निकालने का व्यावहारिक (लाइव) प्रशिक्षण दिया गया।

नर्मदा घाट पर हुआ रोंगटे खड़े कर देने वाला लाइव डेमो

प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षकों द्वारा वास्तविक संकटकालीन परिस्थितियों के अनुरूप एक लाइव डेमो प्रस्तुत किया गया। इसमें दिखाया गया कि यदि कोई व्यक्ति नदी में डूब रहा हो या बाढ़ जैसे हालात निर्मित हो जाएं, तो त्वरित गति से रेस्क्यू ऑपरेशन कैसे चलाया जाता है।

  • पुलिस बल को अत्याधुनिक जीवन रक्षक तकनीकों (Life Saving Techniques) की बारीकियां सिखाई गईं।
  • सुरक्षा उपकरणों के सही व त्वरित उपयोग, आपदा के समय सही निर्णय लेने और टीम समन्वय (Team Coordination) को लेकर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया।

कैबिनेट मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों ने की सराहना

नर्मदा तट पर आयोजित इस रेस्क्यू डेमो को देखने के लिए मध्य प्रदेश शासन की कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उईके, नगरपालिका अध्यक्ष विनोद कछवाहा, कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे, एसडीएम श्रीमती सोनल सिडाम, होमगार्ड प्लाटून कमांडर हेमंत परस्ते एवं सूबेदार गेलेंद्र नागेश विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने पुलिस बल और होमगार्ड के जवानों के उत्साह व समर्पण की जमकर सराहना की।

सिंहस्थ-2028 और जनसुरक्षा के लिए बड़ी पहल

उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने माना कि सिंहस्थ-2028 जैसे विशाल और ऐतिहासिक आयोजन में देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह प्रशिक्षण बेहद अनिवार्य और समयोचित है। मंडला पुलिस की यह पहल भविष्य में आने वाली किसी भी प्रकार की बाढ़, जल दुर्घटनाओं अथवा प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।


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