शासकीय नौकरियों में दो बच्चों की अधिकतम सीमा होगी समाप्त, भव्य सिंहस्थ-2028 की तैयारियां तेज

शासकीय नौकरियों में दो बच्चों की अधिकतम सीमा होगी समाप्त

सीएम डॉ. मोहन यादव ने लिया ऐतिहासिक निर्णय

  • प्रस्तावित सिविल सेवा नियम का प्रारूप निरस्त
  • पोर्टल से तत्काल हटाने के निर्देश; वर्ष 2001 से चली आ रही व्यवस्था बदलेगी

भोपाल/मंडला महावीर न्यूज 29.  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शासकीय कर्मचारियों और युवाओं के हित में एक बड़ा और दूरगामी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम में शासकीय नौकरी के लिए ‘दो बच्चों की अधिकतम सीमा’ संबंधी प्रावधान वाले प्रस्तावित प्रारूप नियम को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही इस विवादित प्रारूप को शासकीय पोर्टल से तत्काल विलोपित (हटाने) करने के कड़े आदेश भी जारी किए हैं।

क्या थी वर्ष 2001 की प्रचलित व्यवस्था?

गौरतलब है कि वर्ष 2001 में तत्कालीन राज्य सरकार के निर्णय के बाद सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा एक नियम लागू किया गया था। इस व्यवस्था के अनुसार, मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 के तहत 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को शासकीय सेवाओं की सीधी भर्ती और विभागीय नियुक्तियों के लिए अपात्र घोषित करने का प्रावधान था। इसके अलावा, मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत शासकीय सेवक के दो से अधिक बच्चे होने को कदाचार (गलत आचरण) की श्रेणी में रखा गया था।

सीएम के कड़े निर्देश: नया प्रारूप विधिवत किया जाए प्रकाशित

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस संवेदनशील विषय पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सामान्य प्रशासन विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रस्तावित मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम के इस विवादित प्रारूप को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। उन्होंने आदेश दिया है कि नियम में से ‘दो से अधिक जीवित संतान होने पर शासकीय सेवा में अपात्र माने जाने’ संबंधी सभी प्रावधानों को पूरी तरह हटाकर (विलोपित कर) पुनः विधिवत एक नवीन और संशोधित प्रारूप प्रकाशित किया जाए। सीएम के इस कदम से प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और शासकीय नौकरी की राह देख रहे उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।


दिव्य और भव्य सिंहस्थ-2028 की तैयारियां तेज

₹491 करोड़ के 17 नए विकास कार्य मंजूर

  • महाकाल लोक में लगेंगी पत्थर-धातु की 99 भव्य प्रतिमाएं
  • सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक
  • ओंकारेश्वर के लिए बनेगा पृथक प्राधिकरण
  • एयर एम्बुलेंस को मिलेगी मंजूरी

भोपाल/उज्जैन/मंडला महावीर न्यूज 29.  मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आगामी ‘सिंहस्थ-2028’ को दिव्य, भव्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुव्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक विकास अभियान तेज कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सिंहस्थ-2028 मंत्रिमंडलीय समिति की छठवीं महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में सिंहस्थ की तैयारियों को गति देते हुए ₹491.66 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के 17 नए विकास एवं निर्माण कार्यों को प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की गई।

हजारों करोड़ के कार्य प्रगति पर, कई जिलों में जारी है विकास गतिविधियां

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सिंहस्थ-2028 के सफल आयोजन के लिए अब तक कुल 16,910 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम लागत के 148 विकास एवं निर्माण कार्य धरातल पर प्रगति पर हैं। इस महाआयोजन को ध्यान में रखते हुए केवल उज्जैन ही नहीं, बल्कि ओंकारेश्वर, देवास, इंदौर, खंडवा, आगर-मालवा, शाजापुर, मंदसौर और खरगोन जिलों में भी व्यापक विकास गतिविधियां लगातार जारी हैं। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और चिकित्सा सुविधाओं के लिए अभी से सूक्ष्म कार्ययोजना (माइक्रो प्लानिंग) बनाकर काम करें।

महाकाल लोक की बदलेगी सूरत, ओंकारेश्वर में बनेगा बड़ा अस्पताल और हेलीपैड

एक बड़ा निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उज्जैन के प्रसिद्ध ‘श्री महाकाल लोक’ में पूर्व में स्थापित फाइबर की प्रतिमाओं के स्थान पर अब पत्थर एवं विभिन्न टिकाऊ धातुओं से निर्मित 99 भव्य और कलात्मक प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके साथ ही, ओंकारेश्वर में एयर एम्बुलेंस सुविधा को बल देने के लिए नए हेलीपैड और एक बड़े आधुनिक अस्पताल के निर्माण को हरी झंडी दी गई है। ओंकारेश्वर-बड़वाह-खेड़ीघाट क्षेत्र के समग्र और सुनियोजित विकास के लिए एक पृथक विकास प्राधिकरण गठित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।

पुल-सड़कें और मल्टीलेवल पार्किंग को मंजूरी, पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर

बैठक में उज्जैन में यातायात सुगमता के लिए कई नए पुल, चमचमाती सड़कें, पंचक्रोशी मार्ग और विश्राम गृहों के निर्माण को स्वीकृति दी गई। वहीं, ओंकारेश्वर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मल्टीलेवल पार्किंग, अत्याधुनिक फूड कोर्ट, रेलवे आरओबी (ओवरब्रिज), अस्पताल एवं अन्य जनसुविधा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। शिप्रा नदी के घाटों के बेहतर प्रबंधन के लिए स्थानीय आश्रमों और गुरुकुलों को जोड़े जाने की अनूठी पहल की जाएगी।

त्वरित मुआवजा, होटल निर्माण को बढ़ावा और 15 लाख पौधरोपण का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ प्रबंधन को चाक-चौबंद करने के लिए पुलिस, जिला प्रशासन और नगर निगम के संयुक्त प्रशिक्षण व मॉक ड्रिल आयोजित करने पर विशेष जोर दिया। मार्ग चौड़ीकरण के दौरान अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में एकरूपता (समानता) बरतने और प्रभावितों को त्वरित मुआवजा देने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण के तहत उज्जैन क्षेत्र में 15 लाख पौधे लगाने का विशाल लक्ष्य तय किया गया है। इसके अलावा, श्रद्धालुओं के ठहरने की उत्तम व्यवस्था के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसके तहत इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में नए होटलों के निर्माण की अनुमतियों का समय-सीमा में त्वरित निराकरण किया जाएगा।


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