अमेजन और इंस्टाग्राम के जरिए देशभर में पहुंच रही जनजातीय संस्कृति की झलक
- इंद्री की दीवारों पर जीवंत हुई गोंडी कला
- कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे ने महिला कलाकारों को किया प्रोत्साहित
मंडला महावीर न्यूज 29. जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक कला को नई पहचान देने वाली ग्राम पंचायत इंद्री आज अपनी आकर्षक गोंडी पेंटिंग्स के कारण विशेष पहचान बना रही है। गांव की सड़कों और सार्वजनिक स्थलों की दीवारों पर उकेरी गई रंग-बिरंगी गोंडी पेंटिंग्स स्थानीय लोगों के साथ-साथ यहाँ आने वाले आगंतुकों को भी मंत्रमुग्ध कर रही हैं। हाल ही में कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे ने इंद्री पहुंचकर महिला कलाकारों से मुलाकात की और उनकी अद्भुत कलात्मक प्रतिभा की सराहना की।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मिली वैश्विक पहचान, आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं
‘स्वदेशी स्व-सहायता समूह’ की सदस्य सुश्री सुमन बंदेवार ने बताया कि गांव की 11 महिला सदस्य बड़ी बारीकी और धैर्य से इस पारंपरिक गोंडी पेंटिंग को तैयार कर रही हैं। अब यह कला केवल गांव की दीवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन और “गोंड आर्ट मंडला” नामक इंस्टाग्राम पेज के जरिए देशभर में इसकी बिक्री हो रही है। इस नवाचार से समूह की प्रत्येक महिला सदस्य को हर महीने औसतन लगभग 7 हजार रुपये की आय हो रही है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
दीवारों पर उतरी जनजातीय जीवन और प्रकृति की झलक
गांव की सड़कों के किनारे बनाई गई ये पेंटिंग्स जनजातीय जीवन, प्रकृति, पशु-पक्षियों और लोक संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत करती हैं। यह कला न केवल गांव का सौंदर्य बढ़ा रही है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त कर रही है। उल्लेखनीय है कि गोंडी कला को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) भी प्राप्त हो चुका है, जिससे इसकी विशिष्टता और वैश्विक पहचान और मजबूत हुई है।

कान्हा नेशनल पार्क में बिक्री केंद्र और प्रशिक्षण की मांग
मुलाकात के दौरान महिला कलाकारों ने कलेक्टर के समक्ष दो महत्वपूर्ण सुझाव रखे:
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गोंडी पेंटिंग के लिए एक विशेष प्रशिक्षण केंद्र या वर्कशॉप स्थापित की जाए।
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कान्हा नेशनल पार्क के प्रवेश द्वार और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर उनकी कलाकृतियों के प्रदर्शन व बिक्री की व्यवस्था की जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों तक इसकी पहुंच बन सके।
कलेक्टर ने दिया हरसंभव मदद का भरोसा
कलेक्टर श्री धोटे ने महिलाओं के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए कहा:
“गोंडी कला हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है। इसके संरक्षण, संवर्धन और बेहतर विपणन (Marketing) के लिए प्रशासन हरसंभव कार्य करेगा ताकि कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा बाजार मिल सके।”
मुलाकात के अंत में महिला कलाकारों ने अपनी हस्तनिर्मित गोंडी पेंटिंग और कलात्मक डायरी कलेक्टर को स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट की। इंद्री की ये महिलाएं आज परंपरा और आजीविका के बीच एक प्रेरणादायी सेतु बनकर उभर रही हैं।











