आजीविका मिशन के जरिए मिट्टी के पारंपरिक उत्पादों की होगी ब्रांडिंग और मार्केटिंग

आजीविका मिशन के जरिए मिट्टी के पारंपरिक उत्पादों की होगी ब्रांडिंग और मार्केटिंग

कलेक्टर ने माटी कला के साधक बलराम से की आत्मीय मुलाकात

  • पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों को पुनर्जीवित करने पर हुई सार्थक चर्चा
  • शिल्पकार के घर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी

मंडला महावीर न्यूज 29. आधुनिकता की तेज रफ्तार के बीच अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को संजोए रखने वाले माटी कला के कुशल शिल्पकार बलराम चक्रवर्ती से मंडला कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे ने उनके निवास पर पहुँचकर आत्मीय मुलाकात की। इस विशेष भेंट के दौरान कलेक्टर ने चक्रवर्ती द्वारा वर्षों से संरक्षित और विकसित की जा रही पारंपरिक माटी कला का नजदीक से अवलोकन किया और उनके अनुभवों को साझा किया। इस अवसर पर सहायक कलेक्टर शैलेन्द्र चौधरी, एसडीएम मंडला श्रीमती सोनल सिडाम और सीएमओ नगरपालिका गजानंद नाफड़े सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।मुलाकात के दौरान शिल्पकार बलराम चक्रवर्ती ने मिट्टी से विशेष रूप से घी रखने के लिए उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक पात्र का निर्माण कर उसकी अनूठी विशेषताओं से प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में भोजन, अनाज, घी और अन्य आवश्यक वस्तुओं के सुरक्षित भंडारण के लिए मिट्टी के अलग-अलग प्रकार के बर्तनों का उपयोग किया जाता था, जो न केवल पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल थे बल्कि मानवीय स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद लाभकारी माने जाते थे।

आजीविका मिशन के साथ मिलकर काम करने का सुझाव 

कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे ने इस कला की सराहना करते हुए कहा कि हमारी परंपराएं और लोक कलाएं आने वाली पीढिय़ों के लिए अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को सुझाव दिया कि ऐसे सभी पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों और उनके विशिष्ट उपयोगों की एक विस्तृत सूची तैयार की जाए, ताकि उन्हें संरक्षित करने और आम जनता तक पहुंचाने के लिए प्रभावी प्रयास किए जा सकें। कलेक्टर ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर इन उत्पादों की उत्कृष्ट मार्केटिंग, ब्रांडिंग और पहचान दिलाने के लिए काम किया जाए। इससे न केवल दम तोड़ती माटी कला को नया जीवन मिलेगा, बल्कि इससे जुड़े स्थानीय कारीगरों को रोजगार एवं आय के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

कलाकारों को मिले बेहतर मंच तो नई पीढ़ी भी होगी प्रेरित 

इस अवसर पर भावुक होते हुए शिल्पकार बलराम चक्रवर्ती ने कहा कि वे माटी कला की इस अमूल्य विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। उन्होंने प्रशासनिक अमले के सामने बात रखते हुए कहा कि यदि स्थानीय कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए शासन स्तर पर बेहतर मंच और बाजार के अवसर उपलब्ध हों, तो न केवल यह कला जीवित रहेगी बल्कि नई पीढ़ी भी इससे जुडऩे के लिए प्रेरित होगी। प्रशासन और शिल्पकार के बीच हुई यह मुलाकात मिट्टी से जुड़ी सांस्कृतिक चेतना को सम्मान देने का एक सराहनीय प्रयास साबित हुई है।


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